Saturday, February 7, 2009

Just for you

आप के लिये.....

कितनी खामोश निगाहों ने बुलाआ मुझको ।
कितनी मगरूर अदाओ ने लुभाया मुझको ।।
कितने दिल थे जो मेरे वास्ते बेताब रहे ।
कितनी आंखों ने मेरे प्यार के सपने देखे ।।
नाज़नीनों ने मेरे प्यार में ,मरना सीखा।
कितनी ज़ुल्फों ने मेरे ,ग़म में बिखरना सीखा ।।
हर तरफ मेरे लिये हुस्न के नज़ारे थे ।
मेरे हमराह कभी चांद, कभी तारे थे ।।
फिर भी ठुकरा दी तेरे वास्ते दुनिया मैने ।
किसी जलवे की तरफ मुड़ के न देखा मैंने ।।
मैं तो बस तेरी निगाहों का तमन्नाई था।
तेरी जुल्फों की घनी छांव का शैदाई था ।।
मेरी आंखों में तेरे हुस्न की रा नाई थी ।
मेरे दिल में तेरी तस्वीर उतर आई थी ।।
मेरे होंठों पे मचलते थे तराने तेरे ।
मेरी आंखों से छलकते थे फ़साने तेरे ।।
मैं हमेशा तेरी जुल्फों का गिरफ्तार रहा ।
लबो-रूखसार की जन्नत का परस्तार रहा ।।
मैंने शादाब किए तेरी मुहब्बत का चलन छोड़ दिया।
मेरी उम्मीद का हर ताजमहल तोड़ दिया ।।
छीन के चैन मेरा ,तोड़ के पैमाने ए दिल ।
करके बरबाद मेरे प्यार की रंगी महफिल ।।
अब किसी औऱ की महफिल को सजाने के लिए ।
तूने जुल्फों को संवारा है ज़माने के लिये ।।
मेरी आंखों में तेरे ग़म की नमी आज भी है ।
कल भी थी तेरी कमी ,तेरी कमी आज भी है ।।
आज भी मैं हूं,तेरी याद है ,तन्हाई है ।
वही ग़म है ,वही धड़कन,वही रूसवाई है ।।
क्या खबर थी कि तू इस तरह बदल जायेगी ।
मेरी दुनिया से दबे पांव निकल जायेगी ।।
सोचता हूं कि ज़माने से किनारा कर लूं ।
और अब इसके सिवा दूसरा चारा भी नहीं ।।
क्या करूं जी के ज़माने में कि अब तेरे बगैर ।
एक नाकामे महुब्बत का गुज़ारा भी नहीं ।।

3 comments:

विनय said...

बहुत सुन्दर कविता!

M said...

wah! Kya likha hai, kiska hai!!??

Anonymous said...

Kinara kar ke bhi main kinare na aa saka,
har baar kinare se kuch yaad utha lata hoon
aur
samundra ki lahero ki tarah bhir bich mein aa jata hoon
kab
hawa badelegi
aur main kahi door majdhaar mein
tumahi khusiyo mein ek kinara deikh saku

rangat bahut hai gum bahut hai
woh din door nahi jab noor kuda ka tum per padega aur roshni aise hi phel jayegi