Monday, July 27, 2009

नज़ीर बनारसी की नज़्म

नज़ीर बनारसी की नज़्म

किसने झलक पर्दे से दिखा दी।
आंख ने देखा दिल ने दुआ दी।।
होश की दौलत उनपे गवां दी।
कीमते जलवा हमने चुका दी।।
रात इक ऐसी रौशनी देखी।
मारे खुशी के शम्मा बुझा दी।।
तुमने दिखाए ऐसे सपने ।
नींद में सारी उम्र गवां दी।।
पूछें हैं वह भी वजहे –खमोशी।
जिसके लबों पर मोहर लगा दी।।
उनको न दे इल्ज़ाम ज़माना ।
खुद मेरे दिल ने मुझको दगा दी ।।
आंच नज़ीर आ जाए न उन पर।
दिल की लगी ने आग लगा दी ।।

4 comments:

ओम आर्य said...

उनको न दे इल्ज़ाम ज़माना ।
खुद मेरे दिल ने मुझको दगा दी ।।
आंच नज़ीर आ जाए न उन पर।
दिल की लगी ने आग लगा दी ।।

गज़ब की पंक्तियाँ है .....अतिसुन्दर

महेन्द्र मिश्र said...

नज़ीर बनारसी की नज़्म
सुन्दर नज़्म...

Udan Tashtari said...

तुमने दिखाए ऐसे सपने ।
नींद में सारी उम्र गवां दी।।

-वाह! नज़ीर बनारसी की उम्दा नज़्म पढ़वाने के लिए आपका आभार.

AlbelaKhatri.com said...

kamaal hai kamaal
nihaal kar diya
bahut khoob !
______________abhinandan !