Sunday, March 29, 2009

शक्ले बदलेगीं पर नज़रे नहीं

देखो उसने मुझे देखा
अच्छा लगा
फिर देखा तो
मैने कुछ सोचा
जब फिर देखा तो
कुछ अटपटा लगा
अब वो फिर देख रहा
और मुझसे बर्दाशत नही हो रहा
क्यो ये मुझे बार बार देखा रहा
देखने की भी हद होती है
हिम्मत कर के मैने भी उसे देखा
पर कुछ देर के बाद मैं न देख पाई
पर वो देखता जा रहा है
मुझे तो अब घबराहट हो रही है
कौन है ..क्यों देख रहा है
क्या कोई जान पहचान का है
आस पडोस का
कोई रिश्तेदार या कोई रिश्ते लाने वाला
पर ऐसे कैसे मुझे ये देख सकता है
पास जाऊं..नही नहीं बेकार की बात है
क्यों बात को बढ़ाऊं
पर अब भी मुझे वो देख रहा है
अब मुझे डर लगा रहा
क्या चाहता है
क्यों इस तरह..
बार-बार मेरी तरफ
मेरी तरफ मेरी तरफ
क्या मंशा है
क्या करूं ..क्या न करू
शोर करूं..ज़ोर से
नहीं नहीं नहीं
यहां से भागों पर कहा
क्या इन नज़रों से बच सकती हूं
या ये नज़र मेरा पीछा छोड़ सकती हैं
मुझे तो इन आंखों के साथ ही जीना है
इन्ही के साथ रहना
जहा भी पहुचना है वहां इन्ही को पाना
शक्ले बदलेगीं पर नज़रे नहीं
लोग बदलेगे पर सोच नहीं

Saturday, March 28, 2009

देश में राज गांधी ही करेगे..राहुल हो या वरूण..

देश में राज गांधी ही करेगे..राहुल हो या वरूण..

ये बात मज़ाक नहीं है हकीकत है .देश के साथ बीजेपी को भी समझ में आजाना चाहिये । जहां इस चुनाव में हर तरफ आडवाणी का नाम होना चाहिये था वहां हर तरफ गांधी औऱ गांधी यानी नेहरू के पर-नवासों का नाम गूंज रहा है ...
क्या अब बीजेपी भी गांधी परिवार के आधीन हो कर रहे जाये गी ..
शयाद आज इस बात को कोई स्वीकार न करे पर ये वो सत्य है जिसे आज नहीं तो कल आप को मानना ही पडेगा..

आप ज़रा ध्यान से देखिये भारत में सिर्फ एक ही परिवार है जिसे राजनीति आती है और जो राजनीति कर रहा बाकी सब आते हैं और जाते हैं । उसी तरह जिस तरह भारत मे भले कहने को कितनी पार्टियां हो पर असल में राष्ट्रीय पार्टी सिर्फ दो हैं
कांग्रेस और बीजेपी .. अब ज़रा इन का इतिहास देखिये कांग्रेस का अस्तिव बिना गांधी के कुछ नहीं है ...कुछ भी अगर होगा वो गांधी ही करेगा।जितने भी दिग्गज हों पर चलते तभी है जब गांधी आगे हो ..वरना जो उनका हश्र हुआ वो सब के सामने है

अब बात बीजेपी की करें ये बात अब जग ज़ाहीर हो गई है कि आडवाणी जी का पीएम बनना आसान नहीं ..साफ कहूं तो नामुमकीन ही है ..ये बात बीजेपी भी जानती है और आडवाणी जी भी .वो कितने मजबूत नेता है और कितनी निर्णायक सरकार वो दे सकते हैं ये भी सब को पता है ...पहले राम का सहारा था पर वो सहारा भी ज्यादा काम नही आया.. इंडिया की चमक और प्रमोद महाजन की मौत के बाद छूमंतर हो गया ...

अब डूबती कश्ती को सहारा मिला तो किसका, गांधी का ..जी गांधी आया वरूण के रूप में ..पहले तो गांधी को मानने से इंकार किया सब ने , उसने जो कहा वो उसके शब्द है उसकी सोच है ..नकवी साहब ने तो ये भी कहा ये सोच नेहरू परिवार की हो सकती है ..

लेकिन जल्द ही आडवाणी से राजनाथ ..रविशंकर ,जेटली और भी पहेली और दूसरी पंक्ति के नेताओं ने ये समझ लिया अगर जो हमको पार लगा सकता है वो गांधी ही है ..इसलिये इस बार गांधी के वार को खाली नहीं जाने देना .

देखिये आने वाले कुछ सालों की ही बात होगी जब इधर और उधर गांधी ही होगें.वरुण बीजेपी के पोस्टर बॉय राहुल कांग्रेस के ..गांधी के दोनो तीर मियान से बहार है देश के सिहासन पर कौन बैठे गा देखना है ..पर हां बैठेगा गांधी ही ये तय है .. तमाश जारी है मज़ा लूटे...

Wednesday, March 25, 2009

बस चल दिये

तलाश में किस की भटक रहे हैं हम ...
किस के लिये तरस रहे हम
न जाने खुदा को क्यों ढ़ूढ़ रहे हम ...
मौला मौला, आका आका, रब्बा रब्बा याद आ रहा है क्यों..
चाहिये एक ज़मीन.. .चाहिये एक नगर
गली गली इधर उधर क्यों मुड़ रहे हैं हम ..
देखो वो देख रहा है..
वो सब जान रहा है
उस को सब पता है
वो ही तुम्हारा है
वो ही तुम को लाया है
वो ही तुम को लेकर जायेगा
तुम अकेले नही हो
वो तुम्हारे साथ है
क्यो डर रहे हो
किससे डर रहे हो
उसे सब मालुम
वो किसी को कुछ नहीं बतायेगा
बस तुम को समझायेगा
दिलासा देगा
सहारा बनेगा
रास्ता दिखायेगा...
तुम को उससे मिल कर अच्छा लगेगा..
अरे वो तुम्हारे बारे में सब जानता है ..
तुम किससे मिलते हो
किससे मिलना चाहते तो
उसको पता है....
देखो कुछ दिन की तो बात है
फिर सब ठीक हो जायेगा
सब पहले जैसा
बिल्कुल पहले जैसा..
हां वो भी मिलेगे
और वो भी मिलेगा...
क्या चाहिये और..
कुछ बचा है क्या
अरे जो बच गया वो भी मिल जाये गा..
बस एक या दो दिन..
क्यों नही होगा अरे
सब कुछ तो हुआ है वो भी हो जायेगा..
देखो देखो सब भूल जाऊ..
अरे कर के तो देखो .
.मानो तो...बस यही है
बात नहीं मानते
मान जाते तो आज ये नहीं होता .
पर तुम क्यों मानोगे
आज तक कुछ माना है जो अब..
बस यार रहने दो
तुम्हारा कुछ नही हो सकता है
बस यूंही कूढ़ते रहो ..सड़ते रहों
अरे तुम्हारे लिये कितना किया
और कोई क्या करेगा ...
बस बहुत हुआ अब ताकत नही है
तुम्हारी जिन्दगी है तुम जानो
हम तो समझा सकते थे
समझा दिया ...
आगे अल्ला मालिक..
पर क्या करे दिल दुखता है
भई ग़लती हो गई माफ कर दो..
अच्छा जी चलें
ठीक .. देखो..सुनो ..चलो छोडो
तुम्हारी मर्जी़ ..जो दिल में आये करो.....

