Tuesday, December 27, 2011

यादगार ऐ ग़ालिब

यादगार ऐ ग़ालिब के नाम से इस साल गालिब की हवेली को दिल्ली की विरासत के तौर पर पर्यटन राह की पर एक महत्वपूर्ण हवेली बनाने के उद्देश्य से हवेली में उल्लेखनीय परिवर्तन की तैयारी है-------मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्म दिन के मोके पर पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान की तंग ओर गलियों में रौनक आ गई---दिल्ली की मुख्यमंत्री ओर फ़िल्मी गीतकार गुलजार ने इस हवेली में जाकर ग़ालिब को याद किया ----- इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन के सोजन्य से प्रायोजित प्रदर्शनी और गालिब के जीवन ओर उनसे जुड़े पहलुओ को साउंड ट्रैक द्वारा प्रायोजित करने की योजना का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया ---- तीन दिनों तक मनाए जाने वाले जश्न यादगार ऐ ग़ालिब के दोरान मुश्यारा, गीत ओर नाटकों का आयोजन भी किया जायेगा ----यादगार ऐ ग़ालिब के नाम से इस साल गालिब की हवेली को दिल्ली की विरासत के तौर पर पर्यटन राह की पर एक महत्वपूर्ण हवेली बनाने के उद्देश्य से हवेली में उल्लेखनीय परिवर्तन की तैयारी है-------मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्म दिन के मोके पर पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान की तंग ओर गलियों में रौनक आ गई---दिल्ली की मुख्यमंत्री ओर फ़िल्मी गीतकार गुलजार ने इस हवेली में जाकर ग़ालिब को याद किया ----- इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन के सोजन्य से प्रायोजित प्रदर्शनी और गालिब के जीवन ओर उनसे जुड़े पहलुओ को साउंड ट्रैक द्वारा प्रायोजित करने की योजना का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया ---- तीन दिनों तक मनाए जाने वाले जश्न यादगार ऐ ग़ालिब के दोरान मुश्यारा, गीत ओर नाटकों का आयोजन भी किया जायेगा ----

Saturday, December 17, 2011

हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के मुसलमां है हम

शुक्रे खुदा करते हैं हम
सजदा-ए - हक़ अदा करते है हम
दिल में बसा है मादरे वतन
तुझसे मोहब्बत ए वतन करते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इस शोरो गुल के गुबार में
इन इधर उधर की पुकार में
इन रंगे हुए सियार में
तेरी सियासत समझते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के दिलो जिगर और जां है हम
तिरंगे की शान है हम
खुद क़ाबिज़ो मुखतार है हम
वतन की पहचान है हम
फिर सोचते है कुछ क्यों
बिन बुलाए मेहमां है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इज्ज़त अमन और रोज़गार
बस चंद अपने अरमां है
जितने हम में हैं
उतने ही तुम में है
इतेहापसंद कुछ यहां है
कुछ वहां हैं
हिन्द के मुसलमां है हम

इसकी मिट्टी में दफन है हम ही
इसकी ख़ाक से बने है हम ही
इसके गली कूचों मे चले हैं हम ही
अपने पुरखों की यहीं आशियां है
वासी यहां के हम हैं ये अपना मकां है
हिन्द के मुसलमां है हम ....

Sunday, December 11, 2011

जिन्दगी का रिश्ता

जिन्दगी का रिश्ता ..जिन्दगी से कुछ ऐसा हुआ की जिन्दगी को ही भुला दिया .ज़िन्दगी जो दायरों और मिनारों और चौखटों से कभी बाहर नहीं आई ..वो आज कूचों और मौहल्लों में सफर करती नज़र आ जाती है..। कुछ सोच कर करना कुछ मुनासिब तरीके से पेश करना शायद इसका शऊर ज़िन्दगी को कभी हुआ ही नहीं... जिन्दगी कितने लंबे ग्रंथ में कही जा सकती है या फिर कितने कम शब्दों में बयान की जा सकती है इसका एहसास एक जिन्दगी गुज़ारने के बाद ही होता है.पर हां ज़िन्दगी होती बड़ी दिलचस्प है ..क्योंकि एक जिन्दगी से कई ज़िन्दगियां जुड़ी होती हा और हर जुड़ी हुई ज़िन्दगी से कई और और ज़िन्दगिया... हर का तार एक दूसरे से .. दिलचस्प ये नहीं कि हर तार एक दूसरे तार से जुड़ा होता है दिलचस्प ये कि हर तार एक दूसरे से जु़ड़े नही रहना चाहता पर फिर भी जुड़ा रहता है .. जैसे पानी की वो धारा जो किनारे पर सिर्फ दम तोड़ने आती है ...पानी की मुख्य धारा से अलग हो कर मिट्टी को सीचने के लिए और फिर अपने साथियों से हमेशा हमेशा के लिए जुदा होकर फसाना बन हो जाती है ... धारा जिन्दगी नहीं बन सकती पर ज़िन्दगी को धारा की ज़रूरत हमेशा रहती है । क्योंकि ज़िन्दगी को हर वक्त कोई न कोई चाहिए जो उसे नम रखे ... ग़मगीन रखे..हां ग़म का रिश्ता ज़िन्दगी से जुड़ा ही रहता ..या फिर ग़म और ज़िन्दगी एक साथ चलने के लिए ही आते है ..उस महफिल में शिरकत करते है जहां उन जैसे या तो हाज़ारों मिल जायेगे या फिर उन जैसा कोई नहीं...
हम अपने जैसी जिन्दगी खोजने में भी माहिर है ..या ज़िन्दगी हमें हम जैसी दूसरी ज़िन्दगी से मिला ही देती है ...वो ज़िन्दगी जो हमारे साथ चलती है .और चलने का वादा करती है ..और ज़िन्दगी वादे निभाते और तोड़ते हुए आगे चल ही देती है ..।
हम कुछ भी करे ज़िन्दगी का रिशता बना ही रहता है ..एक ज़िन्दगी तक....

Saturday, December 10, 2011

कब कहां और कैसे

कब कहां और कैसे
काग़ज़ की एक कश्ती
पानी में कुछ यूं चली
लोगों ने कहा
क्या खूब बढ़ी..
फिर न जाने किस सैलाब में
बह गई
कब कहां और कैसे..
एक छोटा दीया था
कुटिया को रोशन किया करता था
अपनो के लिए जीया करता था
फिर न जाने किस तूफान में बुझ गया
कब कहा और कैसे
एक नन्हा बूटा था
अपने बगीचे में रहता था
खूब खुशबू देता था
सब को अच्छा लगता था
फिर न जाने किस आंधी मे टूट गया
कब कहा और कैसे
एक प्रेमी जोड़ा था
बहुत खुश रहता था
एक दूसरे के साथ चल था
फिर न जाने किस मोड़ पे मुड़ गया
कब कहा और कैसे...

Sunday, December 4, 2011

हम क्या करते हैं TAI

theatre artiste of india


थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया ... नाटक के क्षेत्र में पूर्ण संस्था है ..। यहां नाटक की हर शैली में कार्य होता है ..और रंगमंच की नई शैली को जन्म दिया जांता है ।यहां कलाकार का जन्म भी होता है और कलाकार बनाया भी जाता है।
रंगमंच को समाज का आईना कहते है ..इस समाज में क्या हो रहा है ,क्या होना चाहिए ..कौन क्या कर रहा किसे क्या करना चाहिए ये सब हम नाटक में प्रस्तुत करते हैं।
विशेषकर ऐसी सरकारी, समाजिक योजनाए और नीतियां जो आम लोगों के लिए आती हैं लेकिन उसकी जानकारी उन तक नहीं पहुच पाती ..इन्ही योजनाओ और कार्यक्रम को हम छोटे छोटे नाटक स्किट हास्य और मंनोरंजन की शैली में इस तरह पीरोते हैं कि जो भी देखे उसे हर बात समझ में आ जाए।
थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया के पास देश के प्रसिद्ध कलाकार, निर्देशक, लेखक की एक लंबी टीम है जो किसी भी विष्य को अच्छे सीधे सरल और मंनोरंजन के साथ बनाती है कि अधिक से अधिक सोचना और ज्ञान लोगों तक पहुचए।
जो बात आप न कहे सके न समझा सके ..वो आप हमे बताए ..आपकी बात लोगो तक हम नए अंदाज़ से पहुचाएगें
थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया ने अभी भारत के कृषि मंत्रालय के लिए तीन ऐसे नाटक पेश किये जिसकी चर्चा किसान अपने घरों में आज भी कर रहे हैं...
हम नाटक नहीं परिवार और समाज बनाने में यकीन करते हैं और मुखिया से लेकर सब से छोटे सदस्य तक को महत्व देने पर विश्वास रखते हैं। उम्मीद है आप का हमारा सफर जल्द शुरू होगा... और चलता ही रहेगा..।।

न जाने क्यों

न जाने क्यो हर बात एक बात से बढ़ जाती है
न जाने क्यों तेरी याद हर याद में बस जाती है
न जाने क्यों तेरी तस्वीर हर आंख में बन जाती है
न जाते क्यों तेरी मूर्त हर सूरत में दिख जाती है
न जाने क्यों तेरी आवाज़ हर नज़्म बन जाती है
न जाने क्यों हर जगह तुझ पर ही नज़र जाती है

IMAM HUSSAIN

Mahatma Gandhi
“My faith is that the progress of Islam does not depend on the use of sword by its believers, but the result of the supreme sacrifice of Hussain (A.S.), the great saint.”

Pandit Jawaharlal Nehru
“Imam Hussain’s (A.S.) sacrifice is for all groups and communities, an example of the path of rightousness.”
...
Rabindranath Tagore
“In order to keep alive justice and truth, instead of an army or weapons, success can be achieved by sacrificing lives, exactly what Imam Hussain (A.S.) did

Dr. Rajendra Prasad
“The sacrifice of Imam Hussain (A.S.) is not limited to one country, or nation, but it is the hereditary state of the brotherhood of all mankind.”

Dr. Radha Krishnan
“Though Imam Hussain (A.S.) gave his life almost 1300 years ago, but his indestructible soul rules the hearts of people even today.”

Swami Shankaracharya
“It is Hussain’s (A.S.) sacrifice that has kept Islam alive or else in this world there would be no one left to take Islam’s name.”

Mrs. Sarojini Naidu
“I congratulate Muslims that from among them, Hussain (A.S.), a great human being was born, who is reverted and honored totally by all communities"

Friday, December 2, 2011

कलयुग का श्रवण

कलयुग का श्रवण

एक युवक अपनी मां को कांवड़ में बिठाकर पिछले चौदह साल से पैदल तीर्थ यात्रा करा रहा है। कलयुग में इस श्रवण कुमार को देखकर लोग हैरान हैं और इसके संकल्प की सराहना भी कर रहे हैं। यह श्रवण कुमार हैं मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के कैलाश। बदरीनाथ धाम में दर्शन के बाद अब वे अपनी मां को लेकर केदारनाथ की यात्रा पर
निकले हैं

... अ॥धे माता-पिता को कांधे पर बैठा कर तीर्थ यात्रा पर ले जाने वाले श्रवण कुमार के बारे में सबने पढ़ा या सुना होगा। वह श्रवण कुमार त्रेता युग में था। अभी कलयुग चल रहा है और इस दौर में किसी श्रवण कुमार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन जबलपुर के कैलाश गिरी को जो भी देखता है श्रवण कुमार कहने लगता है। कैलाश अपनी अंधी और बूढ़ी मां को चार धाम यात्रा पर लेकर आए हैं वह भी पैदल। कैलाश पिछले चौदह साल से अपनी मां को कांधे पर बैठाकर तीर्थ यात्रा करा रहे हैं। वह अब तक रामेश्वरम, जगन्नाथ तथा बदरीनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पवित्र धाम बदरीनाथ में भी कलयुग का यह श्रवण कड़कड़ाती ठंड एवं बारिश में ही कंधों के सहारे अपनी मां को यहां तक लाया। कैलाश के इस संकल्प की सब तरफ सराहना हो रही है। वे जहां से गुजरते हैं उन्हें देखने वालों का तांता लग जाता है।

कैलाश की इस अनोखी मिसाल को देखते हुए १९ मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर मंदिर समिति ने श्रवण की मां को प्रथम वरीयता के आधार पर मंदिर में दर्शन करवाने की व्यवस्था की थी। दोनों मां बेटे जहां भी जाते हैं लोग पहले से ही उन्हें देखने वहां पहुंच जाते हैं। कई स्थानों पर तो लोग इनकी हाथ जोड़कर पूजा भी कर रहे हैं। बदरीनाथ में दर्शन के बाद अब ये केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं। यहां बताते चलें कि केदारनाथ धाम गौरीकुण्ड से १४ किमी की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए १४ किमी का जोखिम भरा सफर भी पैदल ही तय करना पड़ता है। पर श्रवण के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। उसके जुनून में न तो कोई कमी है और न ही चिंता। कलयुग का यह श्रवण धार्मिक यात्रा के इस सफर में न तो किसी से ज्यादा बात करता है और ना ही किसी से कुछ मदद की गुहार ही करता है!

Pre-Islamic Arabic Poetry Talks About Vedas

Pre-Islamic Arabic Poetry Talks About Vedas
Amit Dua

Arabic is known as an Islamic language. But you know about pre-Islamic Arabic poetry. Pre-Islamic Arabic poetry clearly talks about Vedas. Here is poetry by an ancient Arabic poetry by Labi-Bin-E- Akhtab-Bin-E-Turfa with English Translation (Poetry in red, translation in bold black): [Taken from "Vedic History of Pre-Islamic Mecca" by Shrimati Aditi Chaturvedi]
"Aya muwarekal araj yushaiya noha minar HIND-e Wa aradakallaha
manyonaifail jikaratun"

"Oh the divine land of HIND (India) (how) very blessed art thou!
Because thou art the chosen of God blessed with knowledge"


"Wahalatijali Yatun ainana sahabi akha-atun jikra Wahajayhi
yonajjalur -rasu minal HINDATUN "

"That celestial knowledge which like four lighthouses shone in such
brilliance - through the (utterances of) Indian sages in fourfold
abundance."

"Yakuloonallaha ya ahal araf alameen kullahum Fattabe-u jikaratul
VEDA bukkun malam yonajjaylatun"

"God enjoins on all humans, follow with hands down The path the
Vedas with his divine precept lay down."

"Wahowa alamus SAMA wal YAJUR minallahay Tanajeelan Fa-enoma
ya akhigo mutiabay-an Yobassheriyona jatun"

"Bursting with (Divine) knowledge are SAM &YAJUR bestowed on
creation, Hence brothers respect and follow the Vedas, guides to
salvation"

"Wa-isa nain huma RIG ATHAR nasayhin Ka-a-Khuwatun Wa asant
Ala-udan wabowa masha -e-ratun"

"Two others, the Rig and Athar teach us fraternity, Sheltering under
their lustre dispels darkness till eternity"
This poem was written by Labi-Bin-E- Akhtab-Bin-E-Turfa who lived
in Arabia around 1850 B.C. That was 2300 years before
Mohammed!!! This verse can be found in Sair- Ul- Okul which is an
anthology of ancient Arabic poetry. It was compiled in 1742 AD under
order of the Turkish Sultan Salim.

Tuesday, November 29, 2011

theatre artiste of india

theatre artiste of india
(ACT THAT IMPACT)

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया एक प्रयास है देश के सारे रंगकर्मियो को एक छत के नीचे लाने का ..जैसा कि हमे पता है कि रंगमंच कितना फैला हुआ है कोई न कोई कहीं न कहीं कुछ न कुछ रंगमंच से जुडा कर ही रहा होता है लेकिन उसकी खबर सिर्फ उसे या फिर उससे जुड़े कुछ लोगों को ही होती है ।

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया में तकरीबन हर रंग कर्मियों की गतिविधियों की जानकारी रखी जायेगी और दूसरे सहयोगियों और साथियों को बांटी जायेगी .. नेट और मोबाइल के ज़रिये ।हर राज्य में थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि मौजूद होगें जो वहां के रंगकर्मियों के हाल और कार्यक्रम के बारे में थियेटर आर्टिस्ट के पोर्टल में सूचित करते रहेगें..।

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया सरकारी टेंडर, सरकारी योजना, सरकारी कार्यक्रम की जानकारी और उसमें भागेदारी के साथ काग़ज़ी कार्यवाही के बारे में भी अपने रजिस्टर सहयोगियों को सूचित करता रहे गा ।

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया को ये मालुम है कोई भी रंगकर्मी रंगमंच रोटी रोज़ी के लिए छोड़ता है इस लिए हम पहली बार इस उद्देश्य के साथ आ रहे हैं कि हर रंगमंच के साथी को उचित मुल्य पर सही कार्य प्राप्त हो ..इसके लिए हमारे पास हर रोज़ विभिन्न जगहों में स्किट, नुक़्कड़ नाटक पेंटामाइंन, माइन, मोनो एक्टिंग, एकांकी जैसी कई कार्यक्रम कराने का प्रावधान है । अभिनय से जुड़े कलाकारो के लिए जहां स्पॉट ,सिनेमा, एड, और टीवी के आडिशन की जानकारी भी लगातार दी जायेगी वहीं बैक स्टेज से जुड़े लोगों को भी उन से जुड़े काम के बारे में समय समय पर सूचित किया जायेगा।

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया स्कूलों ,कॉपरेट जगत के वार्षिक कार्यक्रम में प्रस्तुतियों ,या फिर उनके छात्र, कर्मचारियों के लिए नाटक का आयोजन एंव निर्देशन और राजनिति पार्टियो और सरकारी नीतियो के कार्य कि भी जानकारी रखता है और अपने सहयोगियों को निरंतर सूचित करता रहे गा ।
देश और विदेशों में आयोजित रंगमंच उत्सवों की जानकारी और उनमें प्रवेश के प्रवाधान के साथ काग़ज़ी कार्यवाई के बारे में भी जनकारी थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया से जु़ड़े साथियों को देता रहेगा..

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया उभरते लेखको कलाकारों और निर्देशकों को भी मंच देता है जहा वो अपना स्वंय लिखित नाटक दे सकते है जिसे थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया में मंचन करने का मौका मिले गा । रंगमंच से जुडे मुद्दों पर वाद विवाद और सेमिनार का आयोजन भी थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया निरंतर करता रहे गा ।

रंगमंच से जुड़े अपने साथियों की आर्थिक और शाररिक परेशानी के समाधान के लिए भी कार्यव्रत है ..जिसे वो अपने दूसरे साथियों के साथ मिलकर और सरकारी और निजि क्षेत्र से मदद लेकर उन रंग कर्मीयो तक पहुचाएगा जिनको इसकी ज़रूरत है । सरकारी अस्पताल में रंगकर्मी का मुफत इलाज और 55 साल से ऊपर रंगकर्मी के लिए पेशन को देने का भी प्रावधान है ।

थियेटर आर्टिस्ट ऑफ इंडिया के पास रंगमंच से जुड़े हर क्षेत्र और देश के हर राज्य में मौजूद सहयोगी है जो देश के रंगमंच ,रंगकर्मियों को हर तरह से सहयोग और उनकी प्रतिभा को सही मंच और सही दिशा दिखाने में सक्षम है औऱ निरंतर प्रयास करते रहेगे।.......

Monday, November 28, 2011

इमाम हुसैन एंड hindu

Brahmins Fought for Imam Hussain in the Battle of Karbala

by Rakesh Sharma

Hindus have a long association with Iraq and Muslims. Please read the article below:

The presence in Arabia of many Hindus. mostly Brahmins. before the rise of Islam, has been recorded by the historian Sisir Kumar Mitra, in his book ‘The Vision of India’. page 183. These people observed Hindu religious customs, including the worship of Shiva and Makresha from which the name of Mecca is said to have been derived. The famous astrologer Yavanacharya was born of one such Brahmin family. It was from these Brahmins that the Arabs learnt the science of Mathematics, Astrology, Algebra and decimal notation which were first developed in India.

At the time of the war of Karbala (Oct. 680 AD). Rahab Sidh Datt, a potentate of Datt sect, was a highly esteemed figure of Arabia due to his close relations with the family of Prophet Mohammed. In the holy war when no Muslim King came to help Hussain. Rahab fought On his side mld sacrificed his seven sons (named Sahas Rai. Haras Rai, Sher Khan, Rai Pun, Ram Singh, Dharoo and Poroo) in the bloody war.

A Brief Account of the Episode: After the death of Mohammed, he was succeeded by Abu Bakr, Omar and Osman, as the Caliphs: all three were related to him by marriage alliances. Osman was not popular and was assassinated. After his death, Hazrat AlL the son-in-law of Mohammed (he was also his first cousin) who was married to the Prophet’s third daughter and the only surviving issue, Bibi Fatima Zahira, became the 4th Caliph. There was stiff opposition to Ali’s rule from Amir Moavia, a known protege of Osman. He fought with him a bitter war for 5 years and finally got him murdered in a mosque of Koofa, his mausoleum with a golden dome, stands in the nearby town of Najaf (Iraq). After the extermination of Ali, Moavia grabbed the Caliphate and converted the Islamic state into a kingdom, After his death, his notorious son Yazid became the next ruler. However, the rightful claimants of the Caliphate were the descendants of Hazrat Ali, namely, Hassan and Hussain. While Hassan abdicated his claim to the crown and later died of suspected poisoning, his younger brother Imam Hussain who was till then leading a secluded life in Medina, came out and challenged the usurper, Yazid. It was the war of attrition between the two which led to the bloodshed of Karbala (102 km south of Baghdad), on Oct. 10, 680 AD.

The participation of the Mohyals Brahmins and more precisely that of a Dutt family living in Arabia at that time, in the holy war, is a fact of the history. They were a part of the entourage of 200 men and women, including 72 members of Hussain’s family (40 on foot and 32 on horseback), when he left Medina and made an arduous trek to Karbala, where he had a large friendly following. After 18 days, i.e. on the 2nd. day of Mohurrum, the Hussain’s caravan reached Karbala, on the bank of river Euphrates and surrounded by a hostile desert. On the 7th day of Mohurrum, all hell broke out when 30,000 strong army sent by Yazid from Mecca and other places, attacked them. 6,000 soldiers guarded the river bank to ensure that not a drop of water reached the Hussain’s thirsty innocents. By sunset of 10th (Ashoor), a Friday, all were dead including his step brother Abbas (32), his son Ali Akbar (22), daughter Skeena (4) and 6 months old infant Ali Asghar who was killed by an arrow while perched in his lap. Imam Hussain himself was slain with thirty three strokes of lances and swords by Shimr, the hatchet man of ignominious Yazid. The ruffians of Yazid, as they ran carrying the smitten head of Hussain to the castle of Koofa, were chased by Rahab. He retrieved the holy man’s head, washed it reverentially and then carried it to Damascus. According to legend, he was overtaken by Yazid’s men during his ovenight shelter on the way. They demanded Hussain’s head from him: Rahab executed the head of one of his sons and offered to them. They shouted that it was not the Hussain’s head, then he beheaded his second son and they again yelled that it was not his. In this way Rahab executed the heads of his seven sons but did not part with the head of Imam Hussain. Later, after one year, it was buried in Karbala along with rest of his body.

The intrepid Datts rallied round Amir Mukhtar, the chief of the partisans of Imam Hussain, fought with extraordinary heroism and captured and razed the fort of Koofa, seat of Yazid’s governor, Obaidullah, the Butcher. After scoring a resounding victory on the battlefield, they beat the drums and yelled out that they had avenged the innocent blood of Hussain shed at Karbala.

It is also significant to note that even before the Karbala incident, Hazrat Ali had entrusted the public exchequer to the regiment of the valiant Datts, at the time of the Battle of Camels fought near Basra.

The above provides an impeccable evidence about tha pragmatic role played by the Datt Mohyals in the catastrophe of Karbala. There are more than a dozen ballads composed centuries ago which vividly and with great passion describe the scenario of the historic event.

Interestingly, in the Preface of his famous historical novel, titled Karbala, published in 1924 from Lucknow, Munshi Prem Chand has stated that the Hindus who fought and sacrificed their lives in the holy war of Karbala, are believed to be the descendants of Ashvathama.This clearly establishes their link with the Datts who consider Ashvathama as an ancestor of their clan.

Later on, when Sunnis let loose an orgy of vendetta on Shias and Datts, Datts returned to their motherland around 700 AD and settled at Dina Nagar, District Sialkot (vide Bandobast Report of Gujarat by Mirza Azam Beg page 422 and folk songs) and some drifted to as far as the holy Pushkar in Rajasthan. Starting from Harya Bandar (modern Basra on the bank of river Tigris) with swords in hand and beating durms, they forced their way through Syria and Asia Minor and marching onwards captured Ghazni, Balkh and Bukhara. After annexing Kandhar, they converged on Sind and crossing the Sind at Attock they entered the Punjab.

An ancestor of Rahab named Sidh Viyog Datt assumed the title of Sultan and made Arabia (old name Iraq) his home. He was a tough and tenacious fighter. He was also known as Mir Sidhani. He was a worshipper of Brahma. He was the son of the stalwart Sidh Jhoja (Vaj) who was a savant and saint and lived in Arabia (Iraq) around 600 AD.

The supporters of Hassan and Hussain honoured the Datts with the htle of ‘Hussaini Brahmin’ and treated them with great reverence in grateful recognition of the supreme sacrifices made by them in the war of Karbala. According to Jang Nama, written by Ahmed Punjabi, pages 175-176, it was ordained on the Shias to recite the name of Rahab in their daily prayer. At the time to the Karbala, fourteen hundred Hussaini Brahmins lived in Baghdad alone

Sunday, November 27, 2011

किसी ने कहा

व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम की तुलना कृषक द्वारा किए जाने वाले कृषि कर्म से की जा सकती है । जैसे जुताई, बुआई, सिंचाई और विक्रय की चतुर्विधि प्रक्रिया सम्पन्न करने के बाद किसान को अपने परिश्रम का लाभ मिलता है, व्यक्तित्व निर्माण को भी इस प्रकार जीवन साधना की चतुर्विधी प्रक्रिया सम्पन्न करनी पड़ती है, यह है आत्म-चिंतन, आत्म-सुधार, आत्म-निर्माण और आत्म-विकास । मनन और चिंतन को इन चारों चरणों का अविच्छिन्न अंग माना गया है । इन चतुर्विधि साधनों को एक-एक करके नहीं, समन्वित रूप से ही अपनाया जाना चाहिए ।

आत्म-चितंन अर्थात्‌ जीवन विकास में बाधक अवांछनीयताओं को ढूँढ़ निकालना । इसके लिए आत्म समीक्षा करनी पड़ती है । जिस प्रकार प्रयोगशालाओं मे पदार्थों का विश्लेषण, वर्गीकरण होता है और देखा जाता है कि इस संरचना में कौन-कौन से तत्व मिले हुए हैं । रोगी की स्थिति जानने के लिए उसके मल, मूत्र, ताप, रक्त, धड़कन आदि की जाँच-पड़ताल की जाती है और निदान करने के बाद ही सही उपचार बन पड़ता है । आत्म-चितंन, आत्म-समीक्षा का भी यह क्रम है ।
इसके लिये अपने आप से प्रश्न पूछने और उनके सही उत्तर ढूँढ़ने की चेष्टा की जानी चाहिए । हम जिन दुष्प्रवृतियों के लिए दूसरों की निन्दा करते हैं उनमें से कोई अपने स्वभाव में तो सम्मिलित नहीं है । जिन बातों के कारण हम दूसरों से घृणा करते हैं, वे बातें अपने में तो नहीं हैं ? जैसा व्यवहार हम दूसरों से अपने लिए नहीं चाहते है, वैसा व्यवहार हम ही दूसरों के साथ तो नहीं करते ? जैसे उपदेश हम आये दिन दूसरों को करते हैं, उनके अनुरूप हमारा आचरण है भी अथवा नहीं ? जैसी प्रशंसा और प्रतिष्ठा हम चाहते हैं, वैसी विशेषताएँ हममें हैं या नहीं ? इस तरह का सूक्ष्म आत्म-निरीक्षण स्वयं व्यक्ति को करना चाहिए और अपनी कमियों को ढूँढ़ निकालना चाहिए ।

आत्म-सुधार, अर्थात्‌ कुसंस्‍कारों को परास्त करना । अपने स्वभाव में सम्मिलित दुष्प्रवृत्तियाँ अभ्यास होने के कारण कुसंस्‍कार बन जाती हैं और व्यवहार में उभर-उभर कर आने लगती हैं । आत्म-सुधार प्रक्रिया के अन्तर्गत इसके लिए अभ्यास और विचार-संघर्ष के दो मोर्चे तैयार करने चाहिए । अभ्यस्त कुसंस्‍कारों की आदत तोड़ने के लिए बाह्य क्रिया-कलापों पर नियंत्रण और उनकी जड़ें उखाड़ने के लिए विचार-संघर्ष की पृष्ठभूमि बनानी चाहिए । बुरी आदतें भूतकाल में किया गया अभ्यास ही हैं इस अभ्यास को अभ्यास बना कर तोड़ा जाए और कुसंस्‍कार सुसंस्कार निर्माण द्वारा नष्ट किये जायें । जैसे थल सेना से थल सेना ही लड़ती है और नभ सेना से लड़ने के लिए नभ सेना ही भेजी जाती है ।

जो भी बुरी आदतें जब उभरें उसी से संघर्ष किया जाए । बुरी आदतें जब उभरने के लिए मचल रहीं हों तो उनके स्थान पर उचित सत्कर्म ही करने का आग्रह खड़ा किया जाए और मनोबलपूर्वक अनुचित को दबाने तथा उचित को अपनाने का साहस किया जाय । मनोबल यदि दुर्बल होगा तो ही हारना पड़ेगा अन्यथा सत्साहस जुटा लेने पर तो श्रेष्ठ की स्थापना में सफलता ही मिलती है। इसके लिए छोटी बुरी आदतों से लड़ाई आरम्भ करनी चाहिए । उन्हें जब हरा दिया जायेगा तो अधिक पुरानी और अधिक बड़ी दुष्प्रवृत्तियों को परास्त करने योग्य मनोबल भी जुटने लगेगा।

