Friday, November 14, 2008

कुछ यादे...शायरों के नाम...

कुछ यादे....

बेहतरीन शायरी....

हर दर्द,हर मरज़ की दवा है तुम्हारे पास ।
आते हैं सब यहीं कि शफा है तुम्हारे पास ।।
बीमारे ग़म हैं,दूर से आये हैं सुनके नाम ।
कहते हैं दर्दे-दिल की दवा है तुम्हारे पास।।
.....
वो अक्स अपना आईने में देखते हैं ।
सितम आज उन पर नया हो रहा है ।।
मैं खामोश बैठा हूं उस बुत के आगे ।
निगाहों में मतलब अदा हो रहा है ।।
.....
ज़ाहिदों को किसी का खौफ नहीं ।
सिर्फ काली घटा से डरते हैं ।.
चाहे तुम हो या नसीब अपना ...
हम हर एक बेवफा से डरते हैं....
....
क्या खबर कैसे मौसम बदलते रहे ।
धूप में हमको चलता था चलते रहे ।।
शमा तो सिर्फ रातों को जलती है ।
औऱ हम हैं कि दिन रात जलते रहे ।।
....
तुम न आये तो क्या सहर न हुई ।
हां मगर चैन से बसर न हुई ।.
तुम भी अच्छे ,रक़ीब भी अच्छे ।
मैं बुरा था ,मेरी गुज़र न हुई ।।

2 comments:

M said...

लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में
किसकी बनी है आलम-ए-ना-पायदार में

कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाए थे चार दिन
दो आरजू में कट गए, दो इंतज़ार में

insanic said...

sir,
hats off !!!
i am touched after reading your blog . i dont think that everybody can write this with the same feelings and emotions.. only a committed journalist like you can pen down his actual feelings like this.now i am sure i will be a regular reader of your blog sir...