Sunday, January 8, 2012

telvision script

हाथरस में घास की मंडी में आज उस समय लोग हैरान रह गए ! जब एक अनजान युवक नगर पालिका की पानी की टंकी पर ऊपर चढ़ गया और हैरतंग्रेज हरकत करने लगा ! जल्दी ही लोगों ने इसकी सूचना पालिका अधिकारियों को दी , उन्होंने समझा बुझाकर जैसे तैसे इस युवक को नीचे उतारा और पुलिस के सुपुर्द कर दिया ! पालिका अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर टंकी की सफाई भी कराई
हाथरस में घास की मंडी पानी की टंकी पर टॉप पर चक्कर लगा रहे इस युवक को देखिये ! यही नहीं यह युवक इतनी कड़क सर्दी में कपडे उतारकर दंड पेल रहा है ! और अजीबो गरीब हरकतें कर रहा है ! इस युवक को सूचना पर आये पालिका अधिकारियों ने जैसे तैसे नीचे उतारा और उसे पुलिस को सौंप दिया ! अपनी हरकतों से विक्षिप्त दिख रहा युवक यह तो बता रहा है कि उसका नाम फौजी है और वह हसायन के गाँव रामपुर का रहने वाला है ! लेकिन यह पूछे जाने पर कि वह टंकी पर क्यों चड़ा वह ऊल जलूल जबाव दे रहा है
इस युवक की इन हरकतों ने पालिका के अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं ! उन्होंने आनन्-फानन में पूरी टंकी की सफाई करा दी है ! अब उन्हें अपनी कमी भी नजर आने लगी है , पूछने पर वाटरवर्क्स इंजी. ने बताया है कि वैसे तो युवक पागल रहा है लेकिन उसने कुछ टंकी में डाल न दिया हो इस अंदेशे से टंकी की सफाई कराई गयी है , उनका यह भी कहना है कि आगे कोई टंकी पर न पहुंचे इसके लिए सीड़ी पर गेट लगवाया जाएगा !
यह हरकत भले ही एक विक्षिप्त दिख रहे एक युवक की है लेकिन उसने यह आइना दिखा दिया है कि जनता को सप्लाई होने वाले पानी की सप्लाई के मामले में पालिका कितनी लापरवाह है और उसकी यह लापरवाही लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है !

Friday, January 6, 2012

Cash Recover

दिल्ली से सटे नोएडा पुलिस ने 6 लोगों का हिरासत में ले कर उनके कब्जे से 43 लाख रूपये बरामद किये है..यह लोग कैश के बारे में आवश्यक दस्ताावेज उपलब्धर नहीं करा पाये थे.. पुलिस ने यह कार्रवाही प्रदेश में लगी आचार संहिता के उल्लदघंन करने पर की है..जिसके अनुसार 2.5 लाख से ज्यािदा पैसा लेकर चलने पर आवश्यक दस्ताकवेज के साथ पैसे के स्त्रो֑त की जानकारी देना आवश्यरक कर दिया गया है.. पुलिस ने 3 लोगों को सेक्टवर -24 थाना क्षेत्र सेक्टरर-32 से 23 लाख कैश और 3 तीन लोगों को सेक्टवर-18 से 20 लाख कैश के साथ हिरासत में लिया है..एक शख्सह को विदेश मुद्रा डालर जिसका भारतीय 12 लाख था.. के साथ पकडा गया था..लेकिन उसके द्वारा आवश्यकक दस्ताुवेज उपलब्धत करा दिये जाने के बाद उसे जाने दिया गया..पुलिस ने कैश बरामदगी की सूचना चुनाव आयोग और आयकर विभाग को दे दी है

