Sunday, September 28, 2008

बोम्ब फटा

फिर क्यों नही फटा बम्ब

बम्ब फटा और धंधा शुरु हो गया हर तरफ से कलम काग़ज़ माइक कैमरा लेकर देश के सिपाही निकल पड़े सब एक से बड़ कर एक हर एक के पास अपनी दलील अपने विचार सब आतंकवाद के खिलाफ पर आंतकवादी के कारनामों से परिचित सब चाहते की कोई बेगुनाह को सज़ा न हो और कोई आंतकवादी भी न बचे आंतकवाद क्यो पंपा इस पर बहस हुई बटला हाउस मे क्या हुआ इस पर कहानी रची गई जामिया क्यों अपने बच्चों का बचाव कर रहा इस पर चर्चा हुई शिवराजपाटिल ने कितने सूट बदले सब को दिखाया गया लो फिर बंब फटा और धंधा शुरू हो गया
चम्चों का कभी काम चल गया सर क्या स्टोरी लिखी सर क्या ब्लाग में लिखा आप ही लिख सकते है साथ में अपनी भी एक थियोरी पेल दी बंब निरोधक दस्ते में लो वो शामिल हो गये आंतकवाद के खिलाफ उन्होने भी आवाज़ उठा दी
लो बंब फटा फिर धंधा शुरू हो गया
यही मौका था करियर की शुरूआत थी बंब से ज़ोरदार और कौन सी स्टोरी हो सकती है खून से ज्यादा और कौन छाप छोड़ सकता है रोती हुई औरतों से ज्यादा अच्छी तस्वीरे कौन पेश कर सकता है ... ये सब करना है क्यो कि आखिर में मुझे सुनना है वाह भाई ब्लास्ट क्या आपने दिखाया

फिर बम्ब फटा और धंधा शुरू हो गया ।

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