Saturday, March 27, 2010

एक कहानी हू मैं

एक कहानी हू मैं

ये कविता मेरे प्रिय मित्र ज्योति त्रिपाठी जी ने भेजी है जिन्हे हम बाबा कहते है॥ अगर पंसद आए तो बाबा के नाम से संदेश भेजें....
अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे,
उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं"....
ज्योति