Tuesday, April 7, 2009

जूता नम्बर 8- जनरैल सिंह अंदर की बात

जूता नम्बर 8- जनरैल सिंह अंदर की बात

दिन 7 अप्रैल 09 करीव सवा बारह बजे थे। गृहमंत्री की प्रेस कॉन्फेंस चल रही थी कि अचानक एक पत्रकार बोला देखो पी.चिदंबरम पर किसी ने कुछ फेंका । सब ने कहा मज़ाक कर रहे हो फिर सब ने ध्यान से देखा, प्रेस कॉन्फ्रेंस रूकी तो राज़ सब के सामने खुला ..

सामने आया 8 नम्बर का जूता- और पहने वाला था जनरैल सिंह । जनरैल सिंह को पत्रकार ज्यादातर जानते थे और अखबार दैनिक जागरण से भी परिचित थे।
अब बातों से बात निकली पहले तो ब्रेकिंग न्यूज़ में सब व्यस्त रहे सब ने कहा जनरैल सिंह... काग्रेस की.. प्रेस में, वो भी पी चिदबरम की...अब तो ये लम्बा गये..पर कुछ ही देर में जनरैल रिहा हो गये..और पकडे जाने के बाद यानि पुलिस स्टेशन जाने से पहले वो एक टीवी चैनल को फोनो भी दे देते हैं । जिसमें वो सफाई देते हैं उनका तरीका ग़लत हो सकता है पर मुद्दा सही था ।उनके छूटते ही न्यूज़ खत्म हो चुकी थी और अंदर की बात खुलनी शुरू हुई

सब से पहले जनरैल सिंह तो कांग्रेस कवर ही नही करते ...फिर वहा क्यो गये वो डिफेंस देखते हैं ।

दूसरा एनआई के दो कैमरा वहां क्यो मौजूद थे केवल एनआई का कैमरा उनका क्लोस शॉट क्यों ले रहा था ।

जनरैल ने पहले से जूता उतरा हुआ था वो सब से आगे बैठे हुये थे उन्होने जूता गृहमंत्री की दूसरी तरफ फेका।यानि उनको मारना उनकी मंशा नही थी अगर मारना चाहते तो एक दम सामने थे मार सकते थे ।

जनरैल कह रहे हैं उन्होने विरोध जताया 84 के दंगो का पी चिदबरम की टाइटलर की खुशी के कारण..अब सवाल ये है कि इसके लिये उन्होने दैनिक जागरण का मंच क्यों चुना ।

उनका कहना वो कांग्रेस के विरोधी नही और ये ज्यादतर पत्रकार जानते हैं वो दिल्ली की मुख्यमंत्री के काफी करीब हैं और मुख्यमंत्री टाइटलर की विरोधी है ये बात जग ज़ाहीर है ।और जगदीश टाइटलर का पत्ता साफ होने वाला है

तो कही ये है कांग्रेस के लिये कांग्रेस के ही द्वारा फेंका हुआ जूता तो नहीं है ।
क्यों नही केस दर्ज कराया क्या काग्रेस और हमारा गृह मंत्री इतनी हल्ली चीज़ है क्या और जूता इतना कमज़ोर हथियार जिससे चोट नहीं पहुच सकती है ।केवल बात को न बढ़ावा देना ही कारण हो सकता है या कुछ और ..
जनरैल हीरो तो बन ही गये पर ।शायद चुनाव का मौहल था इस लिये बात ठंडी पड गई ।लेकिन ये बात तय है चुनाव के बाद जनरैल और उनके कारण दूसरे पत्रकारों को उनकी औकात पता चल ही जायेगी । क्या खेल है वो भी साफ हो जायेगा।।।

3 comments:

परमजीत बाली said...

विचारणीय पोस्ट है।

Ratan Singh Shekhawat said...

इनकी इस घटिया हरकत के बाद पत्रकारों को जुते उतार कर ही कवरेज़ के लिए जाने देना चाहिए | आपकी पोस्ट पढने के बाद लगता है ये सब पहले से प्रायोजित था और जरनैल सिंह के साथी वे कैमरामेन भी इस खेल में शामिल थे |

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बात तो दमदार है।