Monday, December 14, 2009

71 साल (भाग-6)

71 साल (भाग-6)

बाहर राम नरेश के भाई मेहमनों के साथ खड़े थे ..रामनरेश ने सब को अंदर बुलाया औरतों को औरतों के साथ भेज दिया आदमियों को मुख्य कमरे में ले गए... आने वालों में लड़का था ,लड़के का भाई , और लड़के का मामा... औरतों में लड़के की भाभी और मामी थी ।
कुछ इधर ऊधर की बाते हुई..पुछा मम्मी पापा नहीं आए .रामनरेश के भाई बोले भई बस मामा जी हैं जो सब फाइनल करेगें.. इन्ही पर सब छोडा है..एक हंसी ने माहौल को थोड़ा अच्छा किया .. फिर बातों का दौर शुरू हो गया...

लड़का काम काज ठीक ठाक करता है ..किसी एम्बेसी में सही जगह पर नियुक्त है... देखने में उसका भाई भी सही था ... वो भी किसी आफिस मे काम करता है..दो भाई है ..एक बहन जो दोनो भाईय़ों से छोटी है ..पिता खेती बाढ़ी से जुडे हुए है...कहने का अर्थ है ..एक अच्छा नही तो खराब भी नहीं, ऐसा परिवार .पर रामनरेश और उसके परिवार के लिए एक अच्छा रिश्ता ...और वो भी ऐसा रिश्ता जो रामनरेश के भाई की तरफ से आया हो .. जिससे उनके संबध सही नहीं चल रहे थे ... तभी धर में आया छोटा बच्चा जो अंदर औरतों के साथ था, दौड़ता दौड़ता आया और बोला चाचा चाचा चाची बहुत सुंदर है।... फिर ज़ोर दार ठहाका लगा... रामनरेश के भाई बोले लो भी छोटे साहब ने भी मंज़ूरी दे दी ..मामा जी ने कहा हां जी, ..लड़के के भाई ने सिर हिलाया ,..और लड़के ने भी मुस्कुराहट दे कर सहमति दी ।
नाशता लग गया था ...खाने की तैयारी हो रही थी ...।।

आज अच्छा दिन है ..रामनरेश खुश थे बार बार अपने भाई के हाथ जोड़ कर धन्यवाद दे रहे थे .. आंखे नम थी मन ही मन में भगवान का भी शुक्रिया अदा कर रहे थे ...
लड़के को लड़की भी दिखाई गई.. उसमें भी दोनो की रजामंदी नज़र आई... रामनरेश का परिवार खुश है ... पैसे कहां से आएगें शादी के लिए .य़े भी रामनरेश ने पूरा सोच लिया है...
अब चलने का वक्त हुआ ...लड़के और आने वालों को शगुन के लिफाफे भी दिए .. राम राम कर के और खुशी से सब चल दिए..जाते जाते भी रामनरेश ने अपने भाई का हाथ जोड़ कर धन्यवाद किया ।

मेहमानो के जाने के बाद रामनरेश के परिवार वालों में, आने वाले लोगो की बात हुई हम लोग हर बात अपने हिसाब से करते हैं ... जो हम देखना चाहते हैं वो ही देखते है .
सही भी है खुशी कहीं से भी आए औऱ जितनी देऱ के लिए भी आए ..उसे स्वीकार कर लेना चाहिए...रामनरेश के परिवार ने भी यही किया

लड़की भी खुश थी बहने भी और भाई भी ... कैसे शादी होगी , कहा होगी . सोने का सेट, हर तरह की रस्म , रिश्तेदारों को बुलावा, अभी तो बहुत कुछ करना है ।

रामनरेश ने अपनी पत्नी से कहा देखो हमारे भाई ने ही मदद की ..बीवी ने भी सिर हिला दिया.. बस अब वो लोग अपने मां बाप से बात कर ले और जल्दी से तारीख़ रख ले.... भगवान का बहुत बहुत शुक्रिया ।

ज़िन्दगी में बदलाव अचानक आ जाए तो उसके लिए भगवान का आप पर विशेष ध्यान होना चाहिए... पर इतनी आबादी और इतने भगवान को मानने वाले लोगों में आप का नम्बर कब आएगा ..पता नही ..पर जो पता है वो ये कि रामनरेश का नम्बर नहीं आया है ।

एक दिन, दो दिन, तीन दिन.. एक हफ्ता और पन्द्रहा दिन ... क्या हुआ, क्यों नहीं कोई जवाब आया ..धीरे धीरे धरवालों के चेहरे ग़मगीन होने लगे ।

रामनरेश के भाई भी लौट कर नहीं आए.... पत्नी ने कहा जा कर भाई से तो पुछो..क्या हुआ..सब यहां से खुशी खुशी गए ...पता तो करो....

शाम को रामनरेश अपने भाई के घर जाते हैं...छत से उनकी भाभी देख लेती पर दरवाज़ा खोलने में बहुत वक्त लगा,,, दरवाज़ा खुला तो भाभी के चेहरे में नाराज़गी सी दिखी ... भाई अंदर कमरे में लेटे हुए थे ... रामनरेश अंदर कमरे में जाते हैं ...भाई के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ जाते हैं ..दोनो के बीच खमोशी थी.....

आखिर क्या हुआ ... जो रामनरेश का भाई खामोश था ..और लड़के वालों की तरफ से क्यों नही कोई जवाब आया ..बताऊंगा.. अगली पोस्ट में तब तक आप अपने विचार भेजते रहिए...

No comments: