Saturday, November 13, 2010

बस ऐसे ही

बस ऐसे ही

क्या खबर कैसे मौसम बदलते रहे ।
धूप में हमको चलना था चलते रहे ।
शमा तो सिर्फ रातों में जलती रही ।
और हम हैं दिन रात जलते रहे ।।
( डॉ सागर आज़मी)

कली की आंख में,फूलों की गोद में आंसू
खुदा न दिखलाये ऐसी बहा की सूरत।।
तेरी तलाश में ये हाल हो गया मेरा ।
न दिन में चैन है, न शब में करार की सूरत।।

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