Sunday, March 22, 2009

जय श्री राम...वरूण गांधी...चुनाव आयोग

वरूण गांधी बन ही जायेंगें बड़े नेता ...बीजेपी का नया चेहरा...
आखिर चुनाव आयोग ने बीजेपी को निर्देश दे दिया की वरूण गांधी को टिकट न दे.।साथ ही इस बात को भी साफ कर दिया की वरूण के टेप के साथ कोई छेड़ छा़ड़ नहीं की गई..। इसी के साथ बीजेपी का असली चेहरा भी सामने आ गया .उसने साफ कह दिया वो वरूण गांधी को टिकट दे गी..साथ ही चुनाव आयोग को उसकी औकात भी बता दी की उस के पास ये अधिकार नहीं है कि वो किसी पार्टी को ये निर्देश दे की वो किस को टिकट दे और किस को नहीं ...
अभी तक अपने को इस मामले से अलग रखने वाली बीजेपी आचान क्यों बदल गई..अब ये सवाल उठता है ... इस सवाल का सीधा जवाब है कि पर्दे के पीछे और पर्दे के सामने की कहानी में बहुत अंतर होता है...
राजनीति में जो कहा जाता है उसका वो मतलब नही होता जो आप समझते है या देश को समझाया जाता है ..बीजेपी या फिर कहे एनडीए कि नइया इस बार डामा डोल है ..उनके स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी पिछले विधानसभा में फ्लाप हो चुके है .. वरूण गांधी उनके लिये एक नई उम्मीद लेकर आयें है ..फिर से लोगों की जुबान पर जय श्री राम आया है
वरूण गांधी अपने भाषण में कहे रहे हैं कि उन्हे सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं के वोट चाहिये ..और बीजेपी भी यही चाहती आई है और चाह रही है कि हिन्दु वोट एक हो जायेगे ... और उसे अगर सिर्फ हिन्दुओं के वोट मिलते है तो उसे किसी की ज़रूरत नही किसी गठबंधन की भी नहीं...
हमे जो जानकारी मिली वो ये है हर प्रेदश मे बीजेपी कार्यकर्ता अब वरूण गांधी की मांग कर रहा है ऐसे में मज़बूत नेता और निर्णायक सरकार का दावा पेश करने वाली पार्टी के लिये वरूण वो चांद है जो उनकी अंधेरी रात में सहारा बन कर उभरे हैं....भारत मे एक नया गांधी नये विचार के साथ कि कोई तुम पर हाथ उठाये तो उसके हाथ काट दो ..जय श्री राम...

Wednesday, March 18, 2009

जल्द वापसी होगी...

जल्द वापसी होगी...
अभी दफ्तर से छुट्टी ले ली है ..कहीं घूमना ,रिशतेदारी निभाना, आराम.सोना ,,इस लिये लिखना थोडे दिनो के लिये रोक रखा है ..चुनाव में भी व्यस्त है नये कार्यक्रम की योजनाये है ..पर आप के लिये कुछ ढूढ कर लाये हैं....

नसीबों में लिखी जिनके लिये तनहांइयां होगीं।
गुलाबो के नगर में ऐसी भी कुछ तितलियां होगी।।
मेरा टूटा हुआ दिल भी वहीं मिल जायेगा तुमको ।
जहां बिखरी हुई फूलों की टूटी पत्तियां होगीं।।
मेरे दिल में उतर आओ तो मोती ले के जाओगे ।
समन्दर के किनारे खाली सीपियां होगी।.
किसी आवाज़ पर ठेहरे तो हो जाओगे पत्थर के ।
कि इस जंगल के चारों ओर जादूगरनियां होगी ।।
यहां तक जिन्दगी के रास्ते विरान थे लेकिन।
अब इसके बाद सुनते हैं कि कुछ आबादियां होगीं ।.
बिखरते टूटते रिश्तों की इक लम्बी कहानी है ।
किसी को क्यों कोई इल्ज़ाम दे ..मजबूरियां होगीं..।।
यहां किससे तव्वको किजिये शीरी बयानी की ।
सभी के दामनो में नीम की कुछ पत्तिया होगीं ।।
हमारा दिल तो जलकर राख कब का हो चुका शान ।
मगर इस राख में अब भी कई चिनगारियां होगी ।।

....................... जल्द मुलाकात होगी........