Tuesday, February 17, 2009

अविनाश विनाश की राह पर...

अविनाश विनाश की राह पर...

आज जब ये खबर मिली की अविनाश दाश ने एक लड़की के साथ बल्तकार किया है तो एक दम से झटका लगा ....फिर जा कर नेट पर देखा तो बात छेड़खानी की लिखी थी ...फिर किसी और का ब्लॉग पढा तो उसमें लिखा था कि उन्होने उसको पहले... दफ्तर बुलाया फिर उसे घर छोड़ने का ऑफर दिया ..फिर उससे चाय पीने को कहा ..फिर उसके कमरे मे घुसे ..फिर रेप की कोशिश की ...जब उसने विरोध किया तो उसे छोड़ कर चले गये बाद में एस एम एस का दौर शुरू हुआ...
कहने का मतलब ये है किसी के पास पूरी जानकारी नहीं है ..पर मुंह से बात निकल रही है और फैलती जा रही..हमें कुछ लिखने से पहले ,कुछ बोलने से पहले सच की पड़ताल कर लेनी चाहिये...
जहां तक मुझे पता है अविनाश एक बहुत ही गरीब परिवार से आते हैं..उनके पिता दिन रात शराब मे डूबे रहते हैं..उन्होने काफी संघर्ष किया और आगे बढ़े.. लिखते बढ़िया हैं इसमें कोई दो राय नहीं.
जब उन्हे टीवी चैनल में नौकरी मिली तो उन्होने अपने दोस्तों से कहा यार बहुत पैसा मिल रहा है .. जबकि उस वक्त उनकी सैलरी दफ्तर में दूसरे लोगों को मिलने वाली पगार से काफी कम थी ...
उन्होने डेस्क में क्राइम में काफी काम किया है ..इस लिये अगर ऐसी हरकत उन्होने की है तो इसके नतीजे के बारे में उन्हे पता होगा ..
बेटी ब्लॉग लिखने पर उन्हे ऑर्वड भी मिल चुका .जो लड़की के बारे इतने अच्छे विचार रखता हो ..वो इस तरह की हरकत करे ... बहुत शर्मनाक बात है ..
एक साल के करीब की उनकी बेटी भी है
पर अगर किसी लड़की ने उनकी शिकायत की है तो वो बेबुनियाद नहीं होगी ..
अगर संस्थान ने उन्हे निकाला है तो कोई कारण भी होगा..
आम आदमी की तरह शयाद अविनाश भी शौहरत के नशे में डूब तो नहीं गये .जिन बॉसों की वो आलोचना करते थे कहीं उनकी तरह खुद तो नहीं हो गये..
लेकिन फिर कहूंगा हमें किसी के चरित्र के बार में कहने से पहले सोच लेना चाहिये ..आप को याद दिला दू ..2003 या 04 में एक रावण की भूमिका अदा करने वाले अभिनेता की भांजी ने उस पर ऐसा ही आरोप लगाया था....वो बार बार कहता रहा कि उसने कुछ नहीं किया ...पर मीडिया ने उसे रावण मामा बना दिया था ..और सब ने उसे बल्तकारी बता दिया अंत में उसने खुदकुशी कर ली ...
जो सच है वो सामने आये ..अगर अविनाश दोषी हैं.... उनको कानूनी तौर पर जो सज़ा हो वो मिले..और अगर साज़िश है तो उन साज़िश करने वालो का पर्दाफाश हो ....

15 comments:

Anonymous said...

Zimedari se likhane ke liye dhanyawad...

Anonymous said...

क्‍या सचमुच एक झूठ से सब कुछ ख़त्‍म हो जाता है?