आत्म-निर्माण अर्थात्‌ जो सत्प्रवृतियाँ अभी अपने स्वभाव में नहीं हैं उनका योजनाबद्ध विकास करना । दुर्गणों को निरस्त कर दिया गया, उचित ही है पर व्यक्तित्व को उज्ज्वल बनाने के लिए, आत्म-विकास की अगली सीढ़ी चढ़ने के लिये सद्‌गुणों की सम्पदा एकत्रित करना भी अत्यन्त आवश्यक है। बर्तन का छेद बन्द कर देना काफी नहीं है, जिस उद्देश्‍य के लिये बर्तन खरीदा गया है वह भी तो पूरा करना चाहिये । खेत में से कँटीली झाड़ियाँ, पुरानी फसल की सूखी जड़ें उखाड़ दी गई, पर इसी से तो खेती का उद्देश्‍य पूरा नहीं हो गया, यह कार्य तो अधूरा है । शेष आधी बात जब बनेगी तब उस भूमि पर सुरम्य उद्यान लगाया जाय और उसे पाल-पोसकर बड़ा किया जाए ।
अपने व्यक्तित्व का विकास उत्कृष्ठ चिन्तन और आदर्श कर्तव्य अपनाये रहने पर ही निर्भर है । उस साधना में चंचल मन और अस्थिर बुद्धि से काम नहीं चलता, इसमें तो संकल्पनिष्ठ, धैर्यवान और सतत प्रयत्नशील रहने वाले व्यक्ति ही सफल हो सकते है । अपना लक्ष्य यदि आदर्श मनुष्य बनना है तो इसके लिए व्यक्तित्व में आदर्श गुणों और उत्कृष्ट विशेषताओं का अभिवर्धन करना ही पड़ेगा ।
आत्म-विकास अर्थात्‌ अपने आत्म-भाव की परिधि को अधिकाधिक विस्तृत क्षेत्र में विकसित करते रहना । यदि हम अपनी स्थिति को देखें तो प्रतीत होगा कि शरीर और परिवार का उचित निर्वाह करते हुए भी हमारे पास पर्याप्त समय और श्रम बचा रहता है कि उससे परमार्थ प्रयोजनों की भूमिका निबाही जाती रह सके । आत्मीयता का विस्तार किया जाय तो सभी कोई अपने शरीर और कुटुम्बियों की तरह अपनेपन की भाव श्रृंखला में बँध जाते हैं और सबका दुःख अपना दुःख तथा सबका सुख अपना सुख लगने लगता है । जो व्यवहार, सहयोग हम दूसरों से अपने लिए पाने की आकांक्षा करते हैं, फिर उसे दूसरों के लिए देने की भावना भी उमगने लगती है, लोक-मंगल और जन-कल्याण की, सेवा साधना की इच्छाएँ जगती हैं तथा उसकी योजनाएँ बनने लगती हैं । इस स्थिति में पहुँचा ,व्यक्ति सीमित न रहकर असीम बन जाता है और उसका कार्य क्षेत्र भी व्यापक परिधि में सत्प्रवृत्तियों का सम्वर्धक बन जाता है ।
संसार के इतिहास में जिन महामानवों का उज्ज्वल चरित्र जगमगा रहा है, वे आत्म-विकास के इसी मार्ग का अवलम्बन लेते हुए महानता के उच्च शिखर तक पहुँच सके हैं । चारों दिशाओं की तरह आत्मिक उत्कर्ष के चार आधार यही हैं ।

Monday, November 7, 2011

हिन्दू इन पाकिस्तान

I am really shocked to hear the horrible incident that On Holy Occasion of Eid Ul Azza that 03 Doctors have been Murdered and one is seriously injured in Chak. This is matter of very painful for all Hindu brothers who are living in Pakistan, this was announced in Breaking news on GEO TV & KTN Tv. Islam is religion of peace,Hazarat Mohammad had given message of peace, but some Extremist are Misuse ...on the name of Religion killing man, In the morning 04 Muslim brothers were killed in Pakhtunistan by societ Bomb on happy occasion of Eid, That message goes very bad in world that what is happening with minority in Pakistan. We must Urge and Emphasize and condemned so such incident may not happened in future. In the eyes of European Pakistan is very dangerous country. 500 families from Jackabad,Kashmore and kandhkot had migrated to India last month. This is a matter of shame. you all must condemned such incident, Hindus may not afraid because Muslims are killed in Mosques by societ Bomb attack, we have to save our sovereign country.
and show that we are very peaceful citizen. We must see our status and improve Image of Pakistan in the world.

Sunday, November 6, 2011

बाड़मेर

बाड़मेर के बहुचर्चित ए एन एम यौन शोषण एवं अश्लील सी डी बनाने के मामले के आरोपी प्रकाश दर्जी को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद उसकी जेल में ही जबरदस्त पिटाई हुई और उसका नाक काटने का प्रयास हुआ हैं ! घटना के बाद जेल में सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं !
बाड़मेर के बहु चर्चित नर्स योंन शोषण और असलील सी दी प्रकरण के मुख्य आरोपी को आज जेल में प्रवेश करते ही कैदियों के समूह ने जान लेवा हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया कैदियों ने उसका नाक काटने का प्रयास किया जिसके चलते चार टाँके भी आये उसे बदहवास तथा बेहोशी की हालत में राजकीय अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया हें ,जब बाड़मेर हॉस्पिटलमें प्रकाश दरजी को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया जन्हा उसे इमरजेंसी वार्ड में उपचार के लिए भर्ती किया गया

Saturday, November 5, 2011

प्रधानता वातावरण की

प्रधानता वातावरण की

प्रतिभाएँ वातावरण विनिर्मित भी करती हैं, पर उनकी संख्या थोड़ी सी ही होती है । हीरे जहाँ-तहाँ कभी-कभी ही निकलते हैं, पर काँच के नगीने ढेरों कारखाने में नित्य ढलते रहते हैं । अधिकांश लोग ऐसे होते हैं जो वातावरण के दबाब से भले या बुरे ढाँचे में ढलते हैं । सत्संग, कुसंग का प्रभाव इसी को कहते हैं । ऐसे लोग अपवाद ही हैं जो बुरे लोगों के सम्पर्क में रह कर भी अपनी गरिमा बनाये रहते हैं, साथ ही अपने प्रभाव से क्षुद्रों को महान बनाने, बिगड़ों को सुधारने में समर्थ होते हैं । प्रधानता वातावरण की है । सामान्यजन प्रवाह के साथ बहते और हवा के रुख पर उड़ते देखे जाते हैं । पारस के उदाहरण कम ही मिलते है । सूरज चाँद जैसी आभा किन्हीं बिरलों में ही होती है, जो अँधेरे में उजाला कर सकें ।
आत्मोत्कर्ष का लक्ष्य लेकर चलने वालों को तो विशेष रूप से इस आवश्यकता को अनुभव करना चाहिए । उसे जुटाने के लिए प्रयत्नशील भी रहना चाहिए । इसके दो उपाय हैं । एक यह कि जहाँ इस प्रकार का वातावरण हो, वहाँ जाकर रहा जाय । दूसरा यह कि जहाँ अपना निवास है, वहीं प्रयत्नपूर्वक वैसी स्थिति उत्पन्न की जाय । कम से कम इतना तो हो ही सकता है कि अपने निज के लिए कुछ समय के लिए वैसी स्थिति उत्पन्न कर ली जाए जिनके आधार पर अच्छे वातावरण का लाभ उठाया जा सके । एकान्त, स्वाघ्याय, मनन, चिन्तन ऐसे ही आधार हैं

Sunday, October 30, 2011

हरियाणा रोडवेज व प्राइवेट बस

हरियाणा रोडवेज व प्राइवेट बस में आमने सामने की टक्करमें आज कैथल के हिसार - चंडीगड़ हाई वे पर डेरा सच्चा सोद्दा के नजदीक करीब दोनों बसों के ४० यात्री घयल हो गए है , बस में सवार यात्रियों का कहना है की दुर्घटना प्राइवेट बस चालक द्वारा एक अन्य वाहन को overtake करने के कारण हुई है , जिसमे सामने से आ रही रोडवेज की बस प्राइवेट बस से जा टकराई ! आसपास के लोगो ने तुरंत घायलों को कैथल के सरकारी हस्पताल पहुँचाने में मद्दद की !

कैथल में आज डेरा सच्चा सोद्दा के नजदीक हिसार - चंडीगड़ हाई वे पर हरियाणा रोडवेज व प्राइवेट बस में आमने सामने की टक्करहो गयी जिसमे दोनों बसों में सवार करीब ४० यात्रियों को चोटें आई है , जिनमे ८ लोगो को गंभीर चोटें आई है , इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है , बस में सवार यात्रियों का कहना है की दुर्घटना प्राइवेट बस चालक द्वारा एक अन्य वाहन को overtake करने के कारण हुई है , जिसमे सामने से आ रही रोडवेज की बस प्राइवेट बस से जा टकराई !

Saturday, October 29, 2011

शिया मुस्लिम

150201980..


Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
Shia Islam
hia Islam is the second largest denomination of Islam, after Sunni Islam. The
followers of Shia Islam are called Shi'ites or Shias. "Shia" is the short form of
the historic phrase Sh?’atu Al?, meaning "followers of Ali", "faction of Ali", or
"party of Ali"
Similar to other schools of thought in Islam, Shia Islam is based on the teachings
of the Islamic holy book, the Qur?n and the message of the final prophet of Islam,
Muhammad. In contrast to other schools of thought, Shia Islam holds that
Muhammad's family, the Ahl al-Bayt ("the People of the House"), and certain
individuals among his descendants, who are known as Imams, have special spiritual
and political authority over the community. Shia Muslims further believe that Ali,
Muhammad's cousin and son-in-law, was the first of these Imams and was
the rightful successor to Muhammad and thus reject the legitimacy of the first
three caliphs.
Shias regard Ali as the second most important figure after Prophet Muhammad.
According to them, Muhammad suggested on various occasions during his lifetime
that Ali should be the leader of Muslims after his demise. According to this view,
Ali as the successor of Muhammad not only ruled over the community in justice,
but also interpreted the Sharia Law and its esoteric meaning. Hence he was
regarded as being free from error and sin (infallible), and appointed by God by
divine decree (Nass) to be the first Imam. Ali is known as "perfect man" (al-insan
al-kamil) similar to Muhammad according to Shia viewpoint. As a result, Shias use
Hadiths attributed to Muhammad and Im?ms, and credited to the Prophet's family
and close associates, in contrast to the Sunni traditions where the sunnah is largely
narrated by companions. Subsequently, the hadith contrasts between the Shias
and Sunnis are one of the main reasons for friction between them, as Sunnis do
not accept Shia hadith and vice versa.
Shia Muslims in India
hia Muslims are a large minority among India's Muslims. However, there has
been no particular census conducted in India with regards to sects, but Indian
sources like Times of India and DNA reported Indian Shiite population in
mid 2005-2006 between 25% to 31% of entire Muslim population of India which
accounts them in numbers between 40,000,000 to 50,000,000 of 157,000,000
Indian Muslim population. However, as per an estimation of one reputed Shiite
NGO Alimaan Trust, India's Shia population in early 2000 was around 30 million
with Sayyids comprising just over half of the entire Shia population. According to
some national and international sources Indian Shia population is the world's
second-largest after Iran Shiite population was also acclaimed publicly as second
S
S
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
largest by the 14th Indian Prime Minister Dr. Manmohan Singh quoted in the year
2005. One of the lingering problems in estimating the Shia population is that
unless the Shia form a significant minority in a Muslim country, the entire
population is often listed as Sunni. For example, the 1926 rise of the House of
Saud in Arabia brought official discrimination against Shias. The Shia-majority
areas of Al-Hasa, Qatif and Hofuf on the Persian Gulf, Western Arabia provinces
of Jizan, Asir, and Hejaz that had large Shia minorities have officially been
completely stripped off their religious identities.[16] Shiites are estimated to be 21-35
percent of the Muslim population in South Asia, although the total number is
difficult to estimate due to the intermingling between the Muslim Sects and
practice of taqiyya by Shiites.
However, some external sources like the Pew Research Center figure them
between 10 to 14 percent giving the numbers between 16,000,000 to 24,000,000.
However, the Pew Research Center report is not considered authentic by
many Shiites and also national and International reports after taking into
consideration the report released by Britannica Book of the year in 1997 which put
the estimates of Shiite population in India in 1996 over 26,000,000 out of entire
Indian Muslim population of 103,000,000 at that time.
There are many big and small towns and villages with majority Shiite Muslim
population in India. Many Sayyids between 12th to 16th century migrated to
the Indian subcontinent to escape the persecution of Shiasin
mostly Sunni ruled Middle East. Prominent places in India with majority or
considerable Shiite Muslim population are Kargil, Delhi, Mumbai, Hyderabad,
Barabanki, Lucknow, Hallaur, Sadaat Amroha and Naugawan Sadat. Shias in
Hallaur, Sadaat Amroha and Naugawan Sadat are majority Sayyids. Among
theShias of India an overwhelming majority belongs to the Ithna Ashari (Twelver)
division, while the Shias among the Khoja and Bohra communities
are Ismaili. Dawoodi Bohras are primarily based in India, even though
the Dawoodi theology originated in Yemen. India is home to the
majority Dawoodi Bohra population most of them concentrated in Gujarat out of
over 1 million followers worldwide
History
here is no certainty as to when the Shia community first established itself in
India. As per historical evidences and the genealogy maintained by
the Sayyids who migrated to India from Middle East the history of Shia
Islam traces long back around 1000 years. The rulers of various dynasties
of India and also in the 11th century the rulers of Multan and Sindh which are now
part of Pakistan were adherents of Shia Islam. The Nawabs of Awadh and Hyder
Ali & Tipu Sultan of Mysore, who were rulers in India, were also Shia Muslims.
T
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
Shia culture and belief has left its influence all over India with Imam al Husain ibn
Ali becoming the revered personality in India not only for the Shias but also from
non-Muslim communities, especially the Hindus of northern India who participate
in ceremonies commemorating Husain ibn Ali's martyrdom on the day of Ashura.
Shaykh al-Mufid writes that before the Battle of Karbala, Husain ibn Ali and the
commander of the enemy forces, Umar ibn Saad, met at night and talked together
for a long time. After that meeting Umar ibn Saad sent a letter to the Governor
of Kufa, Ubayd-Allah ibn Ziyad in which he wrote that Husain ibn Ali has
suggested that he go to ‘one of the border outposts’ of the rapidly
expanding Muslim empire as a way of resolving conflict.[28] Other traditions name
that border outpost as Al Hind or India. Even though Husain ibn Ali himself was
not able to go toIndia, some of the Shia did emigrate there for various reasons,
including those who came as refugees from Umayyads and Abbasid
spersecution These refugees brought with them rituals which kept alive
the remembrance of Karbala and their Shia Identity.
Its narrated by Abd al Razzaq al Muqarram in his work of Maqtal al-Husayn that
prior to his martyrdom, Al Abbas ibn Ali while asking water
for Mohammad's family from the Yazid's army expressed his desire to go
either Rome or to India. This made some people wept in the army of Yazid.
It has been believed that in 7th century few ladies from the household of
Prophet Mohammad after Battle of Karbala came in Punjab province
of India which after the partition of 1947 became a part of Pakistan. One of the
prominent of them was Ruqayyah bint Ali, the daughter of Ali bin Abi
Talib through his wife Ummul Banin, Ruqayyah bint Ali was the sister of Abbas
ibn Ali and wife of Muslim ibn Aqeel. Still her shrine inLahore, Punjab of Pakistan,
is visited by people all around and she is referred as Bibi Pak Daman.
Persecution
hiites in India faced persecution by some Sunni rulers and Mughal
Emperors which resulted in the martyrdom of Indian Shia scholars likeQazi
Nurullah Shustari (also known as Shaheed-e-Thaalis, the third Martyr)
and Mirza Muhammad Kamil Dehlavi (also known as Shaheed-e- Rabay, the fourth
Martyr) who are two of the five martyrs of Shia Islam.
Shias also faced persecution in India in Kashmir for centuries, by the Sunni
invaders of the region which resulted in massacre of many Shias and as a result
most of them had to flee the region.[32] Shias in Kashmir in subsequent years had to
pass through the most atrocious period of their history. Plunder, loot and
massacres which came to be known as ‘Taarajs’ virtually devastated the
S
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
community. History records 10 such Taarajs also known as ‘Taraj-e-Shia’ between
15th to 19th century in 1548, 1585, 1635, 1686, 1719, 1741, 1762, 1801, 1830, 1872
during which the Shia habitations were plundered, people slaughtered, libraries
burnt and their sacred sites desecrated.[32] Such was the reign of terror during this
period that the community widely went into the practice of Taqya in order to
preserve their lives and the honor of their womenfolk. Village after village
disappeared, with community members either migrating to safety further north or
dissolving in the majority faith. The persecution suffered by Shias in Kashmir
during the successive foreign rules was not new for the community. Many of the
standard bearers of Shia’ism, like Sa’adaat or the descendants of the
Prophet Mohammad and other missionaries who played a key role in spread of the
faith in Kashmir, had left their home lands forced by similar situations.
India's role in battle of Karbala
athanvilal Wahshi, a Hindu Writer narrated about the arrival of a helper
for Husain’s cause on the eight day of Moharram. Husain ibn
Aliwelcomed him and immediately confirmed his Indian Identity. Husain
ibn Ali then goes on to praise India and its people in the following words:
"The perfumed fragrance entered the realm of love from your country The
cool breeze came to my grandfather Mohammad from that garden."
Upon asking more about the guest’s background he finds out that he is an Indian
merchant residing in neighboring city of Basra, his father had been entrusted with
the treasury of the war booty by none other than Ali bin Abitalib. For this reason
the merchant holds himself morally responsible for assisting Husain ibn Ali in any
possible way when the later is in trouble. Husain ibn Ali appreciated gesture, but
discouraged the merchant from taking up arms in following words:
"Brother, in my opinion you are the beloved of the world In this country you
are the treasure of India."
Munshi Prem Chand further narrates the perception of this merchant on the part
of Imam as suspicion about Husain ibn Ali’s sincerity because of being a Hindu.
With tear filled eyes the traveler said: ”I am a Hindu, perhaps my fidelity is not
convincing Master! Even though this heart is the land of Idol Temple In it is also
lit the light of affection”.
Husain ibn Ali said : What have you said in passion, Why should my eyes doubt
your fidelity? My lord is aware of my conscience. What’s the difference
between Hindu and Muslim is the quest for truth. This has the guiding principle
for the People of the Cloak or Ahl al-Kisa. ”.
N
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
Shia Muslim Dynasties in India
hiite Islam has deep rooted influence in present and history of India from
North to South with various Shia Muslim dynasties ruling Indian provinces
from time to time.
Few prominent ones of the Indian Shia Muslim dynasties are as follows:
§ Bahmani Sultanate (1347–1527 AD)
The Bahmani Sultanate also called the Bahmanid Empire or Bahmani
Kingdom was a Muslim state of the Deccan in southern India and one of the
great medieval Indian kingdoms.[35] Bahmanid Sultanate was the first
independent Islamic and Shi'ite Kingdom in South India.
§ Sharqi Dynasty (1394 CE to 1479 CE)
The Sharqi sultanate was an independent medieval Shia Muslim dynasty
of North India, one of the many kingdoms that came up following the
disintegration of the Delhi Sultanate.[37] Between 1394 CE to 1479 CE,
Sharqi dynasty ruled from Jaunpur in the present day state of Uttar Pradesh.
§ Berar Sultanate (1490-1572 AD)
On the establishment of the Bahmani Sultanate in the Deccan (1348), Berar
Sultanate was constituted one of the five provinces into which their
kingdom was divided, being governed by great nobles, with a separate army.
The perils of this system becoming apparent, the province was divided
(1478 or 1479) into two separate provinces, named after their
capitals Gawil and Mahur.
§ Bidar Sultanate (1489-1619 AD)
Bidar Sultanate was one of the Deccan sultanates of late medieval India. Its
founder, Qasim Barid was a Turk, domiciled in Georgia. He joined the
service of the Bahmani sultan Muhammad Shah III. He started his career as
a Sar-Naubat but later became the Mir-Jumla (prime minister) of the Bahmani
sultanate.
§ Qutb Shahi dynasty (1518–1687 AD)
The Qutb Shahi dynasty was a Turkic dynasty (whose members were also
called the Qutub Shahis). They were the ruling family of the kingdom
of Golconda in southern India. They were Shia Muslims and belonged
to Kara Koyunlu.
S
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
§ Adil Shahi dynasty (1527–1686 AD)
The Adil Shahi dynasty ruled the Sultanate of Bijapur in the Western area of
the Deccan region of Southern India from 1490 to 1686. Bijapur had been a
province of the Bahmani Sultanate (1347–1518), before its political decline
in the last quarter of the 15th century and eventual break-up in 1518. The
Bijapur Sultanate was absorbed into the Mughal Empire on 12 September
1686, after its conquest by the Emperor Aurangzeb.
§ Nawab of Awadh (1722-1858 AD)
Of all the Muslim states and dependencies of the Mughal empire, Awadh
had the newest royal family, the Nawabs of Awadh. They were descended
from a Persian adventurer called Sa'adat Khan, originally
from Khurasan in Persia.
§ Najafi Nawabs of Bengal (1757–1880)
The Najafi Dynasty of Nawabs of Bengal were Sayyids and were
descendants of Prophet Muhammad through Al Imam Hasan ibn Ali, ruling
from 1757 until 1880.
§ Nawab of Rampur
Rampur, former princely state of British India. Previously ruled by Shiite
Muslim Nawabs of Rampur, it was incorporated into the state of Uttar
Pradesh in 1949.
§ Nizams of Hyderabad State(1724–1948 AD)
The ruling Nizams of Hyderabad State patronized Islamic art, culture and
literature and developed railway network in Hyderabad. Islamic Sharia law
was the guiding principle of the Nizams' official machinery.
Present circumstances (2011)
ndia, the only non Muslim nation in the world with Shiite population of 3-4
percent of its entire population, has recognized the day of Ashuralisted
as Moharram as the Public Holiday in India. India also has the Birthday of
Imam Ali bin Abi Talib as public Holiday in states of Biharand Uttar Pradesh,
whose capital Lucknow is considered as the centre of India’s Shiite
Muslim community. The Birthdate of Ali bin Abi Talibis not recognized by any
country in any of its states other than India and Iran as public Holiday. It is also a
known fact that when Saddammercilessly quelled a Shia uprising in 1992. The
world media remained silent and damage to the shrines of Husayn ibn Ali and his
half-brotherAl Abbas ibn Ali, in the course of Baathist attempts to flush
out Shia rebels was a tightly kept secret of the Saddam regime but Indian media
Doordarshan was the only network in the world to have shown that footage
I
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
However, there has been a report about the Moharram procession being banned
and Shiite people protesting against the ban were beaten up by the Indian
Army. Main procession is banned in Srinagar since the eruption of militancy in
1990s, the ban is protested by Shiitesevery year during Moharram who condemn
and blame Indian government for suppressing their right of religious
freedom in Jammu and Kashmir, which is a Muslim majority state.
Apart from the reign of few Mughal Emperors, there have been no reports of
specific targeted persecution of Shias in India unlike the neighboring Pakistan and
few Middle Eastern countries. India being a secular country, Shiite
Muslims in India practice their religion freely without any restriction, except for
few areas like Kashmir where their religious freedom is suppressed by Indian
government. However, inpost Godhra riots a Shia Ex Member of the
Parliament Ehsan Jafri was reported to be burnt to death by Hindu mob in his
own residence in the state of Gujarat in 2002.
Shias also claim to be sidelined in India, hence the All India Shia Personal Law
Board was formed after segregation from the All India Muslim Personal Law
Board in 2005 to address the legal needs of the Shia population. AISPLB feels that
there should be a national policy for the Shias to prevent their exploitation by
vested interests. The attitude of the government towards Muslims especially
in Maharashtra came in for criticism.[1] The newly formed All India Shia Personal
Law Board had 69 members at the time of formation compared to 204 members in
theAll India Muslim Personal Law Board.[43] The Shia body had the support of the
erstwhile royal family of Lucknow, some 2000 descendants of the family claim to
have extended their support. Shias claim they have been sidelined by the Sunnidominated
law board, which was set up in 1972.[44] Maulana Mirza Mohammed
Athar, president of the breakaway All India Shia Personal Law Board explained the
reason for segregation saying that, Shias have formed a forum of themselves
because the All India Muslim Personal Law Board never took interest in their well
being." Shias and Sunnis do not interpret family laws in a similar way. Shiites also
have different Mosques and Burial grounds in India.
Azadari In India
hiite Muslims doing Azadari by performing Tatbeer in Mumbai, India on
the day of Ashura Azadari or the mourning practice of Imam Husain ibn
Ali is very much prevalent across India. One thing which is worth noting in
Indian Azadari is the participation of non Muslims in Shia rituals on the day of
Ashura.
The Hindu rulers of Vijayanagar during the 16th and 17th centuries even donned
blackened garments and helped to arrange the Kala Tazia (Black Tazia)
S
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
processions. Even the Scindias of Gwalior and the Holkar Maharajas of Indore
conducted Majlis or Muharram congregations.
In Lucknow Hindus regularly join Muslims in the Azadari and Alam processions.
The Sufi saints of India along with the Shi'ite Scholars encouraged the mixing and
merging of indigenous elements from the rich cultural heritage of the land to that
of Muharram thus proclaiming the message of peaceful co-existence among
communities and united resistance to tyrannical authority.
The carrying of Alams through fire by men is more common. There are several
occasions when these are traditionally practiced particularly in the town
of Vizianagaram 550 km outside of Hyderabad where 110 Alams are taken through
the fire. A significant aspect of fire walking in the context
of Moharram commemorations in Andhra Pradesh is the participation of Hindus
in the ceremonies. In Vizinagaram 109 of the Alams are carried by Hindus.
Notable Shia Muslim Personalities of India
Religion
§ Grand Ayatollah Ghufran Ma'ab - One of the leading Ayatollah, India had
ever produced.
§ Sayyid Ahmad al Musawi al Hindi - Grandfather of revolutionary Iranian
leader Grand Ayatollah Ruhollah al Musawi al Khomeini. He was born in
Kintoor Barabanki UP
§ Qazi Nurullah Shustari - Executed by Mughal Emperor Jehangir, is regarded
as the third among the five martyrs of Shia Islam.
§ Mirza Muhammad Kamil Dehlavi - Executed by Sunni Ruler of Jhajhar, also
known as the Shahid Rabay or the fourth martyr of the five martyrs of Shia
Islam.
§ Ayatollah Sayyid Mir Hamid Hussain al Musawi Kintoori Lakhnavi -
Leading Indian Cleric of his time.
§ Mir Anis - Legendary Urdu poet and renowned Marsia writer all over the
world. He was born in Faizabad in the northern Indian state of Uttar
Pradesh in 1803 and died in 1874.
§ Mirza Dabeer - Leading Urdu poet of India who excelled and perfected the
art of Marsiya writing and is considered the leading exponent of
Marsiya writing along with Mir Anis.
§ Maulana Sayyid Urujul Hasan Meesum - Cleric from India
§ Grand Ayatollah Sayyid Mohsin Nawab Rizvi Mujtahid - Vice Principal
of Sultanul Madaris, Lucknow, former Principal, Madarse Aliya (Oriental
College), Rampur, and Madarse Nasirya, Jaunpur.
§ Ayatollah Najmul Millat - Leading Ayatollah and father of Maulana Syed
Mohammad the founder of Madrasatul Waizeen
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
§ Ayatullah Agha Hajji Mirza Mahdi Puya Yazdi - A Twelver Shia Muslim and
an Islamic scholar, most notable for his famous tafsir of theQur'an.
§ Ayatollah Syed Mohammad Abul Hasan – Founder of Sultanul Madaris son
of Ayatollah Syed Ali Shah.
§ Grand Ayatollah Ali Naqi Naqvi - Leading Mujtahid of modern India.
§ Ayatollah Syed Ali Shah – Father of Grand Ayatollah Syed Mohammad
Abul Hasan.
§ Ayatollah Syed Aqeel-al-Gharavi - Leading Shia scholar and community
activist of India.
§ Syed Kalbe Hussain - One of the senior clerics of India.
§ Maulana Muhammad Rizvi - Twelver Shia Cleric, son of Maulana Sa'id
Akhtar Rizvi and author of the book Sh?‘ism Im?mate & Wil?yat. Canada:
Al-Ma‘?rif Books. 1999. ISBN 0-920675-11-5.
§ Maulana Sa'id Akhtar Rizvi - Indian born, Twelver Sh?‘ah scholar, who
actively promoted Islam in East Africa.
§ Syed Sibte Hasan Naqvi - Shia Cleric and father of Syed Mohammad Waris
Hasan Naqvi
§ Syed Mohammad Waris Hasan Naqvi - Shia Cleric form Lucknow, India.
§ Maulana Kalbe Abid(late) - Mujtahid from Lucknow, India and father of
Maulana Kalbe Jawad.
§ Late Maulana Sayyid Aqa Hasan Naqvi - Mujtahid from Lucknow
§ Maulana Kalbe Sadiq - Senior member of All India Muslim Personal Law
Board and brother of Maulana Kalbe Abid(late).
§ Maulana Kalbe Jawad - Leading cleric of India, leader of Friday prayers
in Asafi Imambargah and son of Maulana Kalbe Abid(late).
§ Maulana Mirza Mohammad Athar - Leading Orater of India, and the first
president of All India Shia Personal Law Board (AISPLB).
§ Syed Hamidul Hasan - Cleric from India and one of the students of
Ayatullah al-Uzma Syed Muhsin al-Hakim and Ayatullah al-Uzma SyedAbul
Qasim al-Khoei.
§ Maulana Syed Ghulam Hussain Raza Agha Mujtahid ul Asr - Leading
scholar and head of ulema of Hyderabad
§ Raja Amir Mohd. Khan (Raja of Mehmoodabad)-Famous Marsiyakhan
Business and politics - present and past
§ Azim Premji, CEO of India's 3rd largest IT company Wipro Technologies
and the 5th richest man in India with an estimated fortune of US$17.1
billion.
§ Fakhruddin T. Khorakiwala - Dawoodi Bohra, Chancellor of Jamia Millia
University, former Sheriff of Mumbai and owner of Akbarallys
and Wockhardt.
§ Zoher Khorakiwala and Komail Khorakiwala - Dawoodi Bohra, owner
of Monginis Bakery Chain
§ Sir Sultan Ahmed - Indian barrister and politician
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
§ Zafar Ali Naqvi - Indian politician and Member of the Parliament of India
§ Mukhtar Abbas Naqvi - Former Indian Federal Minister and Member of
the Parliament of India
§ Ehsan Jafri (1929 – February 28, 2002) - Indian politician and ex-Member of
the Parliament of India, killed during Gulbarg Society massacre
§ Syed Sibtey Razi - Governor of Assam state and former Governor
of Jharkhand state.
§ Ali Yawar Jung - Former Indian diplomat and former Governor of the state
of Maharashtra from 1971 to 1976. He played a significant role in full scale
establishment of Azadari in Mumbai.
§ Nur Jehan - Mughal Empress, considered mastermind behind Jehangir's
rule, family origin in Persia
§ Mumtaz Mahal - Wife of Mughal Emperor Shah Jahan I buried in Taj
Mahal in Agra, India.
§ Bahmani Sultanate rulers.
§ Sharqi Dynasty rulers
§ Berar Sultanate rulers.
§ Bidar Sultanate rulers.
§ Qutb Shahi dynasty rulers.
§ Adil Shahi dynasty rulers.
§ Nawab of Awadh rulers.
§ Begum Hazrat Mahal - Wife of Wajid Ali Shah, last Nawab of the princely
kingdom of Awadh
§ Nawab of Rampur rulers.
§ Najafi Dynasty Nawabs of Bengal.
§ Hyderabad State Nizam rulers.
§ Mahabat Khan - prominent Mughal general and statesman, perhaps best
known for his coup against the Mughal Emperor Jahangir in 1626.
§ Sayyed Mahmud Khan - Military general of Mughal Emperor Akbar's army.
§ Siraj ud-Daulah - Last ruler of Bengal before British intrusion.
Bollywood
§ Kamal Amrohi - Bollywood film director, screenwriter, and dialogue writer
§ Meena Kumari - Bollywood Actress and Urdu-Hindi Poetess.
§ Farida Jalal - Bollywood Actress.
§ Jagdeep - Bollywood Actor and Comedian, father of Javed
Jaffrey and Naved Jaffrey.
§ Feroz Khan - Indian Actor, Film editor, Producer and Director in
the Bollywood film Industry.
§ Saeed Jaffrey - Indian Punjabi British actor.
§ Sanjay Khan - Actor turned film producer and director
§ Akbar Khan - Film actor, screenwriter, producer and director.
§ Fardeen Khan - Indian established Bollywood actor and son of
legendary Feroz Khan.
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
§ Zayed Khan - Indian Bollywood actor and son of Sanjay Khan.
§ Javed Jaffrey - Bollywood actor and comedian.
§ Naved Jaffrey - Co-producer of Boogie Woogie series.
§ Emraan Hashmi - Bollywood actor
§ Farah Khan Ali - Gemologist and renowned Jewellery designer of India
§ DJ Aqeel - DJ, singer and composer
Sports
§ Syed Kirmani - Former Indian cricket captain who was awarded Padma
Sri in 1982
§ Jalaluddin Rizvi - Former field hockey player who represented India in
the 1984 Olympics and 1982 Asian Games
Journalism
§ Saeed Naqvi - Senior journalist and Distinguished Fellow at Observer
Research Foundation, 20 Rouse Avenue, New Delhi. Visiting Professor at
Academy of Third World Studies, Jamia Millia and Senior Advisor at Centre
for Culture, Media and Governance, Jamia Millia Islamia University, New
Delhi.
§ Nikhat Kazmi - Senior correspondent writing for The Times of India since
1987
Others
§ Amir Rizvi - Indian designer
§ Ali Hyder Tabatabai - Poet, translator and scholar of languages
§ Safi Lakhnavi - Urdu poet
§ Saghar Khayyami - Urdu poet leading humorist and satirist
Shia organizations in India
§ All India Shia Personal Law Board
§ Jamia Nazmia
§ Sultan al Madaris
§ All India Shia Yateem Khaana
§ All India Shia Husaini Fund
§ All India Shia Conference (1930s)
§ Anjuman Haideri Hallaur
§ HIZ Society
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]
List of nations with Shia population
Figures indicated in the first three columns below are based on the October 2009
demographic study by the Pew Research Center report, Mapping the Global
Muslim Population.
Nations with over 100,000 Shi'a
Country Shi'a population
Percent of
Muslim
population
that is
Shi'a
Percent
of global
Shi'a
populati
on
Minim
um
estima
te/clai
m
Maximum estimate/claim
Iran
66,000,000 –
70,000,000 90–95 37–40
Pakistan
17,000,000 –
26,000,000 10–15 10–15 43,250,000 – 57,666,666
India
16,000,000 –
24,000,000 10–15 9–14 40,000,000 – 50,000,000
Iraq
19,000,000 –
22,000,000 65–70 11–12
Turkey 7,000,000 – 11,000,000 10–15 4–6
Yemen 8,000,000 – 10,000,000 35–40 5
Azerbaijan 5,000,000 – 7,000,000 65–75 3–4
Afghanistan 3,000,000 – 4,000,000 10–15 <2 15–19% of total population
Syria 3,000,000 – 4,000,000 15–20 <2
Saudi Arabia 2,000,000 – 4,000,000 10–15 1–2
Nigeria <4,000,000 <5 <2 5-10 million
Lebanon 1,000,000 – 2,000,000 45 <1
Tanzania <2,000,000 <10 <1
Kuwait 500,000 – 700,000 20–25 <1 35–40% of total population
Germany 400,000 – 600,000 10–15 <1
Bahrain 400,000 – 500,000 65–75 <1
Tajikistan 400,000 7 <1
United Arab
Emirates
300,000 – 400,000 10 <1
United States 200,000 – 400,000 10–15 <1
Oman 100,000 – 300,000 5–10 <1 948,750
United
Kingdom
100,000 – 300,000 10–15 <1
Bulgaria 100,000 10–15 <1
Qatar 100,000 10 <1
Shia [By Syed Iqbal Husain Rizvi] www.shia?e?ali.com [2011]

