Tuesday, June 23, 2009

कहीं बुर्के पर पाबंदी कहीं जीन्स...

कहीं बुर्के पर पाबंदी कहीं जीन्स...

आज खबर आई की फ्रांस के राष्ट्रपति सरकोज़ी ने बुर्के पर पांबदी लगा दी है । सरकोज़ी का मानना है कि धर्म के नाम पर महिलाओं के बुर्का पहनने से फ्रांस में धर्मनिरपेक्षता पर असर पड़ता है और देश के लोगों पर ग़लत प्रभाव पड़ता है ।
इससे पहले फ्रांस में पगड़ी पर भी पांबदी लगाई थी ..आंतकवादियों की पोशक कहे कर ...जिसके बाद वहां के सिखों पर हमले भी हुए थे..
पश्चिम यूरोप में सबसे ज्यादा फ्रांस में ही मुस्लमान रहते है इसलिये ज़ाहिर है इसका विरोध भी काफी ज्यादा होगा...
इधर भारत में इंदोर शहर में कॉलेज और जैन मंदिर में जीन्स पर पांबदी कर दी गई..बाद में कॉलेज पर दबाव पड़ने के बाद उन्होने पाबंदी हटा ली । लेकिन जैन मंदिर की पांबन्दी लागू..। तर्क है हमारी संस्कृति पर ग़लत प्रभाव पड़ेगा...
कहने का अर्थ ये हैं की यूरोप हो या एशिया..फ्रांस हो या भारत या फिर तालिबान इंसान की सोच एक सी है...
जो संस्कृति और धर्म लिबास के पहने और उतारने से डमाडोल होता हो तो ऐसे कमज़ोर धर्म और संस्कृति को अपने साथ सजोय रखने का क्या फायदा ।
फ्रांस ने धर्मनिरपेक्षता को आधार बनाया है तो क्या वो चर्च में मौजूद नंनस की पोशक को बदला जाएगा अगर नहीं तो क्यो सिर्फ एक धर्म को ही निशाना बनाया जा रहा है।
अगर जीन्स और पैंटस से संस्कृति प्रभावित होती है तो क्या पुरूष को भी धोती कुर्ता पहन कर आने को कहा जाएगा अगर नहीं तो क्यो हम नारी को अपने आधीन रखने से अपने आप को रोक नहीं पाते ।..
बुर्का हो या फिर जीन्स ..हम किसी की आज़ादी में सिर्फ और सिर्फ वर्चस्व साबित करने के लिए खलल क्यों डालते हैं ।।

Monday, June 22, 2009

चार लड़कों वाली ख़ाला की मौत...

चार लड़कों वाली ख़ाला की मौत...

रविवार करीब सवा दो बजे घर से फोन आता है ..खबर मिलती है की पड़ोस में रहने वाली ख़ाला का इंत्तकाल हो गया...रात को उनको दफनाया जाएगा ,क्योकि उनका मुबंई में रहने वाला लड़का एतेशाम रात तक ही पहुंच पाएगा..मैने कहा ठीक है मेरी शिफ्ट भी खत्म हो जाएगी .....मैं पहुचा जाऊंगा...

आफिस में व्यस्त रहने के कारण मुझे एक बार भी उनका ध्यान नहीं आया....शिफ्ट के बाद घर जाते हुए एक -एक कर के उनसे जुडे सारी बाते नज़र के सामने धुमने लगी..

ख़ाला यानि नरगिस बेगम मुहल्ले में अच्छा रूतबा रखती थी क्योकि उन्होने ने चार लड़कों को जन्म दिया था ....इसलिए उन्हे बिरादरी में होने वाले हर कम में आगे रखा जाता था ...खालू यानि उनके पति भी ठीक ठाक कमा लेते थे ..एक बड़ा माकान उन्होने खरीद लिया था ।..