मुझ पर जो अशोभनीय लांछन लगे हैं, ये उनका जवाब नहीं है। इसलिए नहीं है, क्‍योंकि कोई जवाब चाह ही नहीं रहा है। दुख की कुछ क़तरने हैं, जिन्‍हें मैं अपने कुछ दोस्‍तों की सलाह पर आपके सामने रख रहा हूं - बस।

मैं दुखी हूं। दुख का रिश्‍ता उन फफोलों से है, जो आपके मन में चाहे-अनचाहे उग आते हैं। इस वक्‍त सिर्फ मैं ये कह सकता हूं कि मैं निर्दोष हूं या सिर्फ वो लड़की, जिसने मुझ पर इतने संगीन आरोप लगाये। कठघरे में मैं हूं, इसलिए मेरे लिए ये कहना ज्‍यादा आसान होगा कि आरोप लगाने वाली लड़की के बारे में जितनी तफसील हमारे सामने है - वह उसे मोहरा साबित करते हैं और पारंपरिक शब्‍दावली में चरित्रहीन भी। लेकिन मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं और अभी भी पीड़‍िता की मन:स्थिति को समझने की कोशिश कर रहा हूं।

मैं दोषी हूं, तो मुझे सलाखों के पीछे होना चाहिए। पीट पीट कर मुझसे सच उगलवाया जाना चाहिए। या लड़की के आरोपों से मिलान करते हुए मुझसे क्रॉस क्‍वेश्‍चन किये जाने चाहिए। या फिर मेरी दलील के आधार पर उसके आरोपों की सच्‍चाई परखनी चाहिए। लेकिन अब किसी को कुछ नहीं चाहिए। पी‍ड़‍िता को बस इतने भर से इंसाफ़ मिल गया कि डीबी स्‍टार का संपादन मेरे हाथों से निकल जाए।

दुख इस बात का है कि अभी तक इस मामले में मुझे किसी ने भी तलब नहीं किया। न मुझसे कुछ भी पूछने की जरूरत समझी गयी। एक आरोप, जो हवा में उड़ रहा था और जिसकी चर्चा मेरे आस-पड़ोस के माहौल में घुली हुई थी - जिसकी भनक मिलने पर मैंने अपने प्रबंधन से इस बारे में बात करनी चाही। मैंने समय मांगा और जब मैंने अपनी बात रखी, वे मेरी मदद करने में अपनी असमर्थता जाहिर कर रहे थे। बल्कि ऐसी मन:स्थिति में मेरे काम पर असर पड़ने की बात छेड़ने पर मुझे छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया।

ख़ैर, इस पूरे मामले में जिस कथित क‍मेटी और उसकी जांच रिपोर्ट की चर्चा आ रही है, उस कमेटी तक ने मुझसे मिलने की ज़हमत नहीं उठायी।

मैं बेचैन हूं। आरोप इतना बड़ा है कि इस वक्‍त मन में हजारों किस्‍म के बवंडर उमड़ रहे हैं। लेकिन मेरे साथ मुझको जानने वाले जिस तरह से खड़े हैं, वे मुझे किसी भी आत्‍मघाती कदम से अब तक रोके हुए हैं। एक ब्‍लॉग पर विष्‍णु बैरागी ने लिखा, ‘इस कि‍स्‍से के पीछे ‘पैसा और पावर’ हो तो कोई ताज्‍जुब नहीं...’, और इसी किस्‍म के ढाढ़स बंधाने वाले फोन कॉल्‍स मेरा संबल, मेरी ताक़त बने हुए हैं।

मैं जानता हूं, इस एक आरोप ने मेरा सब कुछ छीन लिया है - मुझसे मेरा सारा आत्‍मविश्‍वास। साथ ही कपटपूर्ण वातावरण और हर मुश्किल में अब तक बचायी हुई वो निश्‍छलता भी, जिसकी वजह से बिना कुछ सोचे हुए एक बीमार लड़की को छोड़ने मैं उसके घर तक चला गया।

मैं शून्‍य की सतह पर खड़ा हूं और मुझे सब कुछ अब ज़ीरो से शुरू करना होगा। मेरी परीक्षा अब इसी में है कि अब तक के सफ़र और कथित क़ामयाबी से इकट्ठा हुए अहंकार को उतार कर मैं कैसे अपना नया सफ़र शुरू करूं। जिसको आरोपों का एक झोंका तिनके की तरह उड़ा दे, उसकी औक़ात कुछ भी नहीं। कुछ नहीं होने के इस एहसास से सफ़र की शुरुआत ज़्यादा आसान समझी जाती है। लेकिन मैं जानता हूं कि मेरा नया सफ़र कितना कठिन होगा।

एक नारीवादी होने के नाते इस प्रकरण में मेरी सहानुभूति स्‍त्री पक्ष के साथ है - इस वक्‍त मैं यही कह सकता हूं।

Anonymous said...

अविनाश को लेकर ब्लॉग से लेकर मीडिया के गलियारे तक में चर्चाएं गरम हैं। कुछ मजे ले रहे हैं तो कुछ अविनाश के लिए चिंतित हैं। मै भी चिंतित हूं। चिंता अविनाश और उसके परिवार को लेकर है। चिंता उस मानसिकता को लेकर है कि एक लड़की आरोप लगाती है और हम यकीन कर लेते हैं। यकीन ही नहीं अविनाश को दोषी भी बना देते हैं। यदि अविनाश ने ऐसा कुछ किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन यह तकलीफदायक है कि एक आरोप को आधार बनाकर उसे न सिर्फ नौकरी से निकाल दिया जाता है बल्कि अपराधी की तरह सलूक भी किया जा रहा है। आरोपी लड़की को जो लोग जानते हैं, वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि इस लड़की का चरित्र कैसा है। यूनिवर्सिटी के छात्र के अलावा उसके शिक्षक भी आपको यह बता देंगे। इसके अलावा आरोप लगाने वाली लड़की अनुजा बिहार में जहां रही है उसके पड़ोसियों लेकर दिल्ली तक में इसके किस्से सुने जा सकते हैं। यकीन मानिए उसे जानने वाले उसे गालियों से विभूषित करते हैं । मर्यादा का ध्यान रखते हुए अनुजा के बारें में मैं कुछ नहीं कहूंगा लेकिन उसके चरित्र के बारें में भी लोगों को पता होना चाहिए। यकीन नहीं हो तो मेडिकल जांच करवा लेनी चाहिए उसकी। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

Arvind Mishra said...

पर अगर किसी लड़की ने उनकी शिकायत की है तो वो बेबुनियाद नहीं होगी ..
क्या यह ध्रुव सत्य है ?

सतीश पंचम said...

अरविंद जी, आपकी बात से सहमत हूँ। ध्रुव सत्य तो कत्तई नहीं मान सकता । सिर्फ इस बात पर कि आरोप लगाने वाली लडकी है, ज्यादातर लोगों द्वारा पलडे को एक ओर झुका देना उचित नहीं होगा। खैर, जो भी हो, अविनाश जी के लिये कामना करूंगा कि इस घटाटोप से जल्द बाहर निकलेंगे ।

Anonymous said...

savita bhabhi jaisI porn site ko badhava dene vale se aur kya ummed ho sakati hai

chaddi said...

बहुत अच्छा लिखा है
कल विरोध ब्लाग पर भी बहुत सुन्दर और प्यारे ढंग से लिखा गया था, हमें विश्वास है कि आगे भी विरोध और जनादेश पर एसी ही सूचनायें मिलती रहेंगी

साधुवाद

sareetha said...

अफ़वाहें किस तरह रुप आकार लेकर सच में तब्दील हो जाती हैं और सच का स्वरुप ही बदल जाता है , ये घटना उसका ज्वलंत उदाहरण है । चारों तरफ़ बवंडर सा आ गया है । लेकिन कुछ सवाल अभी तक मुँह बाये खड़े हैं । मामले की रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं कराई गई । अविनाश को सज़ा दिलाने की बजाय उन्हें नौकरी से निकालने की बात लेकर छात्रों का मैनेजमैंट से मिलना इतना ज़रुरी क्यों हो गया ? मामला अब तक थाने नहीं पहुँचा ,मगर समाचार पत्र ने इतनी तुरत - फ़ुरत नौकरी से बर्खास्त करने का फ़ैसला क्यों लिया । अदालत से दोषी करार दिये बगैर क्या किसी को भी कही - सुनी बातों के आधार पर तत्काल नौकरी से हटाया जा सकता है ? कहीं कुछ तो है ,जो सामान्य नहीं है ।

Hari Joshi said...