Tuesday, December 27, 2011

यादगार ऐ ग़ालिब

यादगार ऐ ग़ालिब के नाम से इस साल गालिब की हवेली को दिल्ली की विरासत के तौर पर पर्यटन राह की पर एक महत्वपूर्ण हवेली बनाने के उद्देश्य से हवेली में उल्लेखनीय परिवर्तन की तैयारी है-------मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्म दिन के मोके पर पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान की तंग ओर गलियों में रौनक आ गई---दिल्ली की मुख्यमंत्री ओर फ़िल्मी गीतकार गुलजार ने इस हवेली में जाकर ग़ालिब को याद किया ----- इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन के सोजन्य से प्रायोजित प्रदर्शनी और गालिब के जीवन ओर उनसे जुड़े पहलुओ को साउंड ट्रैक द्वारा प्रायोजित करने की योजना का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया ---- तीन दिनों तक मनाए जाने वाले जश्न यादगार ऐ ग़ालिब के दोरान मुश्यारा, गीत ओर नाटकों का आयोजन भी किया जायेगा ----यादगार ऐ ग़ालिब के नाम से इस साल गालिब की हवेली को दिल्ली की विरासत के तौर पर पर्यटन राह की पर एक महत्वपूर्ण हवेली बनाने के उद्देश्य से हवेली में उल्लेखनीय परिवर्तन की तैयारी है-------मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्म दिन के मोके पर पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान की तंग ओर गलियों में रौनक आ गई---दिल्ली की मुख्यमंत्री ओर फ़िल्मी गीतकार गुलजार ने इस हवेली में जाकर ग़ालिब को याद किया ----- इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन के सोजन्य से प्रायोजित प्रदर्शनी और गालिब के जीवन ओर उनसे जुड़े पहलुओ को साउंड ट्रैक द्वारा प्रायोजित करने की योजना का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया ---- तीन दिनों तक मनाए जाने वाले जश्न यादगार ऐ ग़ालिब के दोरान मुश्यारा, गीत ओर नाटकों का आयोजन भी किया जायेगा ----

Saturday, December 17, 2011

हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के मुसलमां है हम

शुक्रे खुदा करते हैं हम
सजदा-ए - हक़ अदा करते है हम
दिल में बसा है मादरे वतन
तुझसे मोहब्बत ए वतन करते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इस शोरो गुल के गुबार में
इन इधर उधर की पुकार में
इन रंगे हुए सियार में
तेरी सियासत समझते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के दिलो जिगर और जां है हम
तिरंगे की शान है हम
खुद क़ाबिज़ो मुखतार है हम
वतन की पहचान है हम
फिर सोचते है कुछ क्यों
बिन बुलाए मेहमां है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इज्ज़त अमन और रोज़गार
बस चंद अपने अरमां है
जितने हम में हैं
उतने ही तुम में है
इतेहापसंद कुछ यहां है
कुछ वहां हैं
हिन्द के मुसलमां है हम

इसकी मिट्टी में दफन है हम ही
इसकी ख़ाक से बने है हम ही
इसके गली कूचों मे चले हैं हम ही
अपने पुरखों की यहीं आशियां है
वासी यहां के हम हैं ये अपना मकां है
हिन्द के मुसलमां है हम ....

Sunday, December 11, 2011

जिन्दगी का रिश्ता

जिन्दगी का रिश्ता ..जिन्दगी से कुछ ऐसा हुआ की जिन्दगी को ही भुला दिया .ज़िन्दगी जो दायरों और मिनारों और चौखटों से कभी बाहर नहीं आई ..वो आज कूचों और मौहल्लों में सफर करती नज़र आ जाती है..। कुछ सोच कर करना कुछ मुनासिब तरीके से पेश करना शायद इसका शऊर ज़िन्दगी को कभी हुआ ही नहीं... जिन्दगी कितने लंबे ग्रंथ में कही जा सकती है या फिर कितने कम शब्दों में बयान की जा सकती है इसका एहसास एक जिन्दगी गुज़ारने के बाद ही होता है.पर हां ज़िन्दगी होती बड़ी दिलचस्प है ..क्योंकि एक जिन्दगी से कई ज़िन्दगियां जुड़ी होती हा और हर जुड़ी हुई ज़िन्दगी से कई और और ज़िन्दगिया... हर का तार एक दूसरे से .. दिलचस्प ये नहीं कि हर तार एक दूसरे तार से जुड़ा होता है दिलचस्प ये कि हर तार एक दूसरे से जु़ड़े नही रहना चाहता पर फिर भी जुड़ा रहता है .. जैसे पानी की वो धारा जो किनारे पर सिर्फ दम तोड़ने आती है ...पानी की मुख्य धारा से अलग हो कर मिट्टी को सीचने के लिए और फिर अपने साथियों से हमेशा हमेशा के लिए जुदा होकर फसाना बन हो जाती है ... धारा जिन्दगी नहीं बन सकती पर ज़िन्दगी को धारा की ज़रूरत हमेशा रहती है । क्योंकि ज़िन्दगी को हर वक्त कोई न कोई चाहिए जो उसे नम रखे ... ग़मगीन रखे..हां ग़म का रिश्ता ज़िन्दगी से जुड़ा ही रहता ..या फिर ग़म और ज़िन्दगी एक साथ चलने के लिए ही आते है ..उस महफिल में शिरकत करते है जहां उन जैसे या तो हाज़ारों मिल जायेगे या फिर उन जैसा कोई नहीं...
हम अपने जैसी जिन्दगी खोजने में भी माहिर है ..या ज़िन्दगी हमें हम जैसी दूसरी ज़िन्दगी से मिला ही देती है ...वो ज़िन्दगी जो हमारे साथ चलती है .और चलने का वादा करती है ..और ज़िन्दगी वादे निभाते और तोड़ते हुए आगे चल ही देती है ..।
हम कुछ भी करे ज़िन्दगी का रिशता बना ही रहता है ..एक ज़िन्दगी तक....

Saturday, December 10, 2011

कब कहां और कैसे

कब कहां और कैसे
काग़ज़ की एक कश्ती
पानी में कुछ यूं चली
लोगों ने कहा
क्या खूब बढ़ी..
फिर न जाने किस सैलाब में
बह गई
कब कहां और कैसे..
एक छोटा दीया था
कुटिया को रोशन किया करता था
अपनो के लिए जीया करता था
फिर न जाने किस तूफान में बुझ गया
कब कहा और कैसे
एक नन्हा बूटा था
अपने बगीचे में रहता था
खूब खुशबू देता था
सब को अच्छा लगता था
फिर न जाने किस आंधी मे टूट गया
कब कहा और कैसे
एक प्रेमी जोड़ा था
बहुत खुश रहता था
एक दूसरे के साथ चल था
फिर न जाने किस मोड़ पे मुड़ गया
कब कहा और कैसे...

Sunday, December 4, 2011

हम क्या करते हैं TAI

theatre artiste of india


थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया ... नाटक के क्षेत्र में पूर्ण संस्था है ..। यहां नाटक की हर शैली में कार्य होता है ..और रंगमंच की नई शैली को जन्म दिया जांता है ।यहां कलाकार का जन्म भी होता है और कलाकार बनाया भी जाता है।
रंगमंच को समाज का आईना कहते है ..इस समाज में क्या हो रहा है ,क्या होना चाहिए ..कौन क्या कर रहा किसे क्या करना चाहिए ये सब हम नाटक में प्रस्तुत करते हैं।
विशेषकर ऐसी सरकारी, समाजिक योजनाए और नीतियां जो आम लोगों के लिए आती हैं लेकिन उसकी जानकारी उन तक नहीं पहुच पाती ..इन्ही योजनाओ और कार्यक्रम को हम छोटे छोटे नाटक स्किट हास्य और मंनोरंजन की शैली में इस तरह पीरोते हैं कि जो भी देखे उसे हर बात समझ में आ जाए।
थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया के पास देश के प्रसिद्ध कलाकार, निर्देशक, लेखक की एक लंबी टीम है जो किसी भी विष्य को अच्छे सीधे सरल और मंनोरंजन के साथ बनाती है कि अधिक से अधिक सोचना और ज्ञान लोगों तक पहुचए।
जो बात आप न कहे सके न समझा सके ..वो आप हमे बताए ..आपकी बात लोगो तक हम नए अंदाज़ से पहुचाएगें
थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया ने अभी भारत के कृषि मंत्रालय के लिए तीन ऐसे नाटक पेश किये जिसकी चर्चा किसान अपने घरों में आज भी कर रहे हैं...
हम नाटक नहीं परिवार और समाज बनाने में यकीन करते हैं और मुखिया से लेकर सब से छोटे सदस्य तक को महत्व देने पर विश्वास रखते हैं। उम्मीद है आप का हमारा सफर जल्द शुरू होगा... और चलता ही रहेगा..।।