लड़को को स्कूल में तो डाला पर लड़को के गुरूर में उन पर ध्यान न दे पाईं...नतीजा बस छोटे लड़के को छोड़ कर कोई भी 10सीं तक न पहुच पाया ..ईधर उधर काम में लग गए.. ईधर उधर काम करने वालों को ऐसी वैसी आदतें भी पड़ जाती है ..बड़ा लड़का नशे से जुडा...बाकि दो भी छोटे मोटे काम में लग गए..बस छोटा लड़के को मुबंई में किसी रिश्तेदार ने नौकरी दिला दी...

मां का सपना होता है, उनकी औलाद कैसी भी हो पर अपने बेटों के सिर पर सहेरा देखे... बेटों की किसी तरह उन्होने शादी करावा दी..बाप की कमाई कब तक और कितनी चलती...आपसी झगडे बढ़ने लगे हर लड़का अपना हिस्सा मागने लगा ,.. बाप बिमार पड़ गये..इलाज के लिए पैसा नहीं था ...

सरकारी अस्पताल मे कितने दिन ज़िन्दगी खींचती ...एक दिन उनकी मौत हो गई..माकान का एक हिस्सा पहले ही बिक चुका..100 गज़ में तीनों भाई रहते थे..
कम खाना बहुओं का ताना, बेटों का नाकारापन .खाला को मौत के पास ले जा रहा था।

अभी दो दिन पहले ही उनके घर जा कर खाला से मिला बहुत कमज़ोर हो गई थी ...मुझे देख कर उनकी आंखों मे आंसू आ गए... और उनके आंसू ने मुझे सब कुछ बता दिया था ...

मैं कब्रिस्तान पहुच गया था ..नमाज़े जनाज़ा हो चुकी थी ..मुबंई से आने वाला लड़का अभी तक नहीं पहुचां थी .पर सब लोग तरस खाते हुए यही कहे रहे थे ...देखो चार चार लड़के होने बाद भी ..कैसी मौत हुई इनकी...

तभी लड़का पहुच जाता है ..उनको दफन कराया जाता ..अभी मज़दूर कब्र में मिट्टी ही डाल रहा था की उनके लड़कों की आपस में लड़ाई शुरू होगी..और लड़ाई कि वजह थी मौत पर होने वाले खर्च का बंटवारा..
खाला ने जिन्हे जन्म देकर मान सम्मान कमाया..उनकी कब्र पर ही उनके बेटों उसे उनके साथ ही दफन कर दिया..मेरी आंख भर आई..और मैं घर के लिए..चल दिया..................

Saturday, June 20, 2009

औलाद की ज़रूरत,चाहत या मजबूरी ...

औलाद की ज़रूरत,चाहत या मजबूरी ...

