Sunday, February 28, 2010

कुत्ते( dog)


कुत्ते

ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते
कि बख्शा गया जिनको ज़ौके-गदाई(भीख मांगने की अभिरूचि)
ज़माने की फटकार सरमाया इनका
जहां भर की दुत्तकार इनकी कमाई
न आराम शब को न राहत सवेरे
ग़लाज़त में घर नालियों में बसेरे
जो बिगड़ें तो इक दूसरे से लड़ा दो
ज़रा एक रोटी का टुकड़ा दिखा दो
ये हर एक की ठोकर खाने वाले
ये फ़ाकों से उकता के मर जाने वाले
ये मज़लूम मखलूक गर सर उठाये
तो इंसान सब सरकशी भूल जाए
ये चाहें तो दुनिया को अपना बना लें
ये आकाओं की हड्डियां तक चबा लें
कोई इनको एहसासे ज़िल्लत दिला दे
कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे।.

फैज़ अहमद फैज़

Sunday, February 21, 2010

अकसर सोचता हूं।।

अकसर सोचता हूं

इससे पहले की हम बेवाफा हो जाए
क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाए।।
बंदगी छोड़ दी हमने ऐ फराज़
क्या करें लोग जब खुदा हो जाए।।

शमां हूं फूल हूं या रेत पर कदमों के निशान
आप को हक है मुझे जो चाहे कहे ले।।

सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस के दर होती है
जैसे जागी हुई आंखों में चुबन कांच के खव्वाब
रात इस तरह दिवानो की बसर होती है ।।
गम ही दुशमन मेरा
ग़म को ही दिल ढूढ़ता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है।.।

Friday, February 19, 2010

2014 नितिन गडकरी की प्रधानमंत्री बनने की तैयारी ?

2014 नितिन गडकरी की प्रधानमंत्री बनने की तैयारी ?

बीजेपी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी का कहना है कि काग्रेस ने देश के मुस्लमानो को क्या दिया रिक्शा पैंचर टप्पर बेरोज़गारी ..मैने अपने महाराष्ट्र के शासन में मुस्लमान लड़कियो के लिए कॉलेज बनवाया ..उन्होने ने कहा अरे हमारे पास आकर तो देखो ...देखो हमे और हमारे सिंद्धातों को यानि मुस्लमानो को लुभाने की पूरी कोशिश की ..
उनसे ठीक पहले पूर्व बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह कहे चुके कि हम मुस्लमानो को आरक्षण देने का विरोध करते हैं मुस्लमानो ने हिन्दुओ पर बड़े जुल्म किए हैं हमें अपनी विचारधारा पर कायम रहना चाहिए क्योकि इतिहास गवाह है जिसने अपनी विचारधारा छोड़ी वो पार्टी खत्म हो गई...
एक विचार पू्र्व अध्यक्ष के और एक विचार वर्तमान अध्यक्ष के ..एक तरफ हिन्दु और एक तरफ मुस्लमान ।तो क्या अपनी विचारधारा छोड़ कर गडकरी बीजेपी को खत्म करने की तैयारी कर रहे हैं । या फिर एक नई पार्टी की तैयारी कर रहे हैं ।
हिन्दु मुस्लमान गडकरी का ख्वाब ‘सत्ता 2014’ पाना क्या आसान होगा या बीजेपी फिर से दो सीटों पर पहुच जाएगी ।
गडकरी के बारे में कहा जाता है की वो संघ की पंसद है। संघ के बारे में अगर एक आम आदमी से पूछे तो कहेगा एक हिन्दु संगठन जो हिन्दुओ के हितो की बात करता है ..अगर एक आम हिन्दुस्तानी ये राय रखता है तो गडकरी उस परिवार से आने के बाद ऐसे ब्यान क्यों देते हैं कि आप हमें मंदिर बनाने दो हम पास में मस्जिद का निर्माण करा देगे..
ये उनका आत्मविशवास में कमी कहा जाएगा या एक रणनीति .. या अपने आप को वो अभी से प्रधानमंत्री के लिए तैयार कर रहे हैं और बीजेपी में अटल के बाद दूसरा ऐसा चेहरा जिसे कोई बुरा न कहे ।आडवाणी भले जिन्ना की तारीफ करे मस्जिद गिरने और गिराने की निंदा करे लेकिन देश का मुस्लमान कभी भी आडवाणी की रथ यात्रा भूल नही पाता । हिन्दुस्तान में मुस्लमान का बच्चा पैदा होते ही आडवाणी और अमेरीका को गाली देता है और भाजपा को अपना दुशमन मानता है ...पर अटल के नाम पर चुप हो जाता है या फिर उनकी तारीफ कर ही देता है ...और अटलबिहारी के सक्रिय राजनीति से दूर होने के बाद बीजेपी के पास कोई भी ऐसा नेता नहीं जिसकी इमेज सैक्युलर समझी जाए...नितिन गडकरी एक विकल्प दिख रहे हैं ।
आज उनको अनुभवहीन बताया जा रहा है पार्टी को एनजीओ की तरह चलाने पर उनका मज़ाक उडाया जा रहा है पर हमको नहीं भूलना चाहिए वो पार्टी के पोस्टर लगाने से पार्टी के अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुच चुके हैं।
बीजेपी को उतनी चोट काग्रेस से नहीं पहुची जितनी उनके अपनो ने दी ..ये बात गडकरी जानते हैं और ये भी जानते हैं कि कौन कौन है जो उनकी पीट में छुरा मार सकते है इसलिए उन्होने अपने पहले ही वक्तव्य में सब से हाथ जोड़ कर उनके अहम को शांत कर दिया और शांति से चेतावनी भी दे दी ..गडकरी को मालुम है उनके कुछ फैसले और बयानो से उनका कट्टर हिन्दु वोट कटेगा इसलिए दलित वोट , 10प्रतिशत बिखरे हुए वोट और साथ में गैर भाजपाई वोट पर काबिज़ होने का संदेश दे कर उन्होने अपनी नींव को मज़बूत किया है ..वो महाराष्ट्र से आए है और एक क्षेत्र की राजनीति करने वाली शिवसेना का हाल देखा हुआ है कि कैसे मराठी मानुस ही ने उसका साथ छोड़ दिया इसलिए केवल हिन्दुओ की बात करने से मंदिर तो चल सकता है पर देश नहीं सभाओ में भीड तो जुट सकती है पर पोलिंग बूथ में वोटर नहीं।
..इन चालों को कोई समझ सके या नहीं पर आडवाणी जी ज़रूर समझ गए तभी तो इतने दिनो के बाद ही सही उन्हे गडकरी की तारीफ करनी ही पड़ी । क्योंकि हिन्दुओ की बीजेपी को हिन्दुस्तान की बीजेपी अगर वो बना पाते तो आज शायद भारत के प्रधानमंत्री वो होते ...
मुंबई से आया ये गडकरी बाबू लंबी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है ॥अच्छा है अगर देश के लिए अच्छा है ।। आज भले आप को ये बात भी मज़ाक और जल्दबाज़ी मे लिखी हुई लगे है पर याद रखिए आज आज ही खत्म हो जाता है और कल शुरू हो जाता है ।।

Tuesday, February 16, 2010

सिर्फ 1411 .... हम शर्मिदा है...

सिर्फ 1411 .... हम शर्मिदा है...

वो गरजता था तो बिजली चमकती थी
वो चलता था तो हवा रूक जाती थी
उसके रंग से रोशनी शर्माती थी
उसकी धारियों से घटा को रशक होता था
उसकी आंखो से डर भी डरता था
उसके दांतो में धार थी
उसके नाखूनो में पकड़ थी
इसकी जकड़ से बच पाना मुश्किल था
पर वो ज़ालिम नहीं था
वो मश्कत करना जानता था
अपना पेट भरना जानता था
इस दुनिया को बनाने वाले के नियम जानता था
अपने घर में रहना जानता था
इस का बहुत बड़ा कुनबा था
खुश थे सब जब साथ थे
लेकिन न जाने किसकी इनको नज़र लग गई
एक दिन एक बड़े हैवान ने देख लिया
जिसे इंसान कहते हैं उस शैतान ने देख लिया
घर उजाडना शुरू कर दिया
कुनबे को खत्म करना शुरू कर दिया
एक एक को मारना शुरू कर दिया
इनको मार कर वाह वाही लूटी
आलीशान बंगलो में लटका कर शान समझी
आगे की नस्लो को क्या बताएगे ये बात न समझी
अभी भी वक्त है
संभल जाना चाहिए
1411 सिर्फ बचे है
इन्हे संभालना चाहिए

हे बाघ हम शर्मिदा है
अपनी भूल को हम सुधारेगे
1411 से और आगे ले जाएगे...
हम इस प्रयास को ज़रूर सफल बनाएगे।।
शान

Monday, February 15, 2010

अब क्या देखें राह तुम्हारी (फैज़ अहमद फैज़)

अब क्या देखें राह तुम्हारी (फैज़ अहमद फैज़)