Friday, October 28, 2011

किसी ने कहा

समाजनिष्ठा का विकास करें

स्वयं क्रियाकुशल और सक्षम होने के बावजूद भी कितने ही व्यक्ति अन्य औरों से तालमेल न बिठा पाने के कारण अपनी प्रतिभा का लाभ समाज को नहीं दे पाते । उदाहरण के लिए फुटबाल का कोई खिलाड़ी अपने खेल में इतना पारंगत है कि वह घण्टों गेंद को जमीन पर न गिरने दे परन्तु यह भी हो सकता है कि टीम के साथ खेलने पर अन्य खिलाड़ियों से तालमेल न बिठा पाने के कारण वह साधारण स्तर का भी न खेल सके ।
अक्सर संगठनों में यह भी होता है कि कोई व्यक्ति अकेले तो कोई जिम्मेदारी आसानी से निभा लेते हैं, किन्तु उनके साथ दो चार व्यक्तियों को और जोड़ दिया जाए तथा कोई बड़ा काम सौंप दिया तो वे जिम्मेदारी से कतराने लगते हैं । कुछ व्यक्तियों को यदि किसी कार्य की जिम्मेदारी सौंप दी जाय तो हर व्यक्ति यह सोचकर अपने दायित्व से उपराम होने लगता है कि दूसरे लोग इसे पूरा कर लेगें ।
बौद्ध साहित्य में सामूहिक जिम्मेदारी के अभाव का एक अच्छा प्रसंग आता है । किसी प्रदेश के राजा ने कोई धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए राजधानी के निवासियों को निर्देश दिया कि सभी लोग मिलकर नगर के बाहर तैयार किए गए हौज में एक-एक लोटा दूध डालें । हौज को ढक दिया गया था और निश्चित समय पर जब हौज का ढ़क्कंन हटाया गया तो पता चला कि दूध भरने के स्थान पर हौज पानी से भरा था । कारण का पता लगाया गया तो मालूम हुआ कि प्रत्येक व्यक्ति ने यह सोच कर दूध के स्थान पर पानी डाला था कि केवल मैं ही तो पानी डाल रहा हूँ, अन्य और लोग तो दूध ही डाल रहे हैं ।
समाज में रहकर अन्य लोगों से तालमेल बिठाने तथा अपनी क्षमता योग्यता का लाभ समाज को देने की स्थिति भी सामाजिकता से ही प्राप्त हो सकती है ।

Wednesday, October 26, 2011

दिपावली मुबारक

हर साल की तरह इस साल भी आपकी दिवाली पिछली दिवालियों से बेहतर हो.. मां लक्षमी हम सब पर अपनी कृप्या बनाये रखें और मां सरस्वती भी हम से खुश रहें...उम्मीद करता हूं अगले साल भी दिवाली की मुबारक मैं आपको दूं...
धन्यवाद

Thursday, October 20, 2011

मुतुअल फुंद SELECTION

.
Before you begin looking for the best mutual funds, you'll need a good tool to help you do the research. You can find and use all of the basic mutual fund selection criteria with Morningstar's Fund Screener. This fund screener is free if you sign up for their basic membership.

Use the Appropriate Benchmark for Measuring Performance

To choose the best mutual funds, you'll need to know how to judge performance. Compare each fund's historical returns to an appropriate benchmark, such as the fund's relative category average or an index. For example, performance for most stock mutual funds is compared to the S&P 500 Index.

Keep in mind that mutual funds are best used for long-term investing (more than 3 years). Therefore put the heaviest weight in your selection criteria on the 5-year return. Also look at the 10-year return if the fund has been around that long. If the fund outperforms the benchmark for the 5-year returns, keep it on your radar. Otherwise remove it from consideration.

Check Length of Manager Tenure

Many investors overlook manager tenure, which is how long the manager has been managing the fund. Look for manager tenure of at least 3 years and be sure the time frame you are reviewing represents the same time frame the manager has been at the helm of the fund. If, for example, you've found a fund that has an outstanding 5-year return but the manager tenure is only 1 year, it means the current manager receives no credit for 4 of the past 5 years' performance.

Keep Fees and Expenses Low

Fees and expenses are a direct drag on investment returns. So, funds with low fees and expenses tend to perform better over long periods of time than those with higher relative expenses. Only consider mutual funds with an Expense Ratio below 1.00%. Note: The average Expense Ratio is around 1.50%. Also, avoid sales charges (loads) by using only no-load funds.

Look for Low Turnover

Turnover is a measure of a fund's trading activity. This means how often the fund manager is buying and selling the stock or bond holdings in the fund. Turnover is often expressed as a percentage, called Turnover Ratio. A low turnover ratio (20% to 30%) indicates a buy-and-hold strategy and low trading costs, which is generally best for investors. A high turnover ratio (more than 100%) indicates a strategy of significant buying and selling of securities, which creates higher relative trading costs.

Check the Number of Holdings

By nature, mutual funds are diverse investments; they hold dozens or hundreds of stocks and/or bonds all in one basket. However it is still a good idea to check how many stocks or bonds are held in the funds you are researching. If, for example, a fund only invests in 20 different stocks (holdings), there is an increased risk of high volatility (fast movements up or down in price). You could experience high gains as well as significant declines in value over short periods of time. For proper diversification and lower relative risk, check to be sure that the fund has at least 50 holdings before investing.

A Quick Tip on Index Funds

The previous points are primarily for selecting mutual funds that are actively managed, which basically means that the fund managers are trying to outperform the stock market average returns, measured by an index, such as the S&P 500. However over long periods of time, especially 10 years or more, the majority of actively managed funds do not consistently outperform the stock market indexes, which is why many investors like to use index funds.

Wednesday, October 19, 2011

कर्मफल भी किश्तों में

कर्मफल भी किश्तों में बाजारू व्यवहार नकद लेन-देन के आधार पर चलता है । 'इस हाथ दे, इस हाथ ले' का नियम बनाकर ही छोटे दुकानदार अपना काम चलाते हैं । 'आज नकद, कल उधार' के बोर्ड कई दुकानों पर लगे होते हैं । इतने पर भी यह नियम अकाट्‌य और अनिवार्य नहीं है। सर्वदा ऐसा ही होता हो, सो बात भी नहीं है। बैंक पूरी तरह उधार देने-लेने पर ही अवलम्बित हैं । बैंक कर्ज भी देता है और उसे किश्तों में चुकाने की सुविधा भी । उपरोक्त दोनों व्यवहारों के उदाहरण जीवन में अपनाई गई गतिविधियों के परिणाम उपलब्ध करने के सम्बन्ध में लागू होते हैं । ठीक यही प्रक्रिया मनुष्य शरीर में प्रवेश करने के उपरान्त भी किए गए दुष्कर्मों के सम्बंध में है । उनका सारा प्रतिफल तत्काल नहीं मिलता । यदि मिलने लगे, तो उसी दबाव में जीव दबा रह जाएगा । जीवनक्रम चलाने के लिए या प्रगति की व्यवस्था करने के लिए कोई अवसर ही हाथ न रहेगा, दण्ड की प्रताड़ना से ही कचूमर निकल जाएगा । कर्मफल का अवश्यम्भावी परिणाम चट्‌टान की तरह अटल है, पर उनके सम्बन्ध में यही नियति निर्धारण है कि यह उपलब्धि किश्तों में हो । जिसने दुष्कंर्म किए हैं, उसे दण्ड धीरे-धीरे जन्म-जन्मान्तरों में भुगतना पड़ेगा । यह नियम सत्कंर्मों के बारे में भी है वह भी धीरे-धीरे मिलता रहता है । इस विद्या के कार्यान्वित होने की एक स्वसंचालित प्रक्रिया है। कर्म-बन्धनों की ग्रन्थियाँ बनकर अन्तराल की गहराई में जड़ जमा लेती हैं और फिर धीरे-धीरे अपने अंकुर उगाती रहती हैं । इनका स्वरूप अन्तःप्रेरणा बनकर फलित होता है, जिससे कुकर्मों के फलस्वरूप नारकीय प्रताड़ना भुगतनी पड़ती है । उनकी अन्तःचेतना ऐसी आकांक्षाएँ उत्पन्न करती है, जो आगे भी कुकर्मों की ओर धकेले । ऐसी दशा में सुधार-परिष्कार के सामयिक प्रयत्न उस अन्तःप्रेरणा के दबाव में निरस्त होते, असफल रहते हैं । यदि सत्कर्म सुसंस्कार बनकर अन्तराल में जमे हैं, तो बाह्य परिस्थितियों के प्रतिकूल होने पर भी अपना काम करते हैं । अवरोधों को पराजित करते रहते हैं । पतन के वातावरण को भीतरी चेतना उलट देती है, इस प्रकार कर्मफल उपरोक्त दोनो सिद्धांतों पर कार्य करता है ।

Sunday, October 9, 2011

पाकिस्तानी अगेंट

पंजाब के फरीदकोट में पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई के लिए काम करने वाले दो एजेंटों को ग्रिफ्तार कीया है, पुलिस को इनसे काफी एहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, ये दोनों पिशले करीब बीस वर्ष से आर्मी के कैंट में ही नौकरी कर रहे थे, पुलिस को इनसे और भी कई एहम खुलासे होने की उम्मीद है |
फरीदकोट में पुलिस ने भोला सिंह और लेलु राम नाम के दो लोगों को ग्रिफ्तार कर इनके आई एस आई के एजेंट होने का दावा कीया है, पुलिस के मुताबिक ये दोनों पिशले करीब बीस वर्ष से आर्मी के कैंट में ही नौकरी कर रहे थे, भोला सिंह कारपेंटर था जबके लेलु राम प्लंबर था, अपने इसी काम की वजह से दोनों आर्मी के पूरे कैंट में कहीं भी आ जा सकते थे,बस इसी का फाईदा उठा यह लोग आर्मी की जासूसी करते रहे और पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को फ़ौज की सारी खुफिया जानकारी देते रहे, पुलिस को इनके पास से आर्मी के कई अहम् दस्तावेज, आर्मी के नक़्शे, और कुश किताबें भी मिली हैं |
पुलिस के मुताबिक ये लोग पिशले काफी समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई से जुड़े हुए थे, लगातार फोन पर ये लोग अपने पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में रहते थे, कुश रुपये के लालच में ये लोग अपने देश के साथ गद्दारी कर एक दुश्मन मुल्क के लिए काम कर रहे थे, पुलिस को इनसे कई और भी खुलासे होने की उम्मीद है, पुलिस इन लोगों को अदालत में पेश कर इनका पुलिस रिमांड लेगी |

मोदी रेफुसेमुस्लिम कैप







modi refusing muslim cap

topi se parhaiz..

Thursday, October 6, 2011

क्या आपके पास है..

ह्रदय राम का
बल रावण का
साहस हनुमान का
प्रेम लक्षमण का
मार्ग विभिषण का
त्याग सीता का
इनमे से आपके पास क्या है.?

