Sunday, January 31, 2010

पति पत्नी के बीच

.पत्नी सही या पति

काल कोई भी हो पर पति पत्नी के संबधों में मधुरता कम और तनाव ज्यादा रहता है। कल मैं एक क्लब मैं अपने पुराने मित्र के साथ बैठा गुज़रे वक्त का ज़िक्र कर रहा था । तभी उसने मुझ से मेरे विवाहित जीवन के बारे में पुछा ..मैंने चुप रहे कर गर्दन हिला दी ..फिर कुछ देर उधर इधर की बाते होने लगी लेकिन अब मुझे उसकी बातें और याद आया गुज़रा वक्त बुरा लगने लगा था ..उसने मेरे पिता जी के बारे में पुछा कहा क्या मिलने जाते हो ..मैं खामोश हो गया और इधर उधर दिखने लगा ..वो समझ गया उने कहा कि हर ज़िन्दगी मैं कुछ ऐसे ही सवाल होते हैं..जिसके जवाब देते वक्त इसान अपनी गर्दन घुमाने लगता है ...बात को टालने लगता है ...सब के साथ ऐसा ही होता ...
मैंने कहा हां ... कुछ शायद खामोश रहे कर अपना रिशता बचा रहे हैं कुछ बोल कर रिशते को आखिरी मुकाम तक ले गए हैं..
चार साल पहले मेरे एक दोस्त ने प्रेम विवाह किया उनके एक साल का लड़का भी है ..शादी के कुछ महिने मां-बाप बेटा बहू साथ रहे ..पर फिर वो ही होना शुरू हो गया जो हमेशा से होता आया है ...बात बात में झगडा लडाई.. लड़का और बहू अलग हो गए इस उम्मीद के साथ कि अब की बारी सब ठीक हो जाएगा ..पर ठीक कुछ न हुआ बात और बिगड़ती गई..और आज बात तलाक तक आ गई..दोनो अलग रहे हैं..

उधर मुबंई मैं मेरा एक दोस्त सात साल तक एक बार गर्ल से मिलता रहा ..एक बहुत अमीर परिवार का लड़का है ... सात साल के बाद उसने उस डांस बार कीं लड़की से शादी की..... गिने चुने उन लोगों को बुलाया... जो कोई सवाल न करे .. आप को जानकर हैरानी होगी उस डास बार की लड़की की पहले शादी भी हो चुकी और एक लड़की भी है.. फिर भी उसने शादी की औऱ आज भी वो साथ रहे हैं.. बिना किसी तनाव के ..

तो क्या ये अर्थ निकाला जाए कि रिशते ही तनाव पैदा करते हैं.. जो रिशता एक दूसरे की डोर से जुड़ा होता वो ही टूटता है ..या जिसने ज़िन्दगी को जाना नही होता हकीकत को समझा नहीं होता है वो ही रिश्तों को तोड़ने के लिए आमादा रहते हैं.. और जिसे रिश्तों का अहसास होता वो कभी रिश्ता तोड़ने के बारे मै नहीं सोच सकता है.।।।

हर की ज़िन्दगी में ऐसा वक्त आता है हम को लगने लगता है हमारी ज़िन्दगी इस आदमी या औरत ने बर्बाद कर दी ...पर दोस्त ये बस कुछ वक्त का मलाल होता है ..इस मलाल को मिटा दो खत्म कर । दो दुनिया को देखो, लोग रिश्ता जोड़ने के लिए और एक रिशते को निभाने के लिए क्या क्या करते हैं ।.
लड़ाई झगडे तो होते रहते हैं.. और होते रहेगे.. इस से तो संबध को और मज़बूत होना चाहिए....कमज़ोर नही........पत्नी सही या पति इस पर तो बहस होती रहेगी...

Sunday, January 17, 2010

आफगिस्तान की टैक्सी में एशर्वया राय बच्चन


आफगिस्तान की टैक्सी में एशर्वया राय बच्चन

Saturday, January 16, 2010

क्या सहारा टीवी का बदलाव कुछ रंग लाएगा...

क्या सहारा टीवी का बदलाव कुछ रंग लाएगा...

नहीं कतई ही नही... ये लोग आएगे.. सब को अपना अपना कैबिन मिलेगा... एच आर के नियमों से अवगत कराया जाएगा.. सहारा की खूबियो और कानूनों के बारे में बताया जाएगा..

