Saturday, May 8, 2010

मर्दर डे-मा

मर्दर डे
मां.....क्यों चली गई
बहुत याद आती है
आंख अक्सर भर जाती है
कुछ कहूं ,कुछ करूंतेरी शबी नज़र आती है
आज मलाल है तेरे जाने
आज मलाल है तेरे जाने का
तेरे लिए कुछ न कर पाने का
मैं नाकारा रहा निक्मा रहा
फिर भी तेरा दुलारा रहा॥
वो शब्द अब भी गूंजते है
मैं चली जाऊंगी जब पता चलेगा
वो शायद तब मज़ाक था पर
उस हकीक़त का एहसास अब हो रहा है...
सच मैं मां बहुत याद आती है


7 comments:

अजय कुमार said...

संसार की समस्त माताओं को नमन

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

क्या कहने साहब
जबाब नहीं निसंदेह
यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है
धन्यवाद..साधुवाद..साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

Bored mind said...

bahut khoob

ham to fan ho gaye....


KARTIKAY MITTAL
aka
BORED MIND
www.boredmindnsoul.blogspot.com

सतीश कुमार चौहान said...

उसको नही देखा हमने कभी, पर इसकी जरूरत क्‍या होगी
ऐ मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्‍या होगी......सतीश कुमार चौहान भिलाई
satishkumarchouhan.blogspot.com
satishchouhanbhilaicg.blogspot.com

अरुणेश मिश्र said...

प्रशंसनीय ।

Anonymous said...

ma sabase jyada sexy hoti hai

Anonymous said...

ma sabase jyada sexy hoti hai