देखिए सच क्‍या है उसके बारे में अविनाश और शिकायत करने वाली लड़की के अलावा कोई नहीं जानता लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ लोग इस प्रकरण की आड़ में निजी दोस्‍ती (?) निकाल रहे हैं।

Anonymous said...

आपलोग जिस व्यक्ति की सफाई छाप-छापकर उसके लिए सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, वो किसी भी तरह सहानुभूति या समर्थन का पात्र नहीं है। जो लोग उसे करीब से जानते हैं, उन्हें पता है कि वो इसी तरह का आदमी है। पटना में भी उसपर ऐसे ही बलात्कार की कोशिश का आरोप लगा था। जहां तक साज़िश वाली बात का सवाल है तो जिस ब्लॉगर पर ये आरोप लगा है वो इतनी बड़ी हस्ती नहीं है कि उसे फंसाने के लिए कोई दुश्मन किसी लड़की या कॉल गर्ल का इस्तेमाल करेगा, न ही कोई आम हिन्दुस्तानी लड़की या छात्रा अपना करियर और इज्जत दांव पर लगाकर उसके खिलाफ कैंपेन चलाएगी। इस तरह की बातें करना एक तरह से उस छात्रा का उल्टा चरित्रहनन है। आप किस आधार पर कह सकते हैं कि आपके ब्लॉगर भाई पवित्र हैं और वो लड़की चरित्रहीन। वो लड़की अभी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही है, आखिर वो क्यों किसी को बदनाम भर करने के लिए अपना करियर और इज्जत दांव पर लगा देगी। चूंकि आप ब्लॉगर लोग इस तरह के मामलों में चटखारे लेने के आदी हो गए हैं, इसलिए अपने ब्लॉगर भाई के लिए सहानुभूति बटोरने में लगे हैं। वरना सोचिए वो लड़की भी किसी की बहन है, किसी की बेटी है। अगर हमारी-आपकी बहन या बेटी के साथ ऐसा हो जाए, तो भी क्या हम ऐसी ही संवेदनहीनता दिखाएंगे, जैसी कि आरोप लगाने वाली लड़की के साथ कई ब्लॉगों पर दिखाई जा रही है? ये बड़े अफसोस की बात है कि आपलोग परोक्ष रूप से एक चरित्रहीन, कुंठित, भ्रष्ट और बेईमान आदमी का बचाव कर रहे हैं। उसके पिछले चैनल एनडीटीवी के लोग भी बताते हैं कि वो ऐसा ही था। बाहर वह ऐसे बताता था, जैसे चैनल की एडिटोरियल टीम के टॉप ब्रास में था वो, लेकिन एनडीटीवी के अंदर के लोग बताते हैं कि पूरे चैनल तो छोड़िए, वहां के आउटपुट डेस्क के पहले दस लोगों में भी नहीं था वो। उसकी बेशर्मी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उसे नौकरी से निकालने की नोटिस दी जा रही थी, उन दिनों भी वह दूसरों को नौकरी दिलाने के ख्वाब दिखाता रहता था। आखिर वहां से उसे बेइज्जत करके निकाला गया। प्रभात खबर के लिए काम करते हुए देवघर में भी उसका यही हाल था। आखिर क्यों उसी के खिलाफ साजिश होती रहती है? आप लोग ऐसे झूठे, मक्कार, भ्रष्ट, कुंठित और चरित्रहीन व्यक्ति के लिए सहानुभूति बटोरने का काम करेंगे, इसकी उम्मीद नहीं थी।

Anonymous said...

जो लोग अविनाश को जानते हैं, वो जानते हैं कि वो एक घटिया आदमी है। इस मामले में साज़िश वाली थ्योरी में इसलिए दम नहीं है, क्योंकि खुद उसने अपनी सफाई में माना है कि उसने लड़की को दफ्तर बुलाया और उसे घर छोड़ने का ऑफर दिया और घर जाकर छोड़ा भी। क्या साज़िश करने वाला उसके दिमाग में बैठकर साजिश कर रहा था, जो उसने लड़की को बुलाया और फिर उसे छोड़ने का ऑफर दिया? सच तो ये है कि अविनाश ऐसा ही है। चूंकि आपलोग उसे उसके ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं इसलिए उसके लिए सहानुभूति हो रही है और चूंकि आपलोग उस लड़की को नहीं जानते, इसलिए उसकी मनस्थिति का अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे। कुछ मित्रों ने उस लड़की के चरित्र पर भी टिप्पणी की है। वो यह भूल रहे हैं कि आरोप लगाने वाली लड़की वह कोई वेश्या या कॉल गर्ल नहीं, बल्कि देश के एक महत्वपूर्ण पत्रकारिता संस्थान में पढ़ रही छात्रा है। क्या उसे अपनी इज्जत और करियर का ख्याल नहीं होगा? आखिर वह क्यों किसी को फंसाने के लिए अपनी इज्जत दांव पर लगा देगी? यह आपलोगों की स्त्रीविरोधी मानसिकता बोल रही है, जो स्त्रियों को सिर्फ भोग की वस्तु समझती है। अविनाश के पैरोकार उसे वामपंथ और स्त्रीवाद से जोड़ रहे हैं। आखिर कितना जानते हैं वो अविनाश को? क्या उन्हें पता है कि वो किस दर्जे का अय्याश और कुंठित आदमी है? क्या उन्हें उसका पुराना इतिहास मालूम है? क्या उन्हें पता है कि पिछले दफ्तरों में उसने क्या-क्या गुल खिलाए और किन हालात में पिछले दफ्तरों से भी उसे निकाला गया? आखिर उसी के खिलाफ क्यों होती रहती हैं साजिशें? क्या दास इतना महान और नामचीन व्यक्ति है कि उसके खिलाफ इस स्तर की साजिश होगी? दास के वकीलो, आपलोग भी या तो उसी जैसे हो या फिर भोले हो या अनभिज्ञ हो। सच ये है कि दास बहुत गंदा आदमी है। पहले भी उसपर बलात्कार की कोशिश के आरोप लगे हैं। अभी वह इतना बड़ा नहीं हुआ है कि उसे फंसाने के लिए बार-बार लड़कियों को मोहरा बनाया जाएगा। जहां तक उस लड़की के पुलिस में नहीं जाने का सवाल है तो आप जानते हैं कि वह क्यों नहीं गई होगी। वह निश्चित रूप से उस फजीहत और परेशानी से बचना चाहती होगी, जो सबको पता है कि पुलिस में एक बार चले जाने पर तमाम औरतों को झेलनी पड़ती है। उसके पुलिस में नहीं जाने को अविनाश का ढाल मत बनाओ, उसे उस लड़की की मजबूरी के तौर पर देखो।

मनीषा पांडेय said...

Miya Benami aap kaun ? Aapko kya sapna aaya ki mai phone karke ro rahi hun. Support kar rahi hun. Kabhi mere hatho ladki ko dhamkate hai… kabhi mere aansu bahate hai… aap log hain kya? Mere aansuon ki khabar mujhase pahle aap tak pahunchi hai…
Mai aise longo ke liye aansu nahi bahati…. Sab sambhalkar rakhe hai is dharti se bedakhal aadhi aabadi ke liye.

PD said...

जहां तक मुझे पता है अविनाश एक बहुत ही गरीब परिवार से आते हैं..उनके पिता दिन रात शराब मे डूबे रहते हैं..
पहली बात सही, और दूसरी बात सरासर गलत.. इतना ही काफी है यह बताने को कि आप अविनाश को कितना जानते हैं.. प्लीज कोई कयास ना लगायें..

Anonymous said...

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