Monday, October 3, 2011

किसी ने कहा-9

तैरना सीखने के लिए तालाब चाहिए । निशाना साधने के लिए बंदूक, पढऩे के लिए पुस्तक चाहिए और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रयोगशाला । यों अपनी आस्थाएँ, मान्यताएँ एकाकी भी बनाई, बदली जा सकती हैं । पर वे खरी उतरी कि नहीं, परिपक्व हुई कि नहीं, इसका परीक्षण भी होना चाहिए । इसके लिए उपयुक्त कसौटी परिवार ही हो सकता है । फिर वह ईश्वर का सींचा हुआ एक बगीचा भी है । उसे भी कर्मठ और कुशल माली की तरह सम्भाला सॅंजोया जाना है ।

Wednesday, September 21, 2011

इस शाम ऐसे ही

मुझे हर बार
एक बात का ग़म है
मुझे हर रात
उस उस बात का ग़म है..
सुब होते ही खो जाते हैं जब अपने
मुझे बिखरे हुए गुलिस्तां का ग़म है
सजो न पाया मैं कोई रिश्ता
मुझे अपनो को, खोने का ग़म है..
ग़म न करो ऐ ग़मगीन हैदर
इस दुनिया को तुम्हारे आने का ग़म है.।।

Wednesday, September 14, 2011

किसी ने कहा -8

मनुष्य भगवान की सर्वोत्तम कलाकृत्ति है । भगवान ने अपना यह सृजन बड़े मनोयोग और अरमानों के साथ किया है । वे उसे देर तक दयनीय स्थिति में रहने नहीं दे सकते । माली को बगीचा सौंपा तो जाता है पर उसके हाथों बेच नहीं दिया जाता । इस विश्व की व्यवस्था मनुष्य के हाथों सौंपी जरूर गई थी, वह उसे सुन्दर, सुरक्षित और समुन्नत रखे, यह उत्तरदायित्व दिया अवश्य गया था । पर यदि वह उसे सँभालता नहीं - व्यतिक्रम करता है, तो उसी की मनमर्जी नहीं चलती रहने दी जा सकती । माली बदलेगा, क्रम सुधरेगा या व़ह जो भी करेगा, अपने अरमानों के इस सुरम्य दुनियां को इस प्रकार अस्त-व्यस्त नहीं होने देगा, जैसा की हो रहा है, किया जा रहा है ।

Friday, September 2, 2011

मुंह चिढ़ाते गांधी जी

मुंह चिढ़ाते गांधी जी
....
मन बार बार और ज़ार ज़ार रो रहा है । बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने बैठा पर ऐसा लिखूंगा और क्या लिखूंगा कुछ पता नहीं ..पर वो ही ज़िंदगी के ऊतार चढ़ाव ..दुख दर्द का सिलसिला और खुशी के बस कुछ पल जो न जाने कब आते हैं और कब चले जाते हैं कुछ पता ही नहीं चलता ..ज़िन्दगी की एक सच्चाई एक हकीक़त ..पैसा ..न जाने ज़िन्दगी में कहां से आया और इतना महत्वपूर्ण हो गया कि कुछ भी और कोई भी इसके आगे सोचता ही नहीं ..तकलीफ होती है किसी के दर्द को देख कर और दुख होता है उस दर्द को कम न कर पाने का । क्यों इस दुनिया में लोग परेशान है क्यों लोग तकलीफ में हैं..जब जानने की कोशिश करते हैं तो अंत में काग़ज़ में छपे गांधी जी ही कारण दिखते हैं ..क्या बापू ने कभी सोचा होगा कि जो उन्होने सारे आंदोलन जिन गरीबों के लिए किये उन्ही गरीबों को नोटो में छपी उनकी शक्ल देखना नसीब भी न होगी ।।

Sunday, July 31, 2011

दुर्भावों का उन्मूलन

कई बार सदाचारी समझे जाने वाले लोग आश्चर्यजनक दुष्कर्म करते पाए जाते हैं । उसका कारण यही है कि उनके भीतर ही भीतर वह दुष्प्रवृति जड़ जमाए बैठी रहती है । उसे जब भी अवसर मिलता है, नग्न रूप में प्रकट हो जाती है । जैसे, जो चोरी करने की बात सोचता रहता है, उसके लिए अवसर पाते ही वैसा कर बैठना क्या कठिन होगा । शरीर से ब्रह्मज्ञानी और मन से व्यभिचारी बना हुआ व्यक्ति वस्तुत: व्यभिचारी ही माना जाएगा । मजबूरी के प्रतिबंधों से शारीरिक क्रिया भले ही न हुई हो, पर वह पाप सूक्ष्म रूप से मन में तो मौजूद था । मौका मिलता तो वह कुकर्म भी हो जाता ।

इसलिए प्रयत्न यह होना चाहिए कि मनोभूमि में भीतर छिपे रहने वाले दुर्भावों का उन्मूलन करते रहा जाए । इसके लिए यह नितान्त आवश्यक है कि अपने गुण, कर्म, स्वभाव में जो त्रुटियॉं एवं बुराइयॉँ दिखाई दें, उनके विरोधी विचारों को पर्याप्त मात्रा में जुटा कर रखा जाय और उन्हें बार-बार मस्तिष्क में स्थान मिलते रहने का प्रबंध किया जाए । कुविचारों का शमन सद्विचारों से ही संभव है ।

Thursday, June 23, 2011

किसी ने कहा-6

भीतरी दुनियाँ में गुप्‍त-चित्र या चित्रगुप्‍त पुलिस और अदालत दोनों महकमों का काम स्‍वयं ही करता है। यदि पुलिस झूठा सबूत दे दे तो अदालत का फैसला भी अनुचित हो सकता है, परंतु भीतरी दुनियाँ में ऐसी गड़बड़ी की संभावना नहीं। अंत:करण सब कुछ जानता है कि यह कर्म किस विचार से, किस इच्‍छा से, किस परिस्थिति में, क्‍यों कर किया गया था। वहाँ बाहरी मन को सफाई या बयान देने की जरूरत नहीं पड़ती क्‍योंकि गुप्‍त मन उस बात के संबंध में स्‍वयं ही पूरी-पूरी जानकारी रखता है। हम जिस इच्‍छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं, उस इच्‍छा या भावना से ही पाप-पुण्‍य का नाप होता है। भौतिक वस्‍तुओं की नाप-तोल बाहरी दुनियाँ में होती है। एक गरीब आदमी दो पैसा दान करता है और एक धनी आदमी दस हजार रूपया दान करता है, बाहरी दुनियाँ तो पुण्‍य की तौल रुपए-पैसों की गिनती के अनुसार करेगी। दो पैसा दान करने वाले की ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देखेगा, पर दस हजार रूपया देने वाले की प्रशंसा चारों ओर फैल जाएगी। भीतरी दुनियाँ में यह नाप-तोल नहीं चलती। अनाज के दाने अँगोछे में बाँधकर गाँव के बनिए की दुकान पर चले जाएँ, तो वह बदले में गुड़ देगा, पर उसी अनाज को इंग्‍लैंड की राजधानी लंदन में जाकर किसी दुकानदार को दिया जाए, तो वह कहेगा-महाशय ! इस शहर में अनाज के बदले सौदा नहीं मिलता, यहां तो पौंड, शिलिंग, पेंस का सिक्‍का चलता है। ठीक उसी प्रकार बाहरी दुनियाँ में रूपयों की गिनती से, काम के बाहरी फैलाव से, कथा-वार्ता से, तीर्थयात्रा आदि भौतिक चीजों से यश खरीदा जाता है, पर चित्रगुप्‍त देवता के देश में यह सिक्‍का नहीं चलता, वहाँ तो इच्‍छा और भावना की नाप-तौल है। उसी के मुताबिक पाप-पुण्‍य का जमा-खर्च किया जाता है।
भगवान कृष्‍ण न अर्जुन को उकसा कर लाखों आ‍दमियों को महाभारत के युद्ध में मरवा डाला। लाश से भूमि पट गई, खून की नदियाँ बह गई, फिर भी अर्जुन को कुछ पाप न लगा, क्‍योंकि हाड़-माँस से बने हुए कितने खिलौने टूट-फूट गए, इसका लेखा चित्रगुप्‍त के दरबार में नहीं रखा गया। भला कोई राजा यह हिसाब रखता है कि मेरे भंडार में से कितने चावल फैल गए। पाँच तत्‍व से बनी हुई नाशवान् चीजों की कोई पूछ आत्‍मा के दरबार में नहीं है। अर्जुन का उद्देश्‍य पवित्र था, वह पाप को नष्‍ट करके धर्म की स्‍थापना करना चाहता था। बस वही इच्‍छा खुफिया रजिस्‍टर में दर्ज हो गई, आदमियों के मारे जाने की संख्‍या का कोई हिसाब नहीं लिखा गया। दुनियाँ में करोड़पति की बड़ी प्रतिष्‍ठा है, पर यदि उसका दिल छोटा है, तो चित्रगुप्‍त के दरबार में भिखमंगा शुमार किया जाएगा। दुनियाँ का भिखमंगा यदि दिल का धनी है, तो उसे हजार बादशाहों का बादशाह गिना जाएगा। इस प्रकार मनुष्‍य जो भी काम कर रहा है, वह किस नीयत से कर रहा है, वह नीयत, भलाई या बुराई जिस दर्जे में जाती होगी, उसी में दर्ज की जाएगी। सद्-भाव से फाँसी लगाने वाला जल्‍लाद भी पुण्‍यात्‍मा गिना जा सकता है और एक धर्मध्‍वजी तिलकधारी पंडित भी गुप्‍त रूप से दुराचार करने पर पापी माना जा सकता है। बाहरी आडंबर का कुछ मूल्‍य नहीं है, कीमत भीतरी चीज की है। बाहर से कोई काम भला या बुरा दिखाई दे, तो उससे कुछ बनता-बिगड़ता नहीं। असली तत्‍व तो उस इच्‍छा और भावना में है, जिससे प्रेरित होकर वह काम किया गया है। पाप-पुण्‍य की जड़ कार्य और प्रदर्शन में नहीं, वरन् निश्चित रूप से इच्‍छा और भावना

किसी ने कहा-6

भीतरी दुनियाँ में गुप्‍त-चित्र या चित्रगुप्‍त पुलिस और अदालत दोनों महकमों का काम स्‍वयं ही करता है। यदि पुलिस झूठा सबूत दे दे तो अदालत का फैसला भी अनुचित हो सकता है, परंतु भीतरी दुनियाँ में ऐसी गड़बड़ी की संभावना नहीं। अंत:करण सब कुछ जानता है कि यह कर्म किस विचार से, किस इच्‍छा से, किस परिस्थिति में, क्‍यों कर किया गया था। वहाँ बाहरी मन को सफाई या बयान देने की जरूरत नहीं पड़ती क्‍योंकि गुप्‍त मन उस बात के संबंध में स्‍वयं ही पूरी-पूरी जानकारी रखता है। हम जिस इच्‍छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं, उस इच्‍छा या भावना से ही पाप-पुण्‍य का नाप होता है। भौतिक वस्‍तुओं की नाप-तोल बाहरी दुनियाँ में होती है। एक गरीब आदमी दो पैसा दान करता है और एक धनी आदमी दस हजार रूपया दान करता है, बाहरी दुनियाँ तो पुण्‍य की तौल रुपए-पैसों की गिनती के अनुसार करेगी। दो पैसा दान करने वाले की ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देखेगा, पर दस हजार रूपया देने वाले की प्रशंसा चारों ओर फैल जाएगी। भीतरी दुनियाँ में यह नाप-तोल नहीं चलती। अनाज के दाने अँगोछे में बाँधकर गाँव के बनिए की दुकान पर चले जाएँ, तो वह बदले में गुड़ देगा, पर उसी अनाज को इंग्‍लैंड की राजधानी लंदन में जाकर किसी दुकानदार को दिया जाए, तो वह कहेगा-महाशय ! इस शहर में अनाज के बदले सौदा नहीं मिलता, यहां तो पौंड, शिलिंग, पेंस का सिक्‍का चलता है। ठीक उसी प्रकार बाहरी दुनियाँ में रूपयों की गिनती से, काम के बाहरी फैलाव से, कथा-वार्ता से, तीर्थयात्रा आदि भौतिक चीजों से यश खरीदा जाता है, पर चित्रगुप्‍त देवता के देश में यह सिक्‍का नहीं चलता, वहाँ तो इच्‍छा और भावना की नाप-तौल है। उसी के मुताबिक पाप-पुण्‍य का जमा-खर्च किया जाता है।
भगवान कृष्‍ण न अर्जुन को उकसा कर लाखों आ‍दमियों को महाभारत के युद्ध में मरवा डाला। लाश से भूमि पट गई, खून की नदियाँ बह गई, फिर भी अर्जुन को कुछ पाप न लगा, क्‍योंकि हाड़-माँस से बने हुए कितने खिलौने टूट-फूट गए, इसका लेखा चित्रगुप्‍त के दरबार में नहीं रखा गया। भला कोई राजा यह हिसाब रखता है कि मेरे भंडार में से कितने चावल फैल गए। पाँच तत्‍व से बनी हुई नाशवान् चीजों की कोई पूछ आत्‍मा के दरबार में नहीं है। अर्जुन का उद्देश्‍य पवित्र था, वह पाप को नष्‍ट करके धर्म की स्‍थापना करना चाहता था। बस वही इच्‍छा खुफिया रजिस्‍टर में दर्ज हो गई, आदमियों के मारे जाने की संख्‍या का कोई हिसाब नहीं लिखा गया। दुनियाँ में करोड़पति की बड़ी प्रतिष्‍ठा है, पर यदि उसका दिल छोटा है, तो चित्रगुप्‍त के दरबार में भिखमंगा शुमार किया जाएगा। दुनियाँ का भिखमंगा यदि दिल का धनी है, तो उसे हजार बादशाहों का बादशाह गिना जाएगा। इस प्रकार मनुष्‍य जो भी काम कर रहा है, वह किस नीयत से कर रहा है, वह नीयत, भलाई या बुराई जिस दर्जे में जाती होगी, उसी में दर्ज की जाएगी। सद्-भाव से फाँसी लगाने वाला जल्‍लाद भी पुण्‍यात्‍मा गिना जा सकता है और एक धर्मध्‍वजी तिलकधारी पंडित भी गुप्‍त रूप से दुराचार करने पर पापी माना जा सकता है। बाहरी आडंबर का कुछ मूल्‍य नहीं है, कीमत भीतरी चीज की है। बाहर से कोई काम भला या बुरा दिखाई दे, तो उससे कुछ बनता-बिगड़ता नहीं। असली तत्‍व तो उस इच्‍छा और भावना में है, जिससे प्रेरित होकर वह काम किया गया है। पाप-पुण्‍य की जड़ कार्य और प्रदर्शन में नहीं, वरन् निश्चित रूप से इच्‍छा और भावना

Thursday, June 16, 2011

किसी ने कहा -5

देखा गया है कि जो सचमुच आत्म-कल्याण एवं ईश्वर प्राप्ति के उद्देश्य से सुख सुविधाओं को त्याग कर घर से निकले थे, उन्हें रास्ता नहीं मिला और ऐसे जंजाल में भटक गये, जहाँ लोक और परलोक में से एक भी प्रयोजन पूरा न हो सका । परलोक इसलिए नहीं सधा कि उनने मात्र कार्य कष्ट सहा और उदात्त वृत्तियों का अभिवर्द्धन नहीं कर सके । उदात्त वृत्तियों का अभिवर्द्धन तो सेवा-साधना का जल सिंचन चाहता था, उसकी एक बूँद भी न मिल सकी । पूजा-पाठ की प्रक्रिया दुहराई जाती रही, सो ठीक, पर न तो ईश्वर का स्वरूप समझा गया और न उसकी प्राप्ति का आधार जाना गया । ईश्वर मनुष्य के रोम-रोम में बसा है । स्वार्थपरता और संकीर्णता की दीवार के पीछे ही वह छिपा बैठा है । यह दीवार गिरा दी जाय तो पल भर में ईश्वर से लिपटने का आनन्द मिल सकता है । यह किसी ने उन्हें बताया होता तो निस्सन्देह इन तप, त्याग करने वाले लोगों में से हर एक को सचमुच ही ईश्वर मिल गया होता और वे सच्चे अर्थों में ऋषि बन गये होते ।