फिर आने वाले अपनी नई टीम बनाएगे.. दूसरे चैनलों के सारे निकम्मे और काम चोर लोग सहारा में बॉस बन जाएगे..

वहां मौजूद और कई सालों से पिसता हुआ, कम पगार, असक्षम, आयोग्य ( जैसा दूसरे चैनलों में जाना जाता है)असली सहारियन उनको सहारा प्राणम करना शुरू कर देगा... और वो अपने अनुभवो का उसके सामने बखान करना शुरू कर देगे...कि हमने वहां ऐसा किया वहा जो टीआरपी आई वो हमारी बदौलत आई... बस देखो थोड़े समय में यहां का माहौल ठीक कर देगें..

नई टीम के सदस्य अपने नए बॉस की बहुत तारीफ करेगें... और कुछ पुराने लोग जिनका काम सिर्फ नए बॉस के साथ हो जाना है उनके साथ भी खड़े हो जाएगे..

सब अपना मतलब साधेगे..चैनल में क्या दिखाना है क्या नहीं दिखाना इस पर बहस होगी..नए बॉस के दिमाग की तारीफ की जाए गई... लखनऊ तक पैगाम पहुचा दिया जाएगा..
सब से पहले चैनल का रंग बदला जाएगा..मौजूदा रंग की कड़ी आलोचना होगी और नए कलर की प्रंशसा...ज़ाहिर है बॉस बीबीसी और स्टार से आया है तो असर भी वहीं का दिखाएगा ...यानि कहने अर्थ है अब तक जो भी आए और गये वो सब नलायक थे...
अब की बारी सब से बढ़िया टीम बनी है ..भई वाह मज़ा आ गया ऐसी आवाज़े कैटीन और चाय की दुकानों में सुनाई देने लगे गी...सब यहीं सोच रहे होगे अब क्या होगा हमारा क्या होगा..... कुछ पैदाइशी सहारा के कर्मचारी जिनका काम ही नए आए हुए सदस्यों की प्रशंसा के पुल बांधना और कुछ महिनों बाद उनका पुल तोड़ देना होता काफी सक्रिय हो जाएगे..

ये सब कुछ महिने चलेगा ... पर कुछ महिनों या अधिकतम साल भर के बाद सब ठंडा पड़ जाएगा ..नए आये हुए लोग पुराने हो जाएगें..बॉस के जाने की तैयारी हो रही होगी और एक नए बॉस की खोज.. इस बीच के वक्त.. छुपे और गुमशुदा सहारियन को सत्ता सौंप दी जाएगी...वो इन सब से बदला निकालेगा अपने अपमान का.
....दावा है हमारा एक एक चीज़ हूबाहू ऐसी ही होगी..... सहारा जैसा है वैसा ही रहेगा......बॉस आएगे चले जाएगें...क्या इस बार सहारा में कुछ बदलेगा...।।

Saturday, January 2, 2010

3इडियट्स के मारे ब्लॉग जगत फिर से सुर्खियों मे.....

3इडियट्स के मारे ब्लॉग जगत फिर से सुर्खियों मे.....

3 इडियट्स का विवाद.....
चेतन भगत विधूविनोद चोपड़ा राजकुमार हिरानी और लेखक का झगड़ा जाने किस मोड़ पर खत्म होगा पर ये सच है कि इस विवाद से एक बार फिर ब्लाग की ताकात का एहसास सब को हो गया होगा...
इतनी जल्दी कोई माध्यम अगर हिट हुआ है तो वो सिर्फ ब्लॉग की ही दुनिया है ..क्योकि इस पर ही होती है सिर्फ दिल की बात और दिल सच बोलता है दिमाग की तरह सोच कर नहीं ... बाकि सभी माध्यम पहले अपना फायदा देखते हैं फिर कुछ दिखाते हैं और छापते औऱ अपने मुनाफे की बात ही बताते हैं...
तो दोस्तों 2010 की ब्लॉग जगत की शुरूआत ज़बरदस्त हुई है ..आगे भी ये कोशिश जारी रहे... अब की बारी आम ब्लॉगर की होनी चाहिए...उसका लेखक सुर्खियों में आना चाहिए...
जय हिन्द जय ब्लॉग...
गर्व करों की हम ब्लॉगर है..