अब क्या देखे राह तुम्हारी
बीत चली है रात
छोड़ो
छोड़ो ग़म की बात
थम गये आंसू
थक गई अंखियां
गुज़र गई बरसात
बीत चली है रात

छोड़ो
छोड़ो ग़म की बात
कब से आस लगी दर्शन की
कोई न जाने बात
बीत चली है रात

छोड़ो गम की बात
तुम आओ तो मन मे उतरे
फूलो की बारात
बीत चली है रात


अब क्या देखे राह तुम्हारी
बीत चली है रात

Saturday, February 13, 2010

युसूफ मिया अपना उल्लू सीधा करें कौम की फ्रिक्र न करें...(चैनल वन)

युसूफ मिया अपना उल्लू सीधा करें कौम की फ्रिक्र न करें...(चैनल वन)
आजकल खबर है कि युसूफअंसारी जो पहले ज़ी में थे चैनल वन के मैनेजिंग एडिटर बन गए... और अपने अलिगढ़ के दौरे में चैनल वन का प्रचार करते वक्त उन्होने कहा ये कौम का चैनल है औऱ कौंम की आवाज़ को उठाया जाएगा..
युसूफसाहब कौम से आपका मतलब पत्रकार है या मुस्लमान..पत्रकार तो होगा ही नहीं क्योंकि आपने आजतक कभी पत्रकार वाला कोई काम किया नहीं हां अहमद बुखआरी से आपका झगड़ा ज़रूर सुर्खियों में रहा..
रही नेता बनने की तमन्ना वो शायद ज़रूर पूरी हो जाए.जिसकी तैयारी में आप पहले से लगे हुए हैं और अब आपकी भाषा भी वैसी ही सुनाई पड़ रही है ...
आपकी छोटी सोच पत्रकारिता और कौम दोनो को छोटा बनाती है..आप अगर अपना काम इमानदारी से करें तो कौम का भी नाम होगा और कौम वाले आपके साथ जुड़े गे भी ..
आपको पता है जिस चैनल से आप जु़ड़े हैं वो किस लिए सुर्खियों में रहा है और ऐसे में जहा कौम को वैसे ही अलग नज़र से देखा जाता है वहा ऐसे चैनल के बैनर के तहत ऐसा छोटा ब्यान आपकी कौम को कितना नीचे गिरा देता है क्या आपने सोचा है...
अगर कौम की बात करनी है तो किसी अच्छे प्लेटफार्म से करें औऱ अगर राजनीति करनी है तो खुल कर करें.पत्रकारिता को राजनीति में न घसीटें और कौम को पत्रकारिता में... कौम खुश है मज़े में है आप जैसे अगर लोग उसे झूठी हमदर्दी और नकली मलहम न दे तो बेहतर है ...
आप मैनेजिंग एडिटर बनने के बाद राजनेताओं के और नज़दिकियां बढाए और किसी मुस्लिम इलाके से टिकट ले.. उसके बाद कौंम आपको उसका सिलाह ज़रूर देगी...पर अभी जबतक आप पत्रकार हैं तो कौम के ज्ज़बात और पत्रकारिता की गरिमा का ख्याल ज़रूर रखें ... शिवसेना का सामना न निकाले...मुस्लामानों पर रहम करे...

Monday, February 8, 2010

मुझसे एक लड़की बात करने लगी है

मुझसे एक लड़की बात करने लगी है

बुझे दीपों में लौ जलने लगी है
मुरझाई कलियां खिलने लगी हैं
मुझसे एक लड़की बात करने लगी है।।

रूखा मौसम अचानक सुहाना हुआ है
रेत में दरिया नज़र आने लगा है
गुलशनो में महक उठने लगी है
मुझसे एक लड़की बात करने लगी है।।

सजना संवरना शुरू फिर से किया है
खुद को देखना शुरू फिर से किया है
हर वक्त मुस्कुराना शुरू फिर से किया है
अचानक दिल की धड़कने बढ़ने लगी है
मुझसे एक लड़की बात करने लगी है।।

हाल क्या है मेरा इस वक्त न पुछो
क्या कर रहा हूं मै इस वक्त न पुछो
दुनिया से दूर होने लगा हूं
खुद को अच्छा लगने लगा हूं
मन में शरारत उठे लगी है
मुझसे एक लड़की बात करने लगी है ।।

बात कुछ होगी बताऊंगा
मुलाकात होगी बताऊंगा
सपनों में फिर से जीने लगा हूं
ज़िन्दगी अच्छी लगने लगी है
मुझसे एक लड़की बात करने लगी है।।

Sunday, February 7, 2010

एक औरत की तस्वीर


यकीन किजिये ये इस की ही तस्वीर है