Saturday, August 21, 2010

खुशी अपनो के साथ

खुशी अपनो के साथ

सुबोत ज़िन्दगी की रफतार से तेज़ चल रहा है ...वक्त से पहले सब कुछ हासिल करने की कोशिश..और इसमें ग़लत क्या है । दुनिया का ये दस्तुर है कि अगर आप वक्त के साथ और वक्त के आगे नहीं चलेंगे तो आप पीछे छूट जाएगें... कई लोग ये सोच कर संतुष्ठ हो जाते हैं कि भई हमने तो सब कुछ पा लिया ।हम तो अपने मुकाम पर पहुच गए..शायद यहीं से उनकी भूल होती है ..इसलिए आज जो, मैं जिस मुकाम पर पहुचां हूं। मुझे उससे आगे जाना है और अपनी कम्पनी को भी आगे लेकर जाना है .और आप सब जो काम कर रहे हैं उनको भी ... सुबोत ने जैसे ही अपनी बात खत्म की .वैसे ही सारा हॉल तालियों की आवाज़ से गूंज उठा कैमरे की रोशनी और रिपोर्टरों के सवाल ..सब एक साथ टूट पड़े ....

किसी पत्रकार ने पुछ ही लिया इतनी जल्दी इतना सबकुछ ..क्या कुछ छुटा नही, क्या कुछ रहे तो नहीं गया ...किसी का साथ किसी का प्यार... सुबोत मुस्कुरा दिया पर पहली बार उसकी मुस्कुराहट में चिता छलक रही थी ।

आज उसका न जाने क्यों मन जल्दी घर जाने के लिए करने लगा ..आज न जाने कितने बरसों बाद वो शाम को घर की तरफ जा रहा था ...उसे अपना शहर कितना बदला बदला दिख रहा था ...पंछी, चिडियां, बच्चपन और जवानी की यादें.. फिर किस तरह सुमन से मुलाकात हुई.. शादी फिर दो नन्हे फूल, मम्मी पापा और छोटी बहन किसी से भी उसने इतना वक्त हो गया बात तक नहीं की कोई कैसा उसे कुछ पता नहीं अपने आप में वो कितना व्यस्त हो गया की उसे कुछ और दिखा ही नहीं ..तभी रेड लाईट पर ब्रेक लगती और वो हकीकत में वापस आता है तो देखता है अपने परिवार के साथ लोग कितना खुश हैं बाप ने बच्चे को गोद में बैठा रखा है और उसे अपने हाथ से कुछ खिला रहा है ..पास मे बैठी पत्नी ने भी उसकी बांह पकड रखी है और पूरा परिवार कितना खुश लग रहा है..

सुबोत को जल्दी घर पर देखकर सुमन घबरा सी गई ... सुबोत मुस्कुराया और पुछा मम्मी पापा कहां है ..सुमन ने इशारे से कमरे को दिखाया मा बाप थोड़े परेशान हो गए..क्या हुआ जो आज इतनी जल्दी और हमारे पास उन सब की शक्ल देख कर सुबोत को हंसी आ गई और वो बोला spent time with family…भई..हा spent time with family ये भी सफलता का हिस्सा होना चाहिए ..सब ज़ोर से हंसते है..

आज न जाने कितने वक्त के बाद पूरा परिवार एक साथ था ...सब एक साथ खा रहे हंस रहे थे ..साथ में खुशियों को बांट रहे थे ..बच्चे भी सुबोत के पास जा कर किसी और के पास नहीं जा रहे ..सुबोत को लग रहा था कि उसने इस भाग दौड़ में कितना कुछ सच में मिस किया.. फिर रात हुई और सब लोग सोने चले गए सुबह जब सुबोत उठा तो उसमें नई उर्जा थी नई शक्ति ..और एक नया एहसास .जो उसके काम में भी फायदेमंद रहा....।

4 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

ajit gupta said...

जीवन में भौतिक उन्‍नति से कहीं ज्‍यादा मानसिक सुख की आवश्‍यकता रहती है। क्‍योंकि भौतिकता का कहीं अन्‍त नहीं है। इसलिए जिनके लिए हम सम्‍पत्ति एकत्र करते हैं यदि उनके साथ ही वक्‍त नहीं बिताया तो फिर सम्‍पत्ति का फायदा क्‍या? अच्‍छा प्रेरक प्रसंग।

sunshine said...

To make money is totaly different from to make life........
evry effort is for happiness....& ..happiness is with our dears......so
what u write is totaly....right/...& worthadmitting.....
gudone.

ankur said...

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