Saturday, February 13, 2010

युसूफ मिया अपना उल्लू सीधा करें कौम की फ्रिक्र न करें...(चैनल वन)

युसूफ मिया अपना उल्लू सीधा करें कौम की फ्रिक्र न करें...(चैनल वन)
आजकल खबर है कि युसूफअंसारी जो पहले ज़ी में थे चैनल वन के मैनेजिंग एडिटर बन गए... और अपने अलिगढ़ के दौरे में चैनल वन का प्रचार करते वक्त उन्होने कहा ये कौम का चैनल है औऱ कौंम की आवाज़ को उठाया जाएगा..
युसूफसाहब कौम से आपका मतलब पत्रकार है या मुस्लमान..पत्रकार तो होगा ही नहीं क्योंकि आपने आजतक कभी पत्रकार वाला कोई काम किया नहीं हां अहमद बुखआरी से आपका झगड़ा ज़रूर सुर्खियों में रहा..
रही नेता बनने की तमन्ना वो शायद ज़रूर पूरी हो जाए.जिसकी तैयारी में आप पहले से लगे हुए हैं और अब आपकी भाषा भी वैसी ही सुनाई पड़ रही है ...
आपकी छोटी सोच पत्रकारिता और कौम दोनो को छोटा बनाती है..आप अगर अपना काम इमानदारी से करें तो कौम का भी नाम होगा और कौम वाले आपके साथ जुड़े गे भी ..
आपको पता है जिस चैनल से आप जु़ड़े हैं वो किस लिए सुर्खियों में रहा है और ऐसे में जहा कौम को वैसे ही अलग नज़र से देखा जाता है वहा ऐसे चैनल के बैनर के तहत ऐसा छोटा ब्यान आपकी कौम को कितना नीचे गिरा देता है क्या आपने सोचा है...
अगर कौम की बात करनी है तो किसी अच्छे प्लेटफार्म से करें औऱ अगर राजनीति करनी है तो खुल कर करें.पत्रकारिता को राजनीति में न घसीटें और कौम को पत्रकारिता में... कौम खुश है मज़े में है आप जैसे अगर लोग उसे झूठी हमदर्दी और नकली मलहम न दे तो बेहतर है ...
आप मैनेजिंग एडिटर बनने के बाद राजनेताओं के और नज़दिकियां बढाए और किसी मुस्लिम इलाके से टिकट ले.. उसके बाद कौंम आपको उसका सिलाह ज़रूर देगी...पर अभी जबतक आप पत्रकार हैं तो कौम के ज्ज़बात और पत्रकारिता की गरिमा का ख्याल ज़रूर रखें ... शिवसेना का सामना न निकाले...मुस्लामानों पर रहम करे...

1 comment:

Gyanesh said...

आज कल लोग airconditoned स्टूडियो में बैठे बैठे ही Managing Editor बन जाते हैं यार .