Friday, June 12, 2009

न्यूज़ चैनल ठगी के भागीदार...

न्यूज़ चैनल ठगी के भागीदार...
आज मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी ने जडेजा मामले मे कहा कि लोग क्यों नहीं समझते कि वो बेवाकूफ बनाए जा रहे हैं और ऐसे लोगों की चपेट में कैसे आ जाते हैं।.मैने कहा लोगों को समझ में आता है पर क्या करे दिल नहीं मानता और इसका फायदा जडेजा और दूसरे महाराज तो उठाते ही हैं पर न्यूज़ चैनल भी लोगो को ठगने में पीछे नहीं.. जी मैं चैनलों में आने वाले भविष्यवाणी के कार्यक्रम की बात कर हूं ।
हम सब जानते हैं कि ये सब बकवास होता है लोग भी समझते हैं पर वो न देखना भूलते हैं और न हम दिखाना ..
चैनलों की लोगों के बीच गिरती हुई साख़ के साथ टीआरपी को कुछ सांस देते हैं ये कार्यक्रम ..पर कमज़ोर और नकली सांसे कब तक चैनलों को जीवत रखेंगी ये देखना होगा..
मुझे याद है इंडीया शाइनिंग के दौर पर कोई ऐसा चैनल और उस पर मौजूद कोई ज्योष्ति महाराज ऐसा नहीं था जो ये कहते न थकता कि वाजपेयी जी वापस आ रहे हैं..क्या हुआ नतीजा आपके सामने है वाजपेयी का राजनीतिक भविष्य एक घर में कैद हो कर रहे गया..
इसके बाद गांगुली ,सचिन और फिर भारत को व्लर्ड कप चैपियन बनने का वादा किया ज्योष्तियों ने पर हुआ... क्या... सब के समाने फिर आया ।
सूरज ग्रहण और चांद ग्रहण में होने वाले नुकसानों पर भी बोले पर फिर क्या हुआ सब ने देखा ..
इसके बाद आया 2009 का चुनाव आडवाणी को प्रधानमंत्री सबने बनवाया मनमोहन पर कोई राज़ी नहीं हुआ ..इसका भी क्या नतीजा निकला सबने देखा..
अपने तर्को को तो सब दिखाते हैं..उनकी खबरों का क्या असर होता है इस पर बार बार प्रोमो चलाते है पर अपने भविष्वाणी कार्यक्रम मे सब ग़लत बताया गया ये भी तो दिखा कर लोगों सचेत कर सकते हैं..पर नहीं, ऐसा करने की हिम्मत किसी में नहीं।
मुझे याद है एक नामी चैनल के एंकर ने कहा हमारे महाराज ने कहा था कि नई सरकार के आने के बाद बाज़ार में उछाल आएगा..और देखिये बाज़ार में उछाल आ गया..
उस समझदार एंकर ने शायद अपनी नौकरी के चलते ये कहा हो क्योंकि ये बात कोई बेवाकूफ आदमी भी जानता है जब नई सरकार आती है तो पहले दिन मार्किट ऊपर उठती ही है ।
उमा खुराना के स्टिंग आपरेशन के बाद जिस तरह से स्टिग आपरेशन होने कम हुए लगभग खत्म ही हो गए वैसे ही शायद जब तक कोई बड़ी खतरनाक घटना भविष्वाणियों के कार्यक्रमो से नही होगी तब तक इनका खत्म होना मुशिकल ही है।
एक बात और अगर लाला ने कमाने के लिए चैनल खोला है तो ऐसा कार्य़क्रम दिखाना जायज़ है पर जो लोग पत्रकारिता को समाज सेवा समझते हैं। खबर सही और सटीक दिखाने का दम भरते हैं...किसी मजबूरी के आगे झुकने को तैयार नहीं के किस्से सुनाते और लिखते रहते हैं .. वो लोग ऐसे कार्यक्रम को अपने चैनल में चलाने के लिए कैसे राज़ी हो जातें है.. या तो वो इस पर विश्वास करते हैं और अगर नहीं करते.. तो ..जिस चीज़ पर वो खुद ही विश्वास नहीं करते उस पर लोग विश्वास करें ऐसा वो कैसे कर सकते हैं.. साफ है लोगों को ठगने में चैनल की पूरी भागीदारी है...और अगर नहीं तो ऐसे कार्यक्रम से पहले लोगों को सचेत करें कि इनकी बातों से चैनल का कोई लेना देना नहीं।

10 comments:

AlbelaKhatri.com said...

bahut khoob !

रंजन said...

दोनों में कुछ फर्क है.. वो आपसे धन नहीं एंठते.. और रुपये तिगुने करने का वादा नहीं करते..

परमजीत बाली said...

यहाँ कोई चैनल दुकानदारी ना करता हो मानना मुश्किल है। सभी कुछ कमाई के लिए ही तो होता है।अपना पारिश्रमिक तो वह वसूलेगें ही।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

इन चैनलों पर जो भी बिक जाये..बेचा जायेगा. सरकार का डंडा न हो तो न जाने और क्या क्या पेश कर दें, ये बेचने के लिए.

विपुल said...

अच्छा मुद्दा है औऱ एकदम सही बात.मैं रंजनजी से कहता हूं लोगों की भावनाओं के साथ खेलना ठीक है..धन एठना ही अपराध नहीं गलत रास्ता दिखाना लोगों को झूठी खबरें देना किर कसी न्यूज़ चैनल के लिए ठीक नहीं सरकार अगर सखती करें तो लाईसेंस जब्त हो सकता है
विपुल

रंजन said...

@विपुल
मैं न्युज चैनलों को जस्टीफाई नहीं कर रहा या सही नहीं ठहरा रहा... केवल ये कहना चाह रहा हूँ कि दोनों अलग तरह के मु्द्दे है.. अलग तरह से देखा जाये..

अनिल कान्त : said...

ab kya kahein

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

vipul said...

कल कोई ज्योतिष्य पकड़ा जाता है तो क्या चैनल ज़िम्मेदारी लेगा क्या आपको पता भविष्य बता कर पत्थर बताया जाता है जो हैसीयत के हिसाब से होता है...और वो पत्थर जान पहचान वाले से ही लेने को कहा जाता है ..ये ठगी नहीं है क्या रंजनजी..कहानी अलग है पर जडेजा दोनो तरफ है अलग रूप में..ध्यान दिजिये रंजनजी विपुल

Anil Pusadkar said...

माया महा ठगनी रे बाबा,माया महा ठगनी।सहमत हूं आपसे शत-प्रतिशत्।

Gyanesh said...

हिंदुस्तान में हजारों लोग हैं जो पाखंड का सहारा लेकर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं. लेकिन टीवी न्यूज़ वाले भी इस भीड़ में शुमार हो जायेंगे, यह जरूर एक चिंता का विषय है. एक सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है. आजकल ऐसा लगता है की ज्यादातर मीडिया चैनल TRP के चक्कर में एक तरह के अंधविश्वास को बढावा दे रहे हैं. लोगों को टोने-टोटके व तंत्र - मंत्र के मायाजाल में उलझाना आज कल के न्यूज़ चैनलों का फैशन बन गया है. हर तरह के २४ घंटे वाले चैनल तमाम् बाबाओं से भरे हुए हैं.