Tuesday, October 21, 2008

आस

आस

वो जो खुशियों का एक दीपक बन कर
मेरी ज़िन्दगी में आया था ।
शायद कल्पनाओं का एक साया था
भूल गया था मैं जिन्दगी के ....
हर दुख़ ,हर ग़म ,हर तंनहाई....
अंजान कर दिया था ....
उसने मुझे ग़मों से, परिचित कर दिया था
उसने मुझे गैरो से
कितना खुशनुमा झोका बन कर आया था ......

लेकिन जीवन केवल सुखों का पल थोड़ी है
जब चाहा मैने अपनाना उसे ....
मन के एक कोने चाहा बिठाना उसे
दूर बहुत दूर चला गया वो ....
मुस्कुराहट भी मेरी साथ ले गया वो ...
कितना रोया कितना छटपटाया था मैं...
शायद कभी तो हाथ आयेगा वो ...

लेकिन उसे न आना था न ही वो आया था
वो तो एक साया था ... हां वो तो एक साया था ....

मेरा मन ही पागल था जो उसे पकड़ने को भरमाया था
क्या कभी समुद्र की लहरों से रेत के घरौंदे बचे
या फिर कभी सपने भी हक़ीक़त हुये हैं
तो फिर साया कैसे हाथ आता ...
हां वो सिर्फ साया था .. सिर्फ साया था ... साया ही था



पर ज़िन्दगी नहीं मानती हम नहीं रुकते हम साये के साथ ही जीते है सपनों मे ही रहते हैं ... जानते हुये भी उसी ओर चलते है जिस तरफ मंज़िल का कोई नामोनिशान नहीं ... क्यो ...भला क्यों ....

शायद एक आस के लिये ... आस हां उम्मीद... यही ज़िन्दगी है ....
आज बस इतना ही .... कल शुरू करेगें एक नई कहानी.....

8 comments:

Udan Tashtari said...

शायद एक आस के लिये ... आस हां उम्मीद... यही ज़िन्दगी है ....
आज बस इतना ही .... कल शुरू करेगें एक नई कहानी.....



--बहुत बढ़िया!!

नारदमुनि said...

zindgi me aas har samay rakhna ye aas hee to hai jo aadmi ke bure dino me bhee jeene ki aas jagaye rakhati hai

MANVINDER BHIMBER said...

लेकिन जीवन केवल सुखों का पल थोड़ी है
जब चाहा मैने अपनाना उसे ....
मन के एक कोने चाहा बिठाना उसे
दूर बहुत दूर चला गया वो ....
मुस्कुराहट भी मेरी साथ ले गया वो ...
कितना रोया कितना छटपटाया था मैं...
शायद कभी तो हाथ आयेगा वो ...
bahut sunder

manish said...

Haider, manzil usi ko milti hai jo chalta rehta hai..........

But keep on writing, will wait for more stuff from you.

talib said...

bahut hi umda nazm.

yahi dua hai zore qalam aur zyada!

preeti said...

Is zindagi mein ek saaya hi khwab nahi haqiqat hai,
ek saaya hi apna hai,ek saccha saathi aur aapki aashaon se parichit hai.

But beautufully written Haider.Lagta hai yeh aah dil se nikali hai.

nikhil nagpal said...

kyonki shaan sahab...har nayi subah ki tazgi,ek naye rang ki khushboo se nikharti hai!sapne dekhna utna hi jaruri hai jitna ki saans lena!

Anonymous said...

bahut accha hai yaar
lage raho