शादी के बाद कहीं भी जाना होता तो लोगों का एक ही सवाल होता.... औऱ बच्चे !... लगता की ज़िन्दगी कुछ नहीं, बस गिने चुने नियम हैं, जिसे सब को मानना है।
अगर आप इन नियमों के दायरे में नहीं रहेगे तो लोग आपको अजीबों गरीब ढ़ग से दिखेगें और बात करेगे...
जान पहचान वाले बुर्ज़ग आप को ढ़ेरों नसीहत दे डालेगें...ज़िन्दगी क्या होती है..जीवन कैसे चलता है ..और लाईफ की सच्चाई..सब बता दिया जाता है ।
बात शुरू करने से पहले आपको अपने दोस्त प्रोफेसर के बारे में बताता चलूं...
प्रोफेसर की शादी को 6 साल हो गए... एक परिवार को दो से तीन या तीन से चार करने का प्रयाप्त वक्त, पर ऐसा हो न सका ..
प्रोफेसर का काम भी, कभी चलता कभी नही चलता .कभी नौकरी रहती तो कभी मंदी की मार से नौकरी से बाहर कर दिया जाता है..शायद ऐसी आर्थिक स्थीति में बच्चे के बारे में सोचना ...किसी के बस में नहीं वो इसलिये जहां..बच्चे का जन्म किसी छोटी फैक्ट्री लगाने के खर्च से कम नहीं होता ...वहां बिना तंन्खाह के बच्चे को दुनिया में लाने पर सोचना शायद आसान नहीं था...
लेकिन प्रोफेसर और उसकी पत्नी पर समाज औऱ रिश्तेदारों का इतना दबाव पड़ा की वो आईवीएफ के द्वारा बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो गए...
आईवीएफ का कम से कम खर्चा लाख रूपए तो होता है..उसके साथ हाज़ारों की दवा ..वक्त वक्त पर इंजैक्शन ...और पूरे नौ महीने काफी मंहगा खर्चिला दौर....
ऐसे में प्रोफेसर की नौकरी भी नहीं । दोस्तों से कर्ज़ लेकर वो ये सारा ट्रीटमेंट करवा रहा है..यानि बच्चे की आने की खुशी... तो... पर क्या कर्ज़ का दर्द उसके जीवन को कैसे उभारेगा ये देखने वाली बात है...
अब ये सवाल उठता है की हम चाहे कितना अपने आपको आधुनिक कहे लेकिन हमारे समाज ने जो बरसों पहले नियम बना दिये हैं उसको ही हम पालते हैं...
आज भी शादी के बाद हमें बच्चा चाहिए ही होता है..हमें नही तो हमारे घर वालों या फिर रिश्तेदारों..
अगर पैसा है तो मॉडर्न विज्ञान में कई तरह के विकल्प हैं ....अगर नही तो साधु महात्माओं के कई डेरे भी मौजूद ..नहीं तो सब की सुनने वाला दाता तो है ही...
क्या हम ये कभी सोचेगें की हमें क्यो चाहिए औलाद ..हम किस के लिए बच्चे को दुनिया में लाना चाहते हैं..
आज हमारे देश 15 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जिनका दुनिया में कोई नहीं ..और 20 प्रतिशत ऐसे मां बाप है जो अपने बच्चों को सड़क पर छोड़ देते है ... जन्म देने के बाद ...अगर आपको बच्चों से प्यार है तो आप उन्हे ले सकते हैं... पर नहीं हमें आपना खून चाहिए..अपनी औलाद ... जिससे पाने के लिए हम कुछ भी करेगें कैसे भी करेगें । कई और वाक्य हैं..जिसमें अपनी औलाद पाने के लिए लोगों ने अपनी आखिरी सांस तक प्रयास किया...
हर बार ये ही सवाल ज़हन में आता है की औलाद चाहत है ,ज़रूरत है या फिर मजबूरी ......

Saturday, June 13, 2009

प्रेम पत्र- आज भी तुम्हारी ज़रूरत है

प्रेम पत्र-2
आज भी तुम्हारी ज़रूरत है

दोस्त

तुम्हारा एहसास आज भी है हर तरफ.. जब कभी ज़िन्दगी में अकेली हुई..न जाने क्यों कदम तुम्हारे तरफ चल दिये..ये सोचे बिना उस वक्त तुम क्या कर रहे होगे।कैसे होगे... वक्त होगा या नहीं..ये सब कभी सोचा ही नही, बस तुम्हारे पास पहुच गई..। तुमने दरवाज़ा खोला ऊपर से नीचे तक देखा और अपना हर काम छोड़ कर थोड़ा सा मुस्कराए और मुझे अंदर बुला लिया ।...

तभी न जाने कैसे सारी परेशानी दूर जाते दिखने लगती..बस फिर बैठते ही शुरू हो जाती ..क्या हुआ, कैसे हुआ.किसने किया .दुनिया कितनी खराब सब मेरे पीछे हैं..हर तरफ लोग खाने दौड रहे हैं..क्यों नही मुझे कोई समझता । सब कोई ग़लत बाते क्यों करते हैं..एक सांस मै बोलना शुरू करती ..आंखों में आंसू भर जाते ..धीरे धीरे आवाज़ तेज़ होती जाती .तुम चुप चाप सुनते रहते ..बीच मैं उठ कर पानी ला देते...

मैं आंसू पोछती ..पानी पीती ... फिर अपने आप को संभलता हुआ महसूस करती...
धीरे धीरे तुम कहते.. नहीं, तुम ठीक हो..तुम्हारी बात ठीक है,तुम्हारी सोच सही .. तुम ग़लत नहीं हो सकती..

