Wednesday, June 23, 2010

आंधी

एक आंधी कुछ इस तरह से आती है
साथ अपने गर्द और राख लाती है
पीछे अपने अंधकार और मातम छोड़ जाती है
जिसने देखा वो थर्ऱा गया
जिसने सुना वो कांप गया
जो गया वो लौट कर न आया
जो बचा वो लौट कर जा न सका
उस मंज़र को शब्दों मे बयां कैसे करूं
उस रात को कलम से कैसे लिखूं
रोने की आवाज़े शोर में खो गईं
चीख पुकारे हवाओं मे उड गई
वो आंधी इस बार सब कुछ ले गई

3 comments:

anshuja said...

ummeed hai ye aandhi dobara na aaye...par kagaz par aapki kalam ke zariye is aandhi ne gaharaa asar choda hai...behad prabhaavshali rachna... badhai

Harish said...

bahut accha hai.badhai

पद्म सिंह said...

बेहतरीन रचना ...
क्या आपने अपनी वाणी, हमारी वाणी, या चिट्ठाजगत और इन्द्ली आदि एग्रीगेटर पर अपना ब्लॉग रजिस्टर नहीं किया है... बहुत अच्छा लेखन है आपका जारी रखें