Wednesday, May 27, 2009

AWACS की पहली तस्वीरें

अवाक्स भारत में

पहली तस्वीरे


जामनगर में रखा जाएगा






ऐवक्स भारत की ज़मीन पर ..ऐवक्स यानि एयरबॉर्न वारनिंग एण्ड कंट्रोल सिस्टम..ये राडार है आसान भाषा में कहे तो एक प्रकार का सैटालाइट है जो लड़ाकू जहाज़ के ऊपर लगाया जायेगा जिसे दुशमन की हरकत पर नज़र रखी जा सके ।मिग-29 और जुगार की निगरानी में इसे गुजरात के जामनगर पहुचा दिया गया है ..इसराईल से खरीदा गया ऐवक्स भारतीय वायुसेना की ताकत में इज़ाफा करेगा.. ये हर मौसम में कारगर साबित होगा ..2010 तक दो और ऐवक्स भारत खरीदेगा...


Tuesday, May 26, 2009

मैं ब्लाग बेचना चाहता हूं

मैं ब्लाग बेचना चाहता हूं

बाबूजी मैं ब्लाग बेचना चाहता हूं.
बड़े अरमान से मैने अपना ब्लाग बनाया था..
ज़िन्दगी से जुडा काला रंग इसमे सजोया था
थका हुआ था मैं हारा हुआ था मैं...
ब्लाग मेरा सहारा बन कर आया था।
इसने मुझसे वादा किया था
जो तुम चाहते
जो तु्म्हे पसंद है
सब लाकर दूगां..
जो ग़म है उसको कम करने के लिए साथी भी ढ़ूढ़ दूगां
अरे बहुत अच्छी चीज़ है
यहां के लोग बहुत भले हैं
एक से पूछो सौ बताते हैं
हर दुख दर्द मिल कर दूर भगाते हैं
अच्छे को सरहाते हैं
बुरे को समझाते हैं
कोई अकेला नहीं रहे पाता
ये अपने को परिवार बताते हैं
मै इसकी बातों मैं आ गया..
देखो गरीब का बच्चा कैसे बर्बाद हुआ..
बाबूजी नौकरी में मन की बात दबी रहती थी
घर में घरवाली काटने को दौड़ती थी ..
कुछ पल निकाल के अपने लिये
कुछ अपने पुराने दोस्तों के लिए
मैने ब्लाग लिखना शुरू कर दिया..
पर बाबूजी ये सब झूठ और फरेब निकला
ये भी दूसरी दुनिया कि तरह ही निकला
हर एक दूसरे की बुराई करता है
उसके ब्लाग में क्या होता है ये बताता है ।
जिसका सिक्का चलता है
जो बहार कि दुनिया में जाना जाता है
वो ही यहां पर भी राज करता है
हम तो दिल की बात लिखने आये थे
सो तो लिख दी.....जी
एक दिन हमने भी हिम्मत कर के सच लिखना शुरू कर डाला
फिर क्या था इस दुनिया ने भी हमको बुरा भला कहे डाला ..
अब तो हिम्मत टूटने लगी है..
बाबूजी खरीद लो ब्लाग,
एक ,दो, तीन ,आने में ही ले लो
पैसे न हो तो कल दे देना
पर कल ज़रूर आना
अगर तुम कल न आए
फिर कोई लाला बुरा मान जाएगा
क्योकि मैं फिर कल वक्त पर कुछ लिख दूगां..
हां वो भी सच ही होगा...बाबूजी...।।

Monday, May 25, 2009

धर्म क्यों जलाता है..

धर्म क्यों जलाता है..

विएयना में घटना हुई...दलित के गुरू को उच्च जाति के लोगों ने मार दिया ।खबर फैली, हिन्दुस्तान पंहुच,.फिर पहुच गई पंजाब..और एक बार फिर जला पंजाब का कस्बा कस्बा...
गुरू की मौत से उनके समर्थक भड़क गए..इतने रोश में आए कि गुरू का पढाया सारा पाठ भूल गए.. शांति का पाठ जिसने उम्र भर पढ़ाया उसी की मौत में खूनी हवा चल पड़ी।
कुछ सवाल मन को कुरेद रहे है ..अपने भारत की ज़मीन पर मैने न जाने कितनी बार धर्म के नाम पर खून की नदी बहती देखी है.
मेरा भारत जब भी तरक्की के कुछ कदम चलने की कोशिश करता है ,थोड़ा संभलता है ..अपने देश के असली गरीब और दलित को संभालने की कोशिश करता है ..तभी न जाने कहां से धर्म की आग उड़ती हुई उसकी छाती को जलाने लगती है और मेरा देश रूक जाता है सहम जाता है..खौफ के साये में फिर जीने लगता है ...और दुनिया की दौड़ में पीछे छूट जाता है ।
न जाने क्यों इस देश में रहने वालों को गुरू और पीरों की ज़रूरत पडती है..जब भगवान और अल्लाह कहता है कि ऐ बंदों मुझसे मांगो मुझसे कहो ..फिर ये गुरू कहा से आ जाते है .जो भगवान के बराबर का दर्जा पा जाते ..मेरे देश के मासूम लोग उनके कहने पर अपनों का ही खून बहाने लगते हैं...
पंजाब में देश के सब से ज्यादा दलित रहते हैं ..जिनको इसी देश के लोगों ने आगे बढ़ने नहीं दिया..और जब ये पिस रहे थे तभी इनसे किसी ने प्यार के शब्द बोले .कुछ हमदर्दी दिखाई.हिम्मत बढ़ाई.. और ये मज़लुम लोगों ने उन्हे ही अपना गुरू मान लिया और गुरू ने भी अपने आपको भगवान मान लिया...पर आपने जो माना वो आपका अपना मसला है मेरे देश ने तो सबको स्वीकार किया ..आपको भी आपके गुरू को भी जिन्होने आपके साथ बुरा किया उसको सज़ा भी दिलाई....फिर क्यों इस देश में रहे कर उसी का ही बुरा कर रहे हो ...अपनी ज़ाती दुश्मनी के मारे क्यों उसकी संपत्ति बरबाद कर रहे हो ...
जहा कुछ हुआ सरकारी संपत्ति को नष्ट करने सब निकल पड़ते है ..ट्रेन, बस, दुकानों ,दफतरों में आग लगाने का काम शुरू हो जाता है ..क्या इन जलाने वालों को पता ये ऐसा क्यों कर रहे हैं..अरे ये एक आम आदमी की चीज़े हैं...उसके अरमान है ..उसकी उम्मीदे है..ये उन लोगों की प्रापर्टी है जो इस देश को प्यार करते हैं उसको आगे ले जाने के हर प्रयास करते हैं । इसको बर्बाद करने का आपको कोई अधिकार नहीं है ।
अब शायद वक्त आ गया है कि हमारे देश में सख्त कानून होना चाहिए जो भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुचाए उसे सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए..आप अगर उग्र हुए..तो जवाब भी वैसे ही मिले गा..ये वोट बैंक, गुरू ,धर्म की राजनीति खत्म करनी चाहिये.. जी अगर धर्म और जाति के नाम पर ये आग का खेल बंद नही होगा तो याद रखिए आज आप जला रहे हैं कल कोई आपको जलाए..गुरू तो चले गये उनकी आत्मा की शांति घर बैठ कर मनाए...और विरोध करने के और भी कई तरीके हैं उसे अपनाए..क्या ये धर्म जलाता है ..इस पर विचार करें....

Sunday, May 24, 2009

RKB SHOW

RKB SHOW

काफी दिनों से टीवी में वो ही घिसे पिटे चेहरे शब्दों की कमी..विष्य का ज्ञान नहीं क्या बोलना है कितना बोलना है और किस से क्या कहना और उससे क्या कहलाना है कुछ पता नहीं पर अपने जुगाड़ से सबकी टीवी में आने की तमन्ना पूरी हो रही है।
पर एक दिन अपने कमरे में बैठा कुछ लिख रहा था तभी अचानक जानी पहचानी एक अच्छी आवाज़ और उमंदा शब्द कानो में गए...रुक नहीं पाया तुरंत टीवी के पास पहुच गया ..देखा तो राजीव कुवंर बजाज लेमन टीवी में मौजूद थे ..अपने पुराने शो आरकेबी लेकर ..जब आरकेबी सहारा समय एनसीआर में आता था उस दौर में चैनल की रेटींग अच्छी रहती थी खैर अच्छा शो रेटिंग नही कंटेंट से जाना जाता और इसमें कोई दो राय नही की राजीव के पास इसकी कोई कमी नहीं..
नए लोग जो पत्रकारिता में आना चाहते हैं और ख़ासकर वो जो कैमरे के सामने अपने को देखना चाहते हैं उन लोगो को ये शो ज़रूर देखना चाहिए..खबरों की समझ और सबसे बड़ी बात ख़बर है क्या इसकी समझ जो आपको इस शो में मिले गी..
राजीव का लुक टीवी के लिये है ये कहना ग़लत नही होगा लुक के साथ टीवी में आपका अंदाज़ बहुत मायने रखता है ..इसमे बजाज को पूरे नम्बर मिलते हैं..
फिर जिस तरह वो खबर को उठाते हैं और एक मुकाम तक ले जाते है वो काबिले तारीफ है..टीवी में जब कोई खबरिया चैनल लगाता है तो खबर और पूरी खबर को जानना चाहता है ...जो आजकल उसे कोई चैनल परोस नही पा रहा ..राजीव शो को अच्छी तरह कैरी करते हैं...
पर प्रोडक्शन की तरफ शो में काफी कमी थी ..जो शायद वक्त के साथ सुधार ले ..नहीं तो जुड़ने वाले दर्शक नही जुड पाएगें.. हम दुआ करते है कि उबाऊ खबरों को खत्म करके टीवी में एक क्राति लाने के लिए कैसी खबरे लाई जाए और उन्हे कैसे पेश किया जाये इसके लिए आरकेबी शो आने वाले दिनों में ज़रूर माइल स्टोन बनेगा....हम राजीव और उनकी टीम को बधाई देते हैं...

Friday, May 22, 2009

बोल तेरे लब आज़ाद हैं...

कमज़ोर आदमी की जीत
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने आज प्रधानंमंत्री पद की शपथ ले ली ..और दुनिया ने कहा सब से कमज़ोर कहे जाने वाले आदमी की जीत हो गई।.आज हम बहस मनमोहन सिंह की नीतियों और उन पर नहीं करेगे आज हम जो बात करेगे वो ये कि क्या सच में कभी कमज़ोर आदमी की जीत हो सकती है .... इस के लिये पहले मनमोहन और उनकी जीत पर ज़रा नज़र डालते औऱ पीछे चलते 2004 में जब न जाने कहां से एक ताकतवर शक्तिशाली महिला एक शख्स को लेकर आती है और कहती है आज से ये हमारे मुल्क की बागडोर संभाले गे ..और करोड़ो की तदाद मे रहने वाले लोगों ने सिर झुका कर कहा हां..आज से हम इनके सहारे ही जीयेगें...
कहने का मतलब ये कि कमज़ोर आदमी तभी आगे चल सकता है जब उसको किसी ताकतवर आदमी का साथ हो और उसके पीछे हाथ हो...
प्रधानमंत्री के जैसी किसी कि किस्सत शायद ही हो ..बॉलीबुड में ज़रूर ऐसी कहानी कई बार लिखी गई जब किसी मज़लूम को कोई शहंशाह मिल जाता है ...
हां कॉलेज में एक कमज़ोर लड़के को पीटने के बाद जब वो अपने भाई को दोबारा लेकर आता है तो उसका भाई कहता है .. मार.. इसके मुंह पर थप्पड़ मार वो कमज़ोर लड़का जो पहले जिनसे पिटा था उन्ही लड़को को मारने लगता है..किसी कमज़ोर के ज़मीर को जगाने के लिये भी.उसे किसी ताकतवर का सहारा चाहिये होता .मतलब ये कि कमज़ोर आदमी को हमेशा बेसाखी चाहिये होती है...
यही हाल नौकरी और दूसरे पेशों का है आप अपने विचार भी नहीं प्रकट कर सकते क्योकि आप के पास कोई शक्तिशाली आदमी का साथ नही है ..इसलिये यहां कमज़ोर आदमी की हार हो जाती है ..और याद रखिये पत्रकारिता में कभी भी कमज़ोर कलम नही चलता कुछ देर के लिये उसकी चमक भले ही आपको प्रभावित करे लेकिन बाद में उसकी सियाही फिकी हो ही जायेगी.... अगर आप कमज़ोर है आपका कोई मा बाप नही तो आपकी हार निश्चित है ..कुछ कदम भले आप अपनी हिम्मत से चल ले लेकिन अंत में आपको हरा ही दिया जाएगा...क्योकि कमज़ोर आदमी की कभी जीत नहीं हुई है और न होगी ..और लोग खामोशी को भी कमज़ोरी समझते है..इसलिये ऐ दोस्तों अब बदलने का वक्त आ गया आवाज़ बुलंद करने वक्त आ गया ..किस का डर और काहे का डर जिसने पेट दिया है वो ही परवरदिगार पेट भरेगा ..जो मन में है दिल खोल कर कहो .वक्त है आज नही कहो गे तो कल कभी नही मिलेगा कुछ कहने को....और जब तुम कहना सिखोगे .तभी कुछ करना ..और जब तुम कुछ करोगे तो तुम खुद सक्षम होगे .. और सक्षम आदमी कमज़ोर नही होता .. और तभी वो जीतता ..मनमोहनसिंह ने जब आडवाणी को जवाब देना शुरू किया अपने ऊपर लेगे कमज़ोरी के दाग को मिटाना शुरू किया बीच महफिल में आडवाणी को नज़रअंदाज़ कर दिया एक मज़बूत नेता को मुह की खिलाई....और फिर बोले खुल के बोले ..नतीजा एक कमज़ोर आदमी जीत गया .......

Tuesday, May 19, 2009

टीवी चैनलों से इतनी बड़ी गलती ..

टीवी चैनलों से इतनी बड़ी गलती ..

कानून के हिदायत आने के बाद भी टीवी चैनलों पर इसका कोई असर नहीं हुआ ।सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ गया कि आप कोई ऐसी तस्वीर या फूटेज नहीं दिखायेगे जिससे लोगों में भय हो..खौफ पैदा हो..लेकिन आज जब से प्रभाकरण की तस्वीर श्रीलंका सरकार ने जैसे पेश की वैसे ही हिन्दुस्तान के टीवी चैनल ने दिखा दी ..।टीवी में एक इफैक्ट होता है बिलर जिससे तस्वीर को धुंधला कर दिया जाता है ..और ऐसी तस्वीरों पर इस्तमाल करने के लिये होता । पर हमारे चैनल अपनी तेज़ी सच्ची तस्वीर,संजीदगी,सबसे पहले,24x7..और भी तरह तरह के वादे करने वाले भूल गये सारी हदें..साफ-साफ उसकी लाश को दिखाया जाता रहा पूरे दिन। किसी ने उसकी खुली हुई आंखें कितनी खतरनाक लग रही थी उसकी खोपड़ी में छेद कितना डरावना दिख रहा था इसपर ध्यान ही नहीं दिया और ये टीआरपी के चक्कर मे सब भूल गये...
शयाद हमारे चैनल ज्यादतर हिन्दी भाषा के लोगो देखते हैं ..और दक्षिण भारत को हमारे चैनल से कोई टीआरपी नहीं आती ..इसलिये उनसे जूडे हुये लोगों को हम दिखा सकते हैं..क्या टीवी चैनल को इसका एहसास होगा ।या जो एजेंसी इसपर नज़र रखेगी वो चैनलों को नोटिस भेजी गी..पता नही चुनाव की साफ साफ तस्वीर दिखाते दिखाते हम को क्या दिखाना है और कैसे दिखाना चाहिये सब बराबर कर दिया। दूसरों को नसीयत देने वालों को नसीयत की ज्यादा ज़रूरत है ।।

कुछ ख़ास लोगों के कहने पर ......

कुछ ख़ास लोगों के कहने पर ......

हज़रत अब्बास की शान में....
( हज़रत अब्बास इमाम हुसैन के भाई थे जो करबाला में उनके साथ शहीद हुये थे .
अब्बास को वफादारी की मिसाल माना जाता है जब वफा का ज़िक्र होता है .उनका नाम आता है ..)

गाज़ी तेरी मिसाल नहीं दो जहां में
जहरा ने खुद कसीदे पढ़े तेरी शान में
पानी तेरी सबील का कैसे पीये गा वो
बुगज़े अली के कांटे हैं जिसकी जुबान में

अब्बास फातमा की तमन्ना का नाम है
अब्बास का जहां मे निराला मुकाम है
बारह इमाम मज़हबे इस्लाम में हुये
ये मज़हबे वफा का अकेला इमाम है

नामे गाज़ी से खुशबू-ए वफा आती है
उनके रौज़े से हुसैना की सदा आती है
जब भी हम बैठे हैं अब्बास के परचम के तले
ऐसा लगा है जन्नत से हवा आती है।.

पार कर पाया न लशकर एक हल्की सी लकीर
थीं तो हल्की मगर खीची हुई अब्बास की....

Sunday, May 17, 2009

ब्लाग वक्त है ने पेश की एकदम सही तस्वीर...

ब्लाग वक्त है ने पेश की एकदम सही तस्वीर...
जी हां 2009 के चुनाव पर हमने जो लिखा वो सच हुआ । हमने हर एक पार्टी पर पैनी नज़र ऱखी ..हर राजनेता किस मुकाम तक पहुचेगा..आप लोगों को वक्त से पहले बताया ।कई वरिष्ठ पत्रकारों के ब्लाग होने के बावजूद किस प्रकार की सरकार इस 15वीं लोकसभा में होने वाली है ..कोई भी पत्रकार अपने ब्लाग पर नहीं लिख पाया ..पर वक्त है ने आपको को सारे और सही समीकरण वक्त पर पेश किये ।
हमने इसका विरोध भी सहा लोगों की प्रतिक्रिया हमारे खिलाफ भी थी लेकिन हमारा मकसद सही तस्वीर पेश करना था जो हमने किया ..
· हम ही थे जिसने कहा था देश में राज गांधी ही करेगा..।
· हम ही थे जिसने कहा था आडवाणी बाय बाय..।
· हम ही थे जिसेने कहा था डरे होये मोदी ...।
· हम ही थे जिसने कहा था आज़म खान की छुट्टी...।
· हम ही थे जिसने कहा था जया के आसू रंग लायेगे..।
· हम ही थे जिसने कहा था अब बदलेगी तस्वीर..।
· हम ही थे जिसने कहा था ब्लू फिल्म वाले समाजवाद को मतदाता नाकारे गें..।
ये इसलिये हुआ की वक्त है को समझ है वक्त की और कदर है वक्त की ...शुक्रिया आप लोगों का,जिसने वक्त है को हमेशा पढा.. कहते है ब्लाग में पाठक कम हो रहे हैं पर शुक्र है आप लोगो का, की हमें इसका सामना नहीं करा पड़ा । आगे भी आपका प्रेम हमें इसी तरह मिलता रहेगा और हम वक्त पर समाज का आइना दिखाते रहेगें ।।
धन्यवाद...

Monday, May 11, 2009

जयाप्रदा की नंगी तस्वीर ..

जयाप्रदा की नंगी तस्वीर ..

अब तो हद हो गई ..नया समाजवाद और नई समाजवादी पार्टी... पिछले कुछ वक्त से रामपुर में अमर आज़म और मुलायम की शब्दों की जंग चल रही थी ... मुलायम बीच बचाव करते दिख रहे थे ...
दोनो के कई बयान आये..आज़म खान ने अमरसिंह को दलाल कहा फिर कुछ दिन के बाद जयाप्रदा का दलाल कहा...
जया की आंखों में आसू आये और अमर ने कहा वो किसी आज़म खान को नहीं जानते ..चुनाव की तारीख़ पास आती गई और लड़ाई आगे बढ़ती गई ...
बोलचाल की बोली ..गंदे शब्दों पर पहुच गई ..हर आदमी एक दूसरे पर किचड़ उछालने लगा..
मुबंई से अबू आज़मी आये उन पर भी हमला हो गया..बाण पर बाण .हर बार.समाजवाद तार –तार हो रहा था ..रामपुर जो सभ्यता का गढ़ कहा जाता है वहां की इज़्जत हर तऱफ उछल रही थी ..
आखिर में मुलायम ने आज़म को नोटिस दे दिया –13 के बाद फैसला होगा .. आज़म भी खुल कर बोले अपने सारे समर्थकों से की नूरबानो कांग्रेस की उम्मीदवार को वोट दे...
अमर ने भी आखिरी तीर फेंका कहा अगर जया नहीं जीतेगी तो खुदकुशी कर लेगीं...
फिर बारी थी जयाप्रदा की ..कहतें है हर एकशन फिल्म में सेक्स न हो तो मज़ा नहीं आता फिल्म अधूरी सी लगती है ..इसलिये जया अपनी फिल्म को पूरी तरह कामयाब करना चाहती थी ..
रामपुर की सरज़मीन को गवाह बनाते हुये उन्होने आचारसंहिता के दिये वक्त के अंदर अपने आखिरी संवाद बोले... कहा मेरी अशलील तस्वीरें बांटी जा रही है गंदी फिल्म दिखाई जा रही है..
और आप यकीन किजिये इस बयान के एक घण्टे के बाद सारी मीडिया के पास जया प्रदा की वो तस्वीरे थी ..
अब ये तस्वीरे कौन बांट रहा है ये सीडी कौन बनवा रहा है ..अमरसिंह के अलावा औरतों और सीड़ी से किस को प्यार है कौन इतना हाईटेक समाजवादी है ..कौन है जिसने आम आदमी के समाजवाद को सितारों और पैसों का समाजवाद बना दिया है जो हर घटना के बाद एक सीडी पेश कर देता है .चाहे संजयदत्त द्वारा भारद्वाज की हो या फिर नोट लेन देन की ..और फिर जया खुद जिस्म की नुमाइश के लिये तैयार हों तो किसे क्या हर्ज होगा...
लोहिया का समाजवाद आज ब्लूफिल्म का समाजवाद हो गया वहा रे मुलायम अब तो आंखें खुलों..

Sunday, May 10, 2009

क्यो रोती हैं ..बार बार जयाप्रदा

क्यो रोती हैं ..बार बार जयाप्रदा
कैमरे पर क्या करना है इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाये उसे कैसे अपना बनाया जाये ...ये अगर किसी को सीखना है तो वो जयाप्रदा से सीखे ...
एक बार आज़म ख़ान ने मंच पर बयान दिया कि किसी खूबसूरत चेहरे पर न जाये ..जो करना है सोच समझ कर करें... उस वक्त जयाप्रदा आंखे मलती देखी गईं.. आंखें जब आप मलते हैं तो पानी निकलना लाज़मी हैं.. ऐसा ही उनके साथ हुआ...पर हम चैनल वालों को तो मासला चाहिये..पुरानी खबर में नया एंगिल ..पुरानी तस्वीरों पर नई कहानी ..एडलाइन बन गई..आज़म की बात से जया आहत.. आंसू बहे जया के..
बस फिर क्या था ..औरतों के प्रेमी अमर सिंह कूद आये मैदान में आर-पार की लड़ाई के लिये..
पर जया जी ने भी इसका फायदा ढ़ू़ढ निकाला ..उनको भी रामपुर के नवाबों के खिलाफ ..उनको शर्मींदा करने का मुद्दा मिल गया..बस अब जहां आज़मखान का ज़िक्र हुआ नहीं जयाप्रदा कि आंखें नम होगीं..
पत्रकार औऱ कैमरामेन को भी पता चल गया ..रिपोर्टर ने जहां आज़म खान का ज़िक्र किया वहीं कैमरा मैन ने अपना फोक्स जया प्रदा की आंखों पर कर दिया ...भले ही इस सवाल से पहले जया धूप का चशमा लगायें हो पर ..ये सवाल पूछते ही वो अपना चशमा उतार देती और आंसूं .या पानी ले आती .. बस पत्रकार का आना भी सफल और जया का मिशन भी सफल..
जब उनके रोने की बात एक पत्रकार ने आज़म खान को बताई..तो उन्होने उस का जवाब इस तरह से दिया भई वो अभिनेत्री हैं ..उन्हे पता है किस वक्त कौन सा रीएक्शन देना है..वो तो एक वक्त में कई भाव दे सकती हैं..
पहले ये बात अजीब सी लगी पर जब हर चैनल में हर पत्रकार को जवाब देते जया इसी मुद्रा में दिखी तो लगा की बात में दम है..बार बार तो इंसान अपने सगे के मरने पर भी नहीं रोता ..जया जी कुछ तो नया करों..जीतो या हारों अपने इमान में तो सच्ची रखो..अभिनय ही करना है तो फिल्मों में वापस चली जाऊ..आपके लिये तो साउथ के भी दरवाज़े खुले हैं.. क्यों गरीब जनता को अपने आंसूओं में डूबा रही हो

Friday, May 8, 2009

चुनाव के बाद आज़म ख़ान की छुट्टी.. मुलायम किस ओर...?

चुनाव के बाद आज़म ख़ान की छुट्टी.. मुलायम एनडीए के साथ...?

पिछले कुछ वक्त से आज़म और अमर का झगड़ा बढ़ता जा रहा है ..। हर प्रयास के बाद मुलायसिंह को असफलता मिल रही है.. पर 13 तारीख के बाद इसका रूझान मिलेगा और 16 के बाद नतीजा निकल आयेगा...
अब तक जो राजनीति गलयारों में खबर फैल रही है वो ये है कि आज़म खान की छुट्टी होनी तय है.. इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है वो ये
1) आज़म खान समाजवादी पार्टी में एक मुस्लिम चेहरे के रूप में प्रस्तुत किये जाते है ...उनका इस्तमाल मुस्लिम वोट बटोरने के काम आता है ..पर इस बार ऐसा नहीं हुआ मुलायम ने ऐढी चोटी का ज़ोर लगा दिया..पर आज़म असली पठान निकले ..अड़ गये तो अड़ गये..
2) ऐसा नहीं की मुलायम ने उनका विकल्प नहीं ढूढ़ा.. मुलायम ने हर ठुचपुंजीया मुस्लिम नेता से संर्पक किया..इसका फायदा भी उनके कार्यकर्ताओं ने खूब उठाया.. उनके कुछ करीबी लोग, किसी भी दाढ़ी वाले को मुलायमसिंह के पास ले जाते औऱ कहते नेता जी ये वहां के है और इनके पास इतने वोट हैं ।नेता जी उनको झुक कर नमस्ते करते और एक से पाच लाख तक का चेक काट कर दे देते.
3) नेता जी के नोट भी गये और वोट भी ।कल्याण सिंह से दोस्ती के बाद मुल्ला मुलायम का तंबका भी छीन गया । क्योकि हिन्दुस्तान का मुस्लमान सब माफ कर सकता है पर बाबरी मस्जिद को शहीद करने वालों को कभी नही।अगर कल्याण को ही भूलना है तो आडवाणी को बक्शने में उसे क्या परहेज़...
4) कल्याण को लाने का मकसद था की मायावती के पिछड़े वोट बैंक में सेंध लगाना पर रामपुर से बगावत के चलते नया वोट तो अपना हो नहीं सका हां पुराना वोट ज़रूर रूठ गया ...जिसका श्रय सीधे तौर पर आज़म खान को जाता है ।
5) आज़म खान से पत्रकार ने पूछा आपकी बगावत रामपुर में समाजवादी को नुकसान पहुचाये गी ..इस पर आज़म खान ने कहा आप मेरा कद छोटा कर रहे हैं... मैं पूरे उतर प्रदेश में नुकसान पहुचाऊगां...और ये बात मुलायम भी समझ गए हैं ..और उनके अनुमान से काफी कम इस बार उन्हे सीटे मिल रही है...
6) जिन मुस्लमान के मारे सारा संघर्ष किया जब वो ही उनके साथ नहीं रहे ..जैसे काग्रेस के साथ हुआ वैसा अब उनके साथ होने वाला है ..तो फिर मुल्ला मुलायम की छवी साथ रख कर और आज़म ख़ान जैसों को पालने का क्या फायदा ...
7) इसलिये अमरसिह ने आखरी पासा फेंक दिया .कहा 13 के बाद फैसला होगा ..अमरसिंह बोले है तो फैसला ज़रूर होगा ,,साथ ही मुलायम को धमकी भी दे डाली की कुछ करें ,,मुलायम का भी जवाब आगया ..की फैसला ज़रूर होगा ..
8) सब जानते है कि लाल लगोट वाले मुलायम की न अब लगोंट टाइट रही और न अब इतना दम बचा की सीडी मास्टर अमर सिंह के खिलाफ कोई फैसला ले सके..।इसलिये आज़मखान की छुट्टी तय है ...
9) दूसरी बात मुलायम का बयांन आया जो सरकार मायावती की सरकार को बर्खास्त कर दे उसको वो समर्थन देगें..भले आडवाणी ने इसका विरोध किया पर चुनाव के बाद हरफंनमौला अमर सिंह किसी के भी बयां बदलवाने में माहिर है.
10) जब चुनाव में मुसलमान वोट ही नही मिला तो अगर नेताजी को एनडीए से फायदा मिले तो हर्ज ही क्या ...
इसलिये एक बात तो तय है रामपुर में जया प्रदा ही रहेगी समाजवादी की पंसद आज़मखान रूठे तो रूठते रहें..उनको कर दिया जायेगा गुडबाय ..और नये साथी की होगी तलाश ..क्योकि चन्द्रबाबू और जया का जो रिशता था वो जग ज़ाहीर है .और चन्द्रबाबू और एनडीए का रिशता भी सब को पता है ..तो एक पुराने रिश्ते के सहारे नये रिशते की शुरूआत हो सकती .. पंडित अमरसिंह कोई भी गोटी बिठा सकते हैं... ।।

Tuesday, May 5, 2009

प्रेम पत्र

प्रेम पत्र
आपने आखिरी बार बार पत्र कब लिखा था क्या कभी प्रेम पत्र लिखा था ... अगर हां तो आईये याद ताज़ा करें...

प्रिय ,
वक्त कैसे बीत रहा हैं ..क्या बताऊं ..हर तरफ हर जगह तुम्ही दिख रहे हो .. तुम्हारी मुस्कुराहट.. तुम्हारी आहट बन कर सताती है ..तुम्हारी नज़रे .कोई ग़मज़ादा नज्म याद दिलाती है . तुम्हारा रंग रोशनी बन कर, हर बार आखों को चकाचौंध कर देती है.....सुबह उठें तो तुम.. दोपहर में देखें तो तुम ..शाम में तुम . और रात को भी तुम्ही तुम.. कैसे कट रहा है एक एक पल..तुम्हारे बिन.. पर तुम्हे क्या मालुम ..अगर पता भी हो तो तुम क्या कर सकते हो ... और हमने कुछ चाहा भी नहीं...तुमसे..सिर्फ आरज़ू कई तुम्हारी .. बिना किसी चाहत के ..बडे दिनो के बाद कलम उठाई है .चाहा है कि अपने दिल की बात लिखूं..जो गुज़रा वो सब बयान कर दूं.. पर अब तुमसे बहुत दूरी है ..दूरी संकोच की डोरी होती है ... संकोच से मन की बात नहीं होती ...और जब मन की बात ही न हो तो प्रेम वहां कहा रहता है .. सोच था प्रेंम पत्र लिखूं ..कोई ऐसा ख़त लिखूं.. जिंसमें प्यार का इज़हार हो..एक नया संसार हो ..पर नही हां नहीं ..अब प्रेम की जगह जलन है ..एक दर्द है ....जो टीस बन कर सताता है मुझे गुज़रा वक्त याद दिलाता है .. आज नहीं कल लिखूं गा..पर मैं प्रेम पत्र ज़रूर लिखूंगा...

तुम्हारा
शान...

Friday, May 1, 2009

कुमारों का चैनल.

कुमारों का चैनल.
काफी दिनो से सोच रहा था आजकल चैनलों का स्तर इतना गिरता क्यों जा रहा है ... कुछ भी नया नहीं एक-दम नई इंडस्ट्री थी ये ..और इतनी जल्दी पतन हो गया ..मैने अपने कई लेखों में चैनल मैं हो रहे बदलाव और किस दिशा में जा रहे हैं हमारे पत्रकार ..इस विष्य पर मैने बहुत लिखा ..पर मुझे उम्मीद है इसको शायद ही किसी ने पढ़ा होगा ...क्योंकि आजकल पत्रकारिता के माई बाप का ज़िम्मा एक राज्य के कुछ बुद्दीजीवियों ने उठा लिया है ..जिन्हे खुद शब्द का ज्ञान नहीं आजकल वो शब्दावली की सरचना करते दिख रहें हैं.जिनकी बोली खुद इतनी बिगड़ी हुई आजकल वो भाषा का ज्ञान दे रहे है ..ये हैं कुमार..कोई आगे कुमार तो कोई पीछे कुमार .
इनके राज्य का हर सरकार में रेल मंत्री होता है ..हर भाई का एक भाईया होता है ..जिसके पास रेल का पास होता है ..और दिल्ली में रहने वाले एक दूसरे भाई के कमरे का पता होता है ...नौकरी तो मिल ही जायेगी ..काम तो सीख ही जायेगा ..अब तक जिन्होने ने परीक्षा पास करवाई है वो ही आगे की ज़िन्दगी भी पार करवा देगें...तो कुमार साहब दिल्ली पहुचं ही जाते हैं...
पत्रकारिता के शुरू के दौर की बात मुझे आज भी याद आती है बरेली मे एक नये रिपोर्टर की भर्ती हुईं उसने अपने दोस्त से पूछा यार मीडिया में सफल होने का क्या तरीका है ..दोस्त ने कहा अपने नाम के आगे या पीछे कुमार लिख ले सफल हो जायेगा ..उस वक्त में हंसा ..पर आप को हकीकत बताता हूं उसने ऐसा किया ..और आज वो सफल भी है ...अलबत्ता मेरे नज़र में सफलता के मापदंड अलग है ..
हां मैं बात कर रहां हूं कुमार चैनल का .और डूबते हुये गिरते हुये चैनलों के स्तर का ..देखिये टीलिविज़न एक क्रेटीव मीडियम है ..इसके लिये आपकी सोच शब्दों से पहले तस्वीरों तक पहुचनी चाहिये..और ये तब होगा जब आपके ज़हन में सिर्फ और सिर्फ टीवी हो..और आपकी कल्पना शक्ति काफी मज़बूत और आगे की ओर चलने की हो .. जो कि उस राज्य से आने वालों के पास नहीं है ..उन्हे सिर्फ राजनीति ही करनी आती है .. चाहे निर्देशक प्रकाश जझा हो या शेखर सुमन हो या फिर शत्रु सिन्हा..हां सिंगर भी राज नेता ..मनोज तिवारी...
राजनीति के कारण न ही ये अपने प्रदेश का विकास कर पाये और न ही ये कभी टेलिविज़न चैनल का कोई भला कर पायेगे वहां जो अच्छा काम रहा होगा उसे किसी दूसरे कुमार से हटवा देगें...हां अपना भला ज़रूर करेगे जैसे बाकी लोग कर रहे ..हर जगह कुमार या फिर कुमार की बिरादरी का कोई और..जो कुमार को ही लेगा और देगा ..वो चाहे ऑवर्ड हो या फिर कोइ प्रोग्राम .. यार आप खुद सोचो कैसे चल सकता है चैनल कुमारों से ....हद हो गई...

71 साल

71 साल.भाग-4
आप लोग सोच रहेगें होगे कि इतने दिनों के बाद 71 साल की कैसे आई याद .. ज़हन में कहानी पूरी है पर लिखने के लिये वक्त और शब्द तलाश कर रहा था ...बात रामनरेश के बच्चो की..
ज़िन्दगी हमारी धूमती है समाज औऱ उसके इर्द गिर्द.. और जब हम अपने दायरे से बाहर निकलते हैं तभी कहानी दूसरा मोड़ ले लेती..ये मोड़ या तो आपकी ज़िन्दगी को किसी मुकाम तक पहुचा देता हैं या फिर आपकी ज़िन्दगी मंजिल तलाशती रहती है ..ऐसे ही रामनरेश के बच्चों के साथ हुआ ।
हर चीज़ का अभाव ज़िन्दगी को भावहीन कर देते हैं और हम हर चमक की तरफ दौड पड़ते हैं जो हमे दिख रही होती है ...
जिन्दगी में रोशनी की लालसा हमें अकसर अंधेरे की तरफ ले जाती है ... और जब तक हम समझ पाते हैं, तब तक देर हो चुकी होती है ..राम नरेश को , पड़ोसी ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी एक लड़के के साथ अकसर घूमती देखी गई ..
बाप की गैरत करवट पलटती है ..और पुरूष का पौरूष बाहर आजाता है ..पहली बार हां पहली बार रामनरेश की दिवारों ने राम नरेश की शयाद इतनी भंयकर आवाज़ सुनी थी .. घर में मौजूद सब लोग थर्रा गये.. राम नरेश अपने गुस्से को ज्यादा देर तक नहीं रख पाये और फूट फूट कर रोने लगे ..रामनरेश के साथ सब रोये .मां..दोनो छोटी बेटी और बेटा .. सब को देख कर बड़ी बेटी भी रो पड़ी और बोली पापा मैने ऐसा कुछ नहीं किया ..बस कुछ वक्त उसके साथ बिताया .. रामनरेश के आंसू नहीं रोके ..रोते- रोते बोले .बेटा जानता हूं.. मेरे अंदर कमी है ..तुम्हारा जो हक है शायद मैं वो नहीं दे पा रहा.. पर रहे रहा के एक इज्ज़त है वो अगर बची रहे ..तो तुम लोगों की बड़ी महरबानी ..उस रात रामनरेश के घर में किसी के आंसू रूक नहीं रहे थे .कुछ खाना नहीं बना ..
रात को रामनरेश ने अपनी पत्नी से कहा अपने भाई से बात करो ..बड़ी बिटिया के रिशते की ...
रामनरेश और उनके परिवार का जीवन किस राह चलेगा बताउंगा अगली पोस्ट में ..तब तक अपने विचार लिखते रहिये....