तुम्हारी बाते मेरे अंदर शक्ति पैदा करती ,जीने की उम्मीद.. संसार फिर अच्छा लगने लगता ... अंधेरे में रोशनी न जाने कैसे पैदा हो जाती ..फिर उठती, तुम्हारा शुक्रिया अदा कर करती ..और चली जाती ..

कभी तुमने कोई गिला नहीं किया, कोई शिकवा नही किया,.कभी ये नहीं कहा... क्यों भई कभी मेरा हाल तो पुछो....कभी मेरे बारे में तो जानो..कुछ, बस.... हर वक्त मेरे लिए तुम्हारे दरवाज़े खुले रहते..

दोस्त आज भी तुम्हारी ज़रूरत महसूस करती हूं..पर क्या करू जब से दूर हुई..कोई डोर ही नहीं रही..जो तुम्हारे पास ले जाए...बस वो यादे हैं, जो तुम को भूलने नहीं देती...समाज की वो चोटें हैं.. जो तुम्हारे न होने का एहसास कराती रहती हैं..

न जाने तुम कहां होगे..पर मेरा ये पत्र पढ़ो तो जवाब ज़रूर देना ... तुम्हार जवाब मेरी ज़िन्दगी को आगे ले जाने में कुछ सहारा बनेगा ।।
जवाब की आस में
तुम्हारी दोस्त...

Friday, June 12, 2009

न्यूज़ चैनल ठगी के भागीदार...

न्यूज़ चैनल ठगी के भागीदार...
आज मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी ने जडेजा मामले मे कहा कि लोग क्यों नहीं समझते कि वो बेवाकूफ बनाए जा रहे हैं और ऐसे लोगों की चपेट में कैसे आ जाते हैं।.मैने कहा लोगों को समझ में आता है पर क्या करे दिल नहीं मानता और इसका फायदा जडेजा और दूसरे महाराज तो उठाते ही हैं पर न्यूज़ चैनल भी लोगो को ठगने में पीछे नहीं.. जी मैं चैनलों में आने वाले भविष्यवाणी के कार्यक्रम की बात कर हूं ।
हम सब जानते हैं कि ये सब बकवास होता है लोग भी समझते हैं पर वो न देखना भूलते हैं और न हम दिखाना ..
चैनलों की लोगों के बीच गिरती हुई साख़ के साथ टीआरपी को कुछ सांस देते हैं ये कार्यक्रम ..पर कमज़ोर और नकली सांसे कब तक चैनलों को जीवत रखेंगी ये देखना होगा..
मुझे याद है इंडीया शाइनिंग के दौर पर कोई ऐसा चैनल और उस पर मौजूद कोई ज्योष्ति महाराज ऐसा नहीं था जो ये कहते न थकता कि वाजपेयी जी वापस आ रहे हैं..क्या हुआ नतीजा आपके सामने है वाजपेयी का राजनीतिक भविष्य एक घर में कैद हो कर रहे गया..
इसके बाद गांगुली ,सचिन और फिर भारत को व्लर्ड कप चैपियन बनने का वादा किया ज्योष्तियों ने पर हुआ... क्या... सब के समाने फिर आया ।
सूरज ग्रहण और चांद ग्रहण में होने वाले नुकसानों पर भी बोले पर फिर क्या हुआ सब ने देखा ..
इसके बाद आया 2009 का चुनाव आडवाणी को प्रधानमंत्री सबने बनवाया मनमोहन पर कोई राज़ी नहीं हुआ ..इसका भी क्या नतीजा निकला सबने देखा..
अपने तर्को को तो सब दिखाते हैं..उनकी खबरों का क्या असर होता है इस पर बार बार प्रोमो चलाते है पर अपने भविष्वाणी कार्यक्रम मे सब ग़लत बताया गया ये भी तो दिखा कर लोगों सचेत कर सकते हैं..पर नहीं, ऐसा करने की हिम्मत किसी में नहीं।
मुझे याद है एक नामी चैनल के एंकर ने कहा हमारे महाराज ने कहा था कि नई सरकार के आने के बाद बाज़ार में उछाल आएगा..और देखिये बाज़ार में उछाल आ गया..
उस समझदार एंकर ने शायद अपनी नौकरी के चलते ये कहा हो क्योंकि ये बात कोई बेवाकूफ आदमी भी जानता है जब नई सरकार आती है तो पहले दिन मार्किट ऊपर उठती ही है ।
उमा खुराना के स्टिंग आपरेशन के बाद जिस तरह से स्टिग आपरेशन होने कम हुए लगभग खत्म ही हो गए वैसे ही शायद जब तक कोई बड़ी खतरनाक घटना भविष्वाणियों के कार्यक्रमो से नही होगी तब तक इनका खत्म होना मुशिकल ही है।
एक बात और अगर लाला ने कमाने के लिए चैनल खोला है तो ऐसा कार्य़क्रम दिखाना जायज़ है पर जो लोग पत्रकारिता को समाज सेवा समझते हैं। खबर सही और सटीक दिखाने का दम भरते हैं...किसी मजबूरी के आगे झुकने को तैयार नहीं के किस्से सुनाते और लिखते रहते हैं .. वो लोग ऐसे कार्यक्रम को अपने चैनल में चलाने के लिए कैसे राज़ी हो जातें है.. या तो वो इस पर विश्वास करते हैं और अगर नहीं करते.. तो ..जिस चीज़ पर वो खुद ही विश्वास नहीं करते उस पर लोग विश्वास करें ऐसा वो कैसे कर सकते हैं.. साफ है लोगों को ठगने में चैनल की पूरी भागीदारी है...और अगर नहीं तो ऐसे कार्यक्रम से पहले लोगों को सचेत करें कि इनकी बातों से चैनल का कोई लेना देना नहीं।

Sunday, June 7, 2009

DR Allah Rakha Rahman ब्लाग पर

ब्लाग पर पहेली तस्वीरें डॉ रहमान मंच पर बोलते हुए

डॉ रहमान डिग्री लेते हुए


डॉ रहमान वीसी के साथ

डॉ रहमान डॉ बनने जाते हुए


डॉ रहमान अभी सिर्फ रहमान है

रहमान अलिगढ़ में

डॉ Allah Rakha Rahman का नाम पहले A. S. Dileep Kumar था । भारत चेन्नई तमिल में January 6, 1966 में जन्म हुआ ।वो एक प्रसीद्ध संगीतकार के रूप में जाने जाते हैं आस्कर मिलने के बाद आज उन्हे अलिगढ मुस्लिम विशवविधालय ने डाक्टरेट डग्री से नवाज़ा ,कभी स्कूल जो शख्स न गया हो आज वो डाक्टर बन गया ..रहमान के हुनर को सलाम करते हैं और अपने और ब्लाग जगत की तरफ से बधाई देते हैं.. जय हो.....

Thursday, June 4, 2009

हिन्दुओं का अंतिम संस्कार पाकिस्तान में कितना दर्दनाक


हिन्दुओं का अंतिम संस्कार पाकिस्तान में कितना दर्दनाक

बात पुरानी है पर बात शुरू करने के लिये एकदम सटीक ..70 साल की राधा का देहांत 30 मई 2006 में पाकिस्तान के लाहोर शहर में होता है ...राधा का इस दुनिया में कोई नहीं था ..लिहाज़ा उसकी मृत्यु पर भी कोई नहीं आया ..पांच दिन तक उसकी लाश मृत्यु गृह में पड़ी रही ..कारण ये नहीं था कि उसका कोई रिश्तेदार नहीं आया, वज़ह थी कि लाहोर शहर में शमशानघाट है ही नहीं .. Daily News and Analysis(DNA)
पैसों का अभाव जगह की कमी और हिन्दु के मरने पर प्रशासन के कड़े नियम की वज़ह से लाहोर हिन्दु कमेटी ने भी अपने हाथ पीछे खीच लिये..आखिर में उसे मुस्लिम -मियानी साहेब क्रबिस्तान में दफन किया गया ..
इस के बाद वहां के हिन्दुओं ने फिर उठाई शहर में शमशान की मांग..जिसे वो काफी अरसे से कर रहे थे,
बंटवारे के बाद लाहोर में 11 शमशान घाट हुआ करते थे ,मुख्य शमशान घाट मॉडल टाउन,टक्साली गेट,और कृष्णा मंदिर के पास था पर आज कुछ भी नहीं है .ये बात पाकिस्तान की सरकार खुद मानती है । शमशान की ज़मीनों को मकानो में तबदील कर दिया गया ।कुछ में बड़ी बड़ी इमारते तामीर की गई या फिर गिरा दिया गया ।
बंटवारे के वक्त पाकिस्तान के हर शहर में शमशान घाट हुआ करते थे लेकिन ज्यादतर हिन्दु सिंध के इलाके में रूके इसलिये सिंध के तो शमसान घाट कायम हैं पर दूसरे शहरों में हिन्दुओं की कम तादाद होने के कारण शमशान घाट खत्म कर दिये गए हैं..
लाहोर में हिन्दुओं के पास तीन विकल्प बचते हैं अपने प्रियजनों के अंतीम संस्कार करने के
पहला-वो लाश को नानक साहब ले जाये जहां शमशान घाट मौजूद है पर बहुत कम हिन्दु ही ये कर पाते हैं .. क्योंकि पाकिस्तान मे हिन्दुओं की आर्थिक स्थिति मज़बूत नहीं हैं ..नानक साहब ले जाने में बहुत खर्चा होता है ।
दूसरा-विक्लप है कि वो रवि नदी के पास अंतिम क्रिया को अंजाम दे..पर इसमे दो परेशानियां है पहली ये कि इसके लिये सरकार की अनुमति चाहिये होती है जो सरकार से मिलना बहुत मुश्किल होता है रसूक और रिश्वत चलती है जिसे पूरा करने में हिन्दु समर्थ नहीं ..दूसरी बात ये कि वहां आप मरने पर होने वाले क्रिया पाठ नहीं कर सकते जो शमशान में किये जा सकते हैं।
तीसरा- ये कि उन्हे दफना दिया जाये..जिसे वहां के ज्यादातर लोग अपनाते हैं.क्योंकि ये सबसे आसान तरीका है एक खर्चा कम दूसरा किसी अनुमित की ज़रूरत नहीं..
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादतर हिन्दु इसी का सहारा लेता हैं क्योकि दाह संस्कार में तकरीबन 20 टन लकड़ी और 2 कनस्तर घी की ज़रूरत पड़ती है और पाकिस्तान के हिन्दुओं के पास इतना पैसा नही है..भारत में कई संस्थान मदद के लिये आगे आ जाती हैं पर पाकिस्तान में ऐसा कुछ नहीं है..
दूसरी वजह दफनाने की ये है कि वहा हिन्दु अपनी पहचान छुपा कर रहते हैं ।
बाबरी मस्जिद के बाद तो ये सिलसिला खत्म ही नहीं हुआ।
बाल्मिक सभा के लोग इस के लिये संधर्ष कर रहे है उन्हे कुछ दिलासे भी मिले
1976 में लाहोर के बुंद रोड पर उन्हे ज़मीन दी गई थी पर ज़मीन विवादित थी।इसलिये वहां शमशान घाट नहीं बन पाया । बाद में मई99 में उन्हे 10 कनाल यानि 4,000sqmt कि ज़मीन बुंद रोड ही पर सागियान पुल के पास मुहिया कराई गई..लेकिन सरकारी दांव पेंच के कारण वो ज़मीन इन्हें नहीं सौंपी गई...
पहले पाकिस्तान के सदन में हिन्दु नुमाइंदगी होती पर अब अल्पसंख्यक सीट इसाईयों को दे दी जाती है । मौत के बाद भी पाकिस्तान के हिन्दुओं का दर्द कम नहीं होता ..तालिबान का जुल्म तो अभी चर्चा में आया हैं लेकिन पाकिस्तान के हिन्दु तो बंटवारे के बाद से ही पाकिस्तानी हुक्मत के तालिबानों से डरे-सहमें, जी और मर रहे हैं।।।।
(क्राची में Old Golimar road में शमशान घाट है)

Tuesday, June 2, 2009

खुदा का क़हर या कुछ और-बरमूडा ट्रायएंगल..(bermuda)

खुदा का क़हर या कुछ और-बरमूडा ट्रायएंगल..(bermuda)
सोमवार को एयर फ्रांस का जहाज़ 447 ब्राज़ील से 7बजे उड़ा और अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुज़रते हुए.. गायब हो गया ।
आज खबर आई कि उसके कुछ टुकड़े ब्राज़ील के समुद्र के किनारे पाए गए है..
इस हादसे ने लोगों के अंदर डर पैदा कर दिया और दुनिया को बरमूडा ट्रायएंगल के बारे में एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया..
आप में से ज्यादातर लोग बरमूडा त्रीकोण के बारे मे जानते होगे..पर जिन्हे नहीं मालुम उनको इसके बारे में जानना ज़रूरी है..ये दास्तान किसी जादुई कहानी से कम नहीं
कहते हैं सागर न जाने कितने राज़ अपने में दबाए हुए है और उसी में से एक राज़ है बरमुडा ट्रायएंगल ..ये एक ऐसा ब्लैक होल है, जिसकी चुबंक से बच कर निकलना बहुत मुश्किल है...जो भी इस के करीब पहुचता है उसको ये निगल लेता है..जब ये अपने असली रूप में होता है उस वक्त का मंज़र बहुत ही खौफनाक होता है ..तूफान का रूप ये ले लेता है और तकरीबन 55हज़ार फीट तक इसकी लहरे पहुच जाती है ..और कोई भी विमान ज्यादा से ज्यादा 33हज़ार फीट तक ही उड़ सकता है और इतने ताकतवर भंवर से पानी के जहाज़ का हाल क्या होगा खुद ही पता चल जाता है न जाने कितने जहाज़ और कितना ज़िन्दगियों को ये लील चुका है...
बरमूडा ट्राएंगल को शैतानी ट्रायएंगल भी कहा जाता है ..सब से पहले इसकी खबर आई दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब एक जहाज़ अचानक इसी इलाके से लापता हो गया तब लोगों का मानना था कि खुदा ने अपना कहर दिखाने के लिये ऐसा किया है क्योंकि इस दुनिया में बेकसूरों की जान जा रही है ..इस के बाद न जान क्यों ऐसा तभी होता जब दुनिया में ज़ुल्म और गुनाह बढ़ने लगते ।लगभग साठ साल से लगातार ऐसा ही हो रहा है ,,, ये कोई अंधविश्वास नहीं यहां सारे रिकॉर्ड मौजूद है।..वैज्ञानिकों ने इस मिथ को खत्म करने के लिये जहाज़ों और विमानों में कई सुधार भी किये गए पर..कोई फायदा नहीं हुआ...
नक्शे में ये इलाका उत्तर पश्चिम अटलांटिक महासागर पर है .. इस त्रीकोण के रेखाए ज्यादा साफ नहीं दिखती पर जो दिखता है वो ये कि इसका एक कोना फ्लोरिडा से जुडता है दूसरा बरमूडा से और तीसरा कोना प्यूरटोरिका से इसकी सरहदें बाहामास और कैरेबियाई सागर के पास हैं..और इसी के पास के सुमद्री इलाके से कई जहाज़ और विमान गुज़रते है .. ज़रा सा भी उनका भटकाऊ उन्हे जाने और अंजाने इसकी ओर ले जाता है और वो इसकी चपेट में आ ही जाते है ...... फिर कभी वापस नहीं आ पाते ..
उम्मीद करते हैं हम कि ये मिथ टूटे और फ्रांस के विमान से इसके राज़ का पर्दाफाश हो...पर अभी तक बरमूडा ट्रायएंगल का राज़ बरकरार है.......