Friday, May 27, 2011

किसी ने कहा 4

मन्दिर को सजाने-सँवारने में भगवान को भुला देना निरी मूर्खता है । किन्तु देवालयों को गन्दा, तिरस्कृत, जीर्ण-शीर्ण रखना भी पाप माना जाता है । इसी प्रकार शरीर को नश्वर कहकर उसकी उपेक्षा करना अथवा उसे ही सजाने-सॅंवारने में सारी शक्ति खर्च कर देना, दोनों ही ढंग अकल्याणकारी हैं हमें सन्तुलन का मार्ग अपनाना चाहिए । शारीरिक आरोग्य के मुख्य आधार आत्म-संयम एवं नियमितता ही हैं, इनकी उपेक्षा करके मात्र औषधियों के सहारे आरोग्य लाभ का प्रयास मृगमरीचिका के अतिरिक्त और कुछ नहीं है ।

Wednesday, May 18, 2011

आपका रिश्ता खतरे में हैं

आपका रिश्ता खतरे में हैं
एक महीना कैसे बीत गया पता नहीं चला ... खुशी के साथ नाराज़गी का ज्यादा एहसास..कुछ लोग शायद दुनिया मे खुश रहने के लिए आये ही नहीं और मेरी किस्मत कहिये या बद किस्मती की ऐसे लोगो का वास्ता मेरी दुनिया में मेरे साथ काफी है ... खुश रहना कोई फलसफा है या कोई काहनी या गणित का ऐसा सवाल जिसका हल.. गुरू के भी पसीने छुड़ा दे ।सुबह देखो तो मुंह बना हुआ है शाम को देखो तो फिर से नफरत के भाव झलक रहे हैं कारण क्या है पूछने पर नहीं बताया जाता ।
माना हर इंसान के पास हर चीज़ नहीं होती पर ये भी तो सच्चाई है कि ऐसे भी इंसान है जिनके पास जो हो वो उसमें ही खुश रहते हैं।
हमारा दायरा यानि वो घेरा जिसमें हम अपना ज्यादा वक्त गुज़ारते हैं घर हुआ दफ्तर हुआ या फिर दोस्त ... इनके साथ ,इनके पास रहने से हमे किस चीज़ का एहसास होता है। किसी बंधन का, किसी कर्ज़ का, किसी फर्ज़ का, किसी बोझ का, या फिर खुशी का ... अगर खुशी का एहसास नहीं है तो सच मानिये आपका रिश्ता खतरे में हैं ।
अब इससे बड़ा सवाल ये उठता है आपको कैसे पता चले कि आप खुश हैं ... जी कई लोग बनावटी और दिखावे को ही खुशी का दरवाज़ा समझते हैं और कई बार कई तरह से कई ढंग से उससे आते जाते हैं इस मुबालते में कि वो खुश है और उन्होने दूसरों को भी खुशी दी पर ऐसे लोग बहुत जल्द दूसरा दरावाज़ा भी ढूंढते लेते हैं क्योकि खुशी उनके लिये सिर्फ दुनियादारी है।
खुशी संतुष्ठी है क्या..
खुशी एहसास है क्या
खुशी धोखा है क्या
खुशी जीने ज्ज़बा है क्या
खुशी जीने का ढंग है क्या
या फिर खुशी है ही नहीं सब धोखा है...।।

