Tuesday, May 5, 2009

प्रेम पत्र

प्रेम पत्र
आपने आखिरी बार बार पत्र कब लिखा था क्या कभी प्रेम पत्र लिखा था ... अगर हां तो आईये याद ताज़ा करें...

प्रिय ,
वक्त कैसे बीत रहा हैं ..क्या बताऊं ..हर तरफ हर जगह तुम्ही दिख रहे हो .. तुम्हारी मुस्कुराहट.. तुम्हारी आहट बन कर सताती है ..तुम्हारी नज़रे .कोई ग़मज़ादा नज्म याद दिलाती है . तुम्हारा रंग रोशनी बन कर, हर बार आखों को चकाचौंध कर देती है.....सुबह उठें तो तुम.. दोपहर में देखें तो तुम ..शाम में तुम . और रात को भी तुम्ही तुम.. कैसे कट रहा है एक एक पल..तुम्हारे बिन.. पर तुम्हे क्या मालुम ..अगर पता भी हो तो तुम क्या कर सकते हो ... और हमने कुछ चाहा भी नहीं...तुमसे..सिर्फ आरज़ू कई तुम्हारी .. बिना किसी चाहत के ..बडे दिनो के बाद कलम उठाई है .चाहा है कि अपने दिल की बात लिखूं..जो गुज़रा वो सब बयान कर दूं.. पर अब तुमसे बहुत दूरी है ..दूरी संकोच की डोरी होती है ... संकोच से मन की बात नहीं होती ...और जब मन की बात ही न हो तो प्रेम वहां कहा रहता है .. सोच था प्रेंम पत्र लिखूं ..कोई ऐसा ख़त लिखूं.. जिंसमें प्यार का इज़हार हो..एक नया संसार हो ..पर नही हां नहीं ..अब प्रेम की जगह जलन है ..एक दर्द है ....जो टीस बन कर सताता है मुझे गुज़रा वक्त याद दिलाता है .. आज नहीं कल लिखूं गा..पर मैं प्रेम पत्र ज़रूर लिखूंगा...

तुम्हारा
शान...

2 comments:

Udan Tashtari said...

सही है..लिखना जरुर!! यही प्रेम की वसीयत है जो बच रह जाती है.

nikhil nagpal said...

nafrat se bhara pyar,dard aur tadap se bhara pyar..ye shaayad pyar ka ek hissa hai..!aaj bhi aapko us saksh se pyar hai,jise aap pa na sake,jo aaj bhi aapke dil ke ek kone mein,bewajah to nahin kahoonga par haan besabr hokar, aapke us patr ka intzaar kar raha hai.