Tuesday, June 21, 2016

Story by Haider Abbas Naqvi-- in HUMRANG

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Thursday, April 14, 2016

Wednesday, March 16, 2016

दिल तोड़ दिया

कुछ तो दुनिया कि इनायात ने दिल तोड़ दिया
और कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया
हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आयी बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया
दिल तो रोता रहे, ओर आँख से आँसू न बहे
इश्क़ की ऐसी रवायात ने दिल तोड़ दिया
वो मेरे हैं, मुझे मिल जायेंगे, आ जायेंगे
ऐसे बेकार ख़यालात ने दिल तोड़ दिया
आप को प्यार है मुझ से के नहीं है मुझ से
जाने क्यों ऐसे सवालात ने दिल तोड़ दिया 

Tuesday, August 25, 2015

आगा हशर

तुम और फरेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से
तुम से तो कम गिला है ज़ियादा नसीब से
गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है
होता है पहारों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से
बरबाद-ए-दिल का आखरी सरमाया थी उम्मीद
वो भी तो तुम ने छीन लिया मुझ ग़रीब से
धुंधला चली निगाह दम-ए-वापसी है अब
आ पास आ के देख लूँ तुझ को क़रीब से
-आगा हशर