MRS IRSHAD

मिसेज़ इरशाद
लखनऊ के चौक की तंग गलियां और गलियों में धूमती बिटन ..जहां से निकलती मुल्ला मौलवी ब्रुके पहने औरतें या फिर चौहराये पर खड़े लखनऊ के शौदे.. सभी कान में फुस से कहते रियासत की लड़की ज़रूर कोई गुल खिलाए गी।..शायद बिटन की चंचलता तेज़ तरार होना बिना बाज़ू का कुर्ता पहनना और लड़कों की साइकिल चलाना वो भी ऐसे मौहल्ले में जहां औरतों ने सिर्फ मौहल्ले के सब्ज़ी वाले या कसाई के अलावा किसी और गैर शख्स से बात ही न की हो...पर बिटन सब से जुदा और हट के है पर हां इस गलतफहमी में मत रहिए की बिटन पढाई में बहुत अच्छी होगी परिवार वाले बहुत मॉर्डन होगें अब्बा तालिम के समर्थक होगें..ऐसा कुछ नहीं बिल्कुल नहीं..
रियासत तो पांच वक्त के नमाज़ी ज्यादातर वक्त उनका मजलिस मातम रोज़े नज़र नियाज़ में गुज़रता और खाली वक्त मिलता तो वो इस परेशानी में निकल जाता की पांच पांच लड़कियों की शादी कैसे होगी.... .या मौला कोई मौज्ज़ा(चमत्कार) दिखाओ..या इमामे ज़माना तुम्ही अपना करिशमा करो..खैर करिशमा तो वक्त के साथ हो ही जाता है उनमें अगर इन सब को ज़हमत भी न दी जाये तब भी काम तो अपने समय पर ही होता है खैर ये तो आस्था की बात है।.... इस को छोड़ कर देखते है बिटन क्या कर रही है...
नूरूल्ला आटे वाले से बिटन का हंसी का दौर लगा हुआ अपने आंखों के इशारों से उसके मन को टटोल रही हैं नूरूल्ला भी शहर के नंबर वन छीछोरा में से एक है काली शक्ल फैली नाक पीले दांत और बाकी जगह आटा लगा रहता है .. इनकी दोस्ती कहे या दिल्लगी पर दोनो मुनाफे में ही रहते हैं ।बैलट नूरूल्ला से कोई लड़की बात करे ये तो उसने क्या अल्ला मियां ने भी नहीं सोचा होगा ..और इसी बहाने बिटन उससे 20-25 किलो आटा ले आती इतना आटा की रियासत मियां के दादा ने भी न सोचा था..। पर मौहल्ले मे बातें खूब होतीं हैं ... बिटन की मां सुलताना दिल पकड़ कर बैठ जाती हैं और अपने हाल और लडकियों के नसीब को अपना मुकद्दर मान चुकी हैं...
इस बार मोहरर्म में अपने घर में अज़ाखाना सजाते वक्त दिल से रो पड़ी ।आंसू रुकने का नाम न ले बस मौला या मौला लड़कियों की शादी करा दो .. लड़किया सच में कितनी बोझ है और बिना शादी के अपने घर मे कितना बड़ा गुनाह हैं..। ये कोई सुलताना से पूछें ..
इस बार इमामबाडे में अशरा पढ़ने मौलाना इशरत आए हैं । जनाब कद 6 फुट का क्या नूरानी चेहरा है और भई क्या मसायब पढ़ते हैं बस पूछो मत आंखों से आंसू नही रूकते और सब से अहम बात वो कुंवारें हैं ..बस फिर क्या.. ..चौक मे जितने भी माकान थे और वहां रहने वाले कुंवारी लड़किया के अम्मा अब्बा और भाईजान..। मौलाना साहब को अपने घर बुलाने में आमादा हो गए..मौहरर्म में रिश्ते की बात तौबा तौबा .. पर भई बात नवीं में हो जाएगी पहले मौलाना साहब की खातिरदारी तो करो ...सब जुटे थे मौलाना इशरत को अपनी तरफ खीचनें के लिए ..
शिया लड़कियों को रोटी सब्ज़ी बनानी न आती हो तो चलेगा पर हां मजलिस मातम करना नौहा हदीस पढ़ना जरूर आना चाहिए बस जो मिलता अपनी लड़कियों की तारीफ में सब से पहले यही कहता बहुत अच्छा मरसिया पढ़ती हैं..और जनाब हदीस कुरआन की आयतों पर पढती हैं। हमने तो भईया इन्हे बच्चपन से ही सब सिखा दिया है बस इमाम हुसैन की दुआ है... सब आता है .।
शहर में जहा तैयारियां हो रही थी मौहरर्म के ग़म से रिश्तों के रास्ते निकाले जा रहे थे । वहीं सुलताना बेग़म अपने घर के छोटे अज़ाखाने में बैठी अपनी बेटियों से नौहा पढ़ने को कहे रही थी घर में तबरूक़ न होने की वजह से खुद ही मां बेटियां मातम कर लेती है ..।बिटन ने नौहा उठाया वाक़ई आवाज़ में जो दर्द या फिर कशिश हैं जो भी सुने बस रूक जाये और बिना सुने आगे जा न सके ..।
सामने रह रहे मौलाना इशरत के कानो में भी आवाज़ गई तो उन्होने घरवालों से पूछा कौन बीबी नौहा पढ़ रही हैं ... उस घर की औरत ने कहा बस... मौलाना साहब आवाज़ पर मत जाइये आवाज़ ही अच्छी है बाकी तो इनके घर और इस लड़की के बारे में कुछ भी बताने को ख़ास नहीं.... अल्लाह बस ..मुंह न खुलवाए तौबा तौबा..मौलाना साहब ने सिर झुका लिया ..।
पर मौहल्ला वो भी चौक का..... बात निकली तो दूर तक जाती है और रियासत मियां का घर तो एकदम सामने हैं.. अरी सुलताना मौलाना इशरत बिटन के बारे में पूछ रहे थे ..क्या आवाज़ है कहे रहे थे ..पर नसीम ने, तौबा-तौबा क्या क्या कहा बिटन के बारे में....
सुलताना तो रोने लगी पर बिटन इतनी देर में नसीम के घर पहुंच गई और जो चिल्लाई और गाली गलोच किया ..तो बस सब ने दांतों तले उंगलियां दबा ली।
मौहरर्म खत्म हुआ अज़ाखानों को समेटा गया .. और उधर मौलाना इशरत का रिश्ता रियासत मियां के घर पर आ गया .. पर मसला है मौलाना साहब ने तो बस आवाज़ सुनी थी शक्ल तो देखी नहीं थी तो ऱिश्ता भेजा किस के लिए...
... मेरे लिए अम्मा ....मेरे लिए बिटन बोली... मैं.... ही करूगीं मौलाना इशरत से शादी ... अरे कम्बखतमारी ज़रा तो शर्म कर ले... दो-दो बड़ी बहनें बैठीं हैं और तुझे शादी की पड़ी है... न न हम नहीं मानेगें मौलाना साहब से हम ही शादी करेगें सब अपनी किस्मत लेकर पैदा होते हैं....
इतना सुनना था कि घर में रोना पीटना शुरू हो गया और लगा की मौहरर्म अभी खत्म नही हुआ ..अज़ीज़ा और मुन्नी खूब रोयीं...। हाय-हाय हम तो बिटन को कितना प्यार करते हैं और वो हमारा ही घर उजाड़ रही है .।
बिटन चिल्लाई अरे ये हर्राफापन हमें न दिखाओ.. हम ही करेगें इशरत से शादी ..। बस इतना सुनना था रियासत मियां जो अब तक खामोश बैठे थे न जाने कहा से उनमे गैब से ताकत आई और जूती लेकर बिटन पर टूट पड़े और मुंह पर जो बिटन के जूतियां बजाई की उसका मुंह लाल होकर नीला पड़ गया ।
... और ये नीलपन अज़ीज़ा की शादी के बाद ही खत्म हुआ .. मौलाना इशरत सच में काफी शारीफ थे देहज मे कुछ न लिया औऱ न ही कोई ज्यादा बराती लाये..।
शरीयत के हिसाब से शादी की जैसी नबी ने फातमा की शादी अली से की थी ..और रियासत मियां की ज़िम्मेदारी को समझा और जल्द ही मुन्नी का भी रिश्ता करा दिया।..... ..बिटन तो टूट ही गई थी ..घर के मसले में बोलती ही न थी ।
उसके दिमाग में अपने घरवालों को सबक सिखाने की गहरी साज़िश चल रही थी। नूरूल्ला से उसने खूब दोस्ती बढ़ा ली थी .. औऱ मुन्नी की शादी के बाद एक रात नूरूल्ला के साथ भाग गई... शहर में खबर आग की तरह फैली शिया सुन्नी का दंगा भड़क गया पुलीस फोर्स लगी सब ने रियासत को खूब कोसा कैसी लड़की पैदा की नाक तो कटाई कितनो की जान ले ली ..
दो दिन के बाद गोरखपुर से दोनो को पकड़ के लाया गया ।बिटन की खूब कुटाई हुई.. बिटन के मामू ने बहन सुलताना से कहा अब जैसा मैं कहूं वो करो नहीं तो इसके मारे किसी का भी ब्याह न होगा।
उन्होने बताया दिल्ली में एक लड़का सरकारी नौकरी में है ।मां बाप कोई नहीं हैं अकेला है बहुत होशियार है बहुत तरक्की करेगा असगर इऱशाद नाम है उसका । अच्छा ये तो बहुत उमदा रिश्ता है.. मौलाना इशरत बोले ....पर वो ..क्या वो ..वो सैय्यद नहीं है हमारी तरह .सैय्यद नहीं.... न न रियासत मियां में भी जान आ गई । भई गैर सैय्यदों में न करेगें शादी ..सैयद की लड़की गैर सैय्यदों के यहां खुश नही रहती । ये सुन कर मामू भड़क गए सैय्यद की लड़किया पूरे मौहल्ले मे छूछवाती फिरें... वो चलेगा पर गैर सैय्यदों में नहीं... अभी सुन्नी लड़के साथ मुंह काला करवा कर लौटी है ये भी तो देखो कौन सैय्यद करेगा तुम्हारी बिटन से ब्याह बडे आए सैय्यद.... कहीं के...। मामूजान जाने लगे सब सिर झुका कर बैठे थे तभी बिटन की आवाज़ आई मामूजान मै करूगीं शादी सबने बिटन की तरफ देखा ..और फिर सिर झुका लिया ।
लखनऊ में तो शादी नहीं हो सकती थी इसलिए बहराइच में मामू के घर ही लड़के को बुला कर निकाह कर दिया गिनती के कुछ रिश्तेदार थे असगर इरशाद की दूर की एक फूप्पी थी बस और कोई नहीं असगर इरशाद भी खुश थे एक तो बिटन खूबसूरत दूसरी सैदानी । 5-फुट की बिटन को 4-फुट के असगर ही मिलने थे। किसी ने मज़ाक मे कहे ही दिया.... दिलासा देने के लिए समझ लिजिये... कहा चलो अमिताभ और जया की जोड़ी को उल्टी कर दो ...
खैर सारी रस्मों के बाद रूखसती का वक्त आ गया ।मामू के लड़के ने आज़ान दी और बिटन ने आंसूओं की झड़ी लगा दी सारी बहने भी बहुत रोयीं..
बहराईच से दिल्ली की कोई सीधी ट्रेन न होने के कारण पहले सब लखनऊ पहुचें जैसे ही अमीनाबाद बस अड्डे पर उतरे किसी ने आकर खबर दी की नूरूल्लाह को करंट लग गया और उसकी मौत हो गई...दिल्ली की ट्रेन रात की थी इसलिए सब घर पहुचें गली में भीड़ थी नूरूल्लाह की मौत इसकी वजह थी..।लोगों ने इनके परिवार को बहुत गंदी नज़र से देखा सब चुपचाप घर में आ गए..।
पहले बिटन को असगर कुछ महीने बाद ले जाने वाले थे वहां उसके रहने के लिए कुछ अलग इंतज़ाम करते लेकिन रियासत मियां ने कहा असगर मिया अपने साथ ही ले जाओ जहां रहते हो वही रह लेगी । असगर इरशाद तो शरीफ आदमी थे मना करने का कोई सवाल नहीं उठता ...। बेचारे खुद ही उठ कर स्टेशन गए और दो टिकट लेकर आ गए... ज्यादातर वक्त सबका खामोशी से गुज़रा पर हां दामाद के लिए आज क़ोरमा और बिरयानी बनी थी... वो भी बकरे के गोशत की ।
पूरा दिन यूहीं गुज़र गया रात आ गई ..। बिटन भी जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। लंहगा उतार दिया था और नया चमकीला सूट पहन लिया ..स्टेशन पर सब छोड़ने आए ।गाड़ी में बैठने की जगह नहीं मिली इसलिए टायलेट के पास ही चादर बिछा कर दोनो बैठ गए ..ट्रेन चल दी ....पर अब बिटन नहीं रोयी ..असगर को नींद आ गई वो बिटन के कंधे पर सिर रख कर सो गया और बिटन अपनी आने वाली ज़िन्दगी किस पटरी पर चलेगी इस बारे में सोच रही थी ..रात कट गयी और दिल्ली आ गयी..।।
पहली बार चौक की गलियां छोड़ कर किसी बड़े शहर को देखा था और वो भी दिल्ली जिसका ज़िक्र सिर्फ लोगों और दुकानदारों से ही सुना था । आज दिल्ली में खुद को पाकर उसे अपने पर घमंड हो रहा था ..।असगर मियां बोले चलिए इधर से बस मिलेगी सुल्तानपुरी की...। कोई सीधी बस नहीं जाती दो बसें बदलनी पड़ेगीं। ... भरी हुई बस और बस में बिटन , बिटन के शौहर और उनके साथ ही दिल्ली के लुच्चे ..पर बिटन खामोश ही रही ..बस बदली दूसरी बस खाली थी खिड़की पर बैठी बिटन बाहर देख कर बहुत खुश हुई...। इसके बाद इक्का करके सुल्तानपुरी की जलेबी चौक पहुचें और फिर पैदल अंदर मकान में, मकान क्या कहें एक कोठरी थी खैर बिटन को इन सब की आदत थी पर हां पाखाना और गुसलखाना बाहर था जिसमें आसपास की कोठरी के लोग भी जाया करते थे...।
पानी नहीं था असगर मियां दूर हैंडपम्प से एक बालटी पानी लाये और पडोस में रहे रही माकान मालकिन को बता भी दिया..।
बिटन हाथ-मुंह धोकर कमरे में आई तो देखा आसपड़ोस की औरतें आयी हुईं थी सबने असगर मियां की तारीफ की कहा लखनऊवाली तो बहुत खूबसूरत है ..तब से बिटन का नाम लखनऊवाली ही पड़ गया ... आसपास के लड़को को भी खबर मिल गई कि मियां नाटे की लुगाई टनटनाटन है ..आए दिन गली के चक्कर काटते रहते ।
बिटन भी इशारा समझती थी और असगर भी ..पर इस खामोशी से एक महीना कट गया और असगर मियां ने अपनी पहली तन्खाह बिटन लखनऊवाली के हाथ में दी । पहली बार पूरी उम्र मे उसके हाथ में पैसे आये थे जो उसके अपने थे कोई पूछने वाला नहीं था किसके हैं ... या कहां से चुराए हैं,कोई टोकने वाला भी नही था ।... जी, आज बकरे को गोशत लाओ कोरमा और बिरयानी बनाओंगी साथ ही दूध और चावल भी लाना खीर भी बनेगी....असगर ने कहा हां ठीक है ...कल इतवार है सिनेमा और दिल्ली देखने भी चलेंगे। बढ़िया खाना खाया ...बिटन के हाथ में ज़याका तो था ही । दूसरे दिन दिल्ली देखी और सिनेमा भी ...।
बिटन को अब अच्छा लगने लगा था ..और लोग उसे लखनऊवाली कहे ये सुनना भी उसे बहुत अच्छा लगता था । बीच में मामूजान भी आए..बिटन खुश थी और मामू का शुक्रिया भी अदा किया ,,, । मामू जाते जाते असगर से कहे गए भई अब खुशखबरी भी सुनाओ..असगर ने सिर झुकाकर मुस्कुरा दिया..
बिटन पेट से हो गईं बाकि तो सब ठीक था पर बाहर पाखाना और गुसलखाना होने की वजह से बड़ी दिक्कत थी कई बार आसपड़ोस वालों ने बदतामीज़ी भी की। असगर मियां ने खुद पाखाना और गुसलखाना साफ किया..सरकारी अस्पताल में जाना आना नौकरी से छुट्टी बहुत परेशानी ..लोगों ने कहा अरे लखनऊ वाली की बहन या मां को बुला लो..।असगर मियां ने बिटन से पूछा बिटन ने साफ मना कर दिया असगर चुप हो गए।....पर वक्त के साथ रोटी बनाने की भी समस्या होती जा रही थी । डाक्टरों ने बिटन को आराम की सलाह दी ।हार के मां को बुलाना ही पड़ा ..पर बिटन को तो मौका चाहिए था एक आद दिन तो सब ठीक चला। फिर तो बिटन अपने शरीर के दर्द को भूल गई बस याद रहा दिल और दिमाग का दर्द जो उसकी मां ने दिया था । फिर क्या हाथ धो कर अपनी मां के पीछे पड़ गई..।
हम तो गैर सैयय्द है आवारा हैं... हमने तो पूरे लखनऊ का मुंह काला किया है। बड़ी आई हमारी मां बन कर ..मां बेचारी खूब रोती एक बार तो मां का सब्र टूट ही गया वो भी खूब लड़ी ..बस तनाव बहुत हो गया मां ने दामाद से हाथ जोड़े और कहा हमें लखनऊ की ट्रेन में बिठा दो ..बिटन ने कहा कोई ट्रेन में नहीं बस पर चढा कर आ जाओ ।....हमारा मियां गैर सैय्यद है कोई नौकर नहीं ..की ...सबकी चाकरी करेगा..।
असगर मियां तो बीवी के गुलाम थे बस पर बिठा कर आ गए..बेचारी मां कैसे एक अंजान शहर से अपने लखनऊ पहुचीं बस मुंह से या अली मदद कहती रहीं ..और रोती रहीं कैसे मिन्नते करके ट्रेन का टिकट लिया बेचारी कितनी परेशानी से वापस पहुचीं अपनो को कोसते हुए.. हाय कैसी लड़की पैदा की मैने।
आखिरी वक्त में मकानमालकिन ही सहारा बनी असगर मिया ने सुसराल फोन कर बताया की लड़की हुई है। मां सुलताना ने कहा मुबारक हो पर अल्लाह उसे बिटन की तरह न बनाए भई हम आ न सकेगें..। असगर ने बिटन को बता दिया पहले तो अपनी मां को खूब बुरा भला कहा फिर थोड़ा संभली तो असगर मियां की क्लास लेनी शुरू की...
किसने कहा था तुम्हें फोन करने को मेरी तो किस्मत ही खराब थी कि तुमसे शादी की ...सही कहते थे अब्बा गैरसैय्यादों से शादी नहीं करनी चाहिए... बौड़म आदमी मिला है मुझे... बेचारे असगर कुछ न बोले मकानमालकिन भी मौका देख कर निकल गई ..पर असगर मियां की आंखों में आसू थे।
दफतर में असग़र मियां ने मिठाई बांटी पर दोस्तों और बॉस ने कहा मिठाई से काम नहीं चलेगा भई ..बिरयानी खिलाओ वो भी भाभी के हाथ की..।असगर मियां घर आए तो हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे अपनी बेग़म से कुछ कहने.. पर बिटन की आंखे बहुत तेज़ थी उसने परख लिया की मियां के दिमाग में कुछ चल रहा है। पूछा क्या खिलाई मिठाई दोस्तों को.. और साहब को ..बस इतना पूछना था कि असगर मियां तो कुत्ते की तरह लोट गये ..ऐ बेग़म सब कह रहे थे कि...क्या..की भई हम सब बिरयानी खाएगें..साहब भी कह रहे थे ... बिटन मुस्कुराई मुस्कुराहट में अपनी हैमीयत का एहसास था ।
बोली दो किलो बड़े का और आधा किलो बकरे का गोशत ले आना ..असगर बोले बेग़म दो अलग अलग गोशत क्यो... बिटन बोली बौड़म बॉस को बकरे की बिरयानी खिलाओ तभी तरक्की होगी .. असगर समझ गये उन्हे अपनी किस्मत पर नाज़ हो रहा था की कितनी समझदार उनकी बीबी है..।
जब दूसरी बेटी हुई और उसके होते ही असगर मियां की तरक्की भी हो गई पर अब बिटन का दिल इस छोटी कोठरी में नहीं लगा रहा था और तीन साल निकल गए मौहरर्म और मजलिस किये हुए। बीच में लखनऊ भी गयी पर अपने घर नही गयी। असगर मिया को गेस्ट हाउस मे कमरा मिला था बहने और बाप मिलने आये और चुपचाप चले गये बिटन कुछ न बोली न उनकी तरफ देखा न कुछ कहा असगर मियां ने ही उनसे बात की।
लखनऊ जाने का मकसद था ग़ार की दरगाह पर कलावा बांधना और हज़रत अब्बास के रोज़े पर दुआ मांगना की अच्छा घर मिले और एक लड़का हो जो आप का अलम उठाए ...शायद इस बार मौला ने सुन ली सुलतानपुरी छूट गया और यमुना पार में एक बड़ा किराये का मकान भी मिल गया..जहा बिटन ने छोटा सा इमामबड़ा सजाया और अपनी बिरादरी को बुलाकर पहले हदीसे किसा कराई और एक हफ्ते बाद एक मजलिस भी कराई जहा तब्बरूक़ में शालें और बर्तन बांटे और अपना परिचय मिसेज़ इरशाद के नाम से कराया..। बिटन लखनाऊवाली अब मिसेज़ इरशाद बन कर हिन्दुस्तान की राजधानी में शान से रहने लगी।।और असगर इरशाद भी खुश है इतनी समझदार बीवी और तीन बेटी और तीन बेटों के बाप बनकर ।
मेरा मानना हैं जिन्दगी केवल खुशियों का पल तो नहीं है ... जब खुशी आपके दामन में आती है तो ये लिखवाकर कि ग़म भी एक दिन आएगें ज़रूर... और अचानक असग़र इरशाद की तब्बीयत बिगड़ गई ..इतवार का दिन था करीब सवा बारह बजे बाथरूम से नहा कर निकले .तो पसीने में तर थे ... बिटन ने सोचा की पानी है ..पंखे के नीचे बैठे..आंखें बंद होने लगी ...सब लोग टीवी देख रहे थे ..अचानक असग़र गिर पड़े .. बड़ी बेटी ने देखा... और चिल्ला पड़ी... डैडी ..बिटन किचन में थी दौड़ कर आई.. जाधों पर सिर रखा .एक कोहराम मच गया पड़ोस वाले भी आगए... जल्दी से ऑटो को बुलाया गया ..पास के नर्सिंग होम लेकर गए तो डॉक्टरों ने कहा पंत ले कर जाओ अटैक आया है ... उन्हीं की ऐम्बुलेंस में इरशाद को लेटाया गया बिटन और बड़ा लड़का साथ थे बाकी बच्चे घर में पड़ोस की ख़ाला के पास थे ..दुआ कर रहे थे या अल्लाह डैडी को ठीक कर दो ... या हज़रत अब्बास या इमाम हुसैन मेरे डैडी को अच्छा कर दो...
वक्त पर दवा और दुआ न पहुचें तो दोनो बेकार हैं... पंत के डाक्टरों ने मना कर दिया बिटन तो समझ नहीं पाई..पैरों तले ज़मीन निकल गई ..आंखें खुली की खुली रहेगी.सांस न जाने कहां चली गई..बदन सुन हो गया..कुछ अल्फाज़ नहीं निकले ..बस बड़े बड़े दीदे फाड़ कर डाक्टरों को घूर रही थी ... कहां चले गये ,क्यों चले गये ..क्या हो गया किस गुनाह की सज़ा मिली मुझे...पड़ोस से आए लोगों ने उसे बिठाया की आपको अभी बहुत लंबा सफर तय करना है बच्चों को संभालना है ज़रा होश में रहिए.. बड़े लड़के की आंखे भरी थी कभी मां को देख रहा था कभी बाप की लाश ..। डॉक्टरों ने कहा आप लाश को ले जाए अगर देर करेगें तो फिर काग़ज़ी कार्यवाई.पोस्टमॉटर्म..और भी बहुत कुछ... ।लोगों ने कहां ठीक है मिसेज़ इरशाद से पूछ लेते हैं ..बिटन ने कहा जैसा आप सब ठीक समझों.. ।
एम्बुलेंस को वापस घर की तरफ मोड़ा गया ... एक आदमी स्कूटर पर पहले ही मौहल्ले में जाकर खबर दे दी कि इरशाद साहब नहीं रहे.. बिरादरी के लोग इकट्टा होने लगे घर में बच्चों ने रोना शुरू कर दिया बड़ी बुढ़ी औरतें समझाने लगी ...।एम्बुलेंस घर पर रूकी तो एक दर्दनाक मंज़र था .. वो पल जो हर किसी की ज़िन्दगी में ज़रूर आता है कहीं पहले तो कहीं बाद में ..लाश को नीचे उतारा गया औरते बिटन को कमरे में ले गई मर्दो ने लाश को गुसुल देने के लिए अलग कर दिया गया मौलाना ने पूछा क्या कोई इरशाद साहब का भाई बाप और कोई रिश्तेदार है जिसका इंतज़ार किया जाए या यहीं पर दफनाया जाएगा उन्हें ..बिटन बैगम ने कहा कोई नहीं आप लोग ही कर दो बेटी ने मां से कहा मम्मी नानी नाना खालू... बिटन ने कहा आ जायेंगे जब उन्हे आना होगा... ।
पर दफनाने से पहले मसला था ..जैसा आप सब जानते हैं कि असग़र इरशाद गैर सैय्यद थे ..तो क्या सैय्यद उनकी गवाही दे सकते हैं.. शिया समुदाय में मरने के बाद कुछ लोग दस्तख्त करते हैं कि हां मरने वाला मोमिन था यानी नमाज़ रोज़ा और मजिलस मातम करता था ... पर सैय्यद और गैर सैय्यद का मसला यहां के लोगों के लिए नया था .. बिरादरी के बुर्ज़ग के एक रिश्तेदार ईरान में मौलवियत पढ़ रहे थे उन्हे फोन किया गया ..मसला बताया गया कुछ देर के बाद का उन्होने वक्त दिया ..इतनी देर में बिरादरी की औरतों मे खुसुर फुसुर और आदमी में मसलै मसायल का ज़िक्र आया कुछ ने लखनऊ भी फोन खड़का दिया ... बाद में बात साफ हुई गवाही कोई भी दे सकता है .. खैर जब असगर इरशाद का ज़नाज़ा उठा तो बिटन से रहा नहीं गया चीख़ मार कर मय्यत को पकड लिया ... ऐसे कैसे मुझे छोड़ कर जा रहे हो ..वाकई..वो मंज़र बहुत दर्दनाक होता जब हमें पता होता है आज जो ये घर से जा रहा है फिर कभी वापस नहीं आयेगा... असगर इरशाद को ले जाया गया,दफन कर दिया गया धीरे धीरे बाकी लोग भी चले गए..ये रात बिटन और उनके बच्चों के लिए कयामत की रात से कम नहीं थी ..बिना असग़र के पहली रात.. बच्चों की बिना बाप के पहली रात.... ये रात ऐसी होती है जिसमें हर गुज़रा लम्हा नज़र आता है जाने वाले की हर बात याद आती है ... उसके न आने का दर्द और उसके बिना इतना लंबा सफर ..आज घर में हर कोई रो रहा था अपने अपने कोने पकड़ कर..बाप और पति का ग़म से बढ़ कर और क्या ग़म होगा ...
मैं फिर कहूंगा जिन्दगी सिर्फ खुशियों का पल नहीं होती यहां ग़मों का साया भी साथ चलता है ..और इस साये को दूर करने के लिए.. इंसान को ही उठना पड़ता और हिम्मत दिखा कर अपनी आगे की मंजिल को तय करना होता है ..
बिटन पर बड़ी ज़िम्मेदारी थी छह बच्चे और अपने को संभालना... तीजे की मजिलस में इऱशