Monday, December 1, 2008

सलाम

शहीदों के नाम

पसीना मौत के माथे पे आया आईना लाओ
हम अपनी ज़िन्दगी की आखरी तस्वीर देखेगें।।

क्या जाने खयाल आ गया किस बात का हमको
रोके से जो रूकती नहीं अशकों की रवानी ।।

दमे आखिर भी उनका ये अहतराम हुआ ।
उठे न हाथ तो आंखों ही से सलाम हुआ ।।

फरेब खाते रहे एतबार करते रहे
खिज़ा भी आई तो ज़िक्र बहार करते रहे ।।
बहार में भी तलाशे बहार करते रहे ।
तमाम उम्र तेरा इंन्तज़ार करते रहे।।

..... सलाम ... आपको हमारा ...

1 comment:

रज़िया "राज़" said...

दमे आखिर भी उनका ये अहतराम हुआ ।
उठे न हाथ तो आंखों ही से सलाम हुआ
bahut khoob.ye rachna pasand aai.