Friday, May 1, 2009

कुमारों का चैनल.

कुमारों का चैनल.
काफी दिनो से सोच रहा था आजकल चैनलों का स्तर इतना गिरता क्यों जा रहा है ... कुछ भी नया नहीं एक-दम नई इंडस्ट्री थी ये ..और इतनी जल्दी पतन हो गया ..मैने अपने कई लेखों में चैनल मैं हो रहे बदलाव और किस दिशा में जा रहे हैं हमारे पत्रकार ..इस विष्य पर मैने बहुत लिखा ..पर मुझे उम्मीद है इसको शायद ही किसी ने पढ़ा होगा ...क्योंकि आजकल पत्रकारिता के माई बाप का ज़िम्मा एक राज्य के कुछ बुद्दीजीवियों ने उठा लिया है ..जिन्हे खुद शब्द का ज्ञान नहीं आजकल वो शब्दावली की सरचना करते दिख रहें हैं.जिनकी बोली खुद इतनी बिगड़ी हुई आजकल वो भाषा का ज्ञान दे रहे है ..ये हैं कुमार..कोई आगे कुमार तो कोई पीछे कुमार .
इनके राज्य का हर सरकार में रेल मंत्री होता है ..हर भाई का एक भाईया होता है ..जिसके पास रेल का पास होता है ..और दिल्ली में रहने वाले एक दूसरे भाई के कमरे का पता होता है ...नौकरी तो मिल ही जायेगी ..काम तो सीख ही जायेगा ..अब तक जिन्होने ने परीक्षा पास करवाई है वो ही आगे की ज़िन्दगी भी पार करवा देगें...तो कुमार साहब दिल्ली पहुचं ही जाते हैं...
पत्रकारिता के शुरू के दौर की बात मुझे आज भी याद आती है बरेली मे एक नये रिपोर्टर की भर्ती हुईं उसने अपने दोस्त से पूछा यार मीडिया में सफल होने का क्या तरीका है ..दोस्त ने कहा अपने नाम के आगे या पीछे कुमार लिख ले सफल हो जायेगा ..उस वक्त में हंसा ..पर आप को हकीकत बताता हूं उसने ऐसा किया ..और आज वो सफल भी है ...अलबत्ता मेरे नज़र में सफलता के मापदंड अलग है ..
हां मैं बात कर रहां हूं कुमार चैनल का .और डूबते हुये गिरते हुये चैनलों के स्तर का ..देखिये टीलिविज़न एक क्रेटीव मीडियम है ..इसके लिये आपकी सोच शब्दों से पहले तस्वीरों तक पहुचनी चाहिये..और ये तब होगा जब आपके ज़हन में सिर्फ और सिर्फ टीवी हो..और आपकी कल्पना शक्ति काफी मज़बूत और आगे की ओर चलने की हो .. जो कि उस राज्य से आने वालों के पास नहीं है ..उन्हे सिर्फ राजनीति ही करनी आती है .. चाहे निर्देशक प्रकाश जझा हो या शेखर सुमन हो या फिर शत्रु सिन्हा..हां सिंगर भी राज नेता ..मनोज तिवारी...
राजनीति के कारण न ही ये अपने प्रदेश का विकास कर पाये और न ही ये कभी टेलिविज़न चैनल का कोई भला कर पायेगे वहां जो अच्छा काम रहा होगा उसे किसी दूसरे कुमार से हटवा देगें...हां अपना भला ज़रूर करेगे जैसे बाकी लोग कर रहे ..हर जगह कुमार या फिर कुमार की बिरादरी का कोई और..जो कुमार को ही लेगा और देगा ..वो चाहे ऑवर्ड हो या फिर कोइ प्रोग्राम .. यार आप खुद सोचो कैसे चल सकता है चैनल कुमारों से ....हद हो गई...

7 comments:

आदर्श राठौर said...

काफी हद तक आपकी बात से सहमत हूं। विशेषकर राज्य वाली बात पर....

श्यामल सुमन said...

अर्थहीन टी० वी० हुआ बहुत बड़ा हेडेक।
मन करता है बेच दूँ करके इसको पैक।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

मुनीश ( munish ) said...

are yaar khul ke khelo ye blog ka jagat kumar saab ke papa ka nahin hai!

Gyanesh said...

कभी फिल्मों में कुमारों का वर्चस्व था अब टीवी पर इन्होने कोहराम मचा दिया है. मोटी तनख्वाह पातें हैं और सत्ता की दलाली करते है. ख़बरों की कब्र खोद चुके हैं.

PD said...

aapka ye lekh padhna shuru kiya to Media vale topic se aur khatm kiya pradesh vale topic se.. mujhe samajh me nahi aaya ki aap media ko gali de rahe the ya phir bharat ke ek pradesh ko??
ya to main confused hun ya fir aap..

prashant said...

aap sahi hain sir.... but what should i do, mera naam toh kumar se he shuru hota hai... kumar prashant.. ha ha ha jokes apart.. kumar factor maine kaafi achche se feel kiya hai jahan main pehle kaam karta tha...

nikhil nagpal said...

moka pate hi koi na koi kumar ban hi jata hai...
koi bhi ho..aap ya main,
phir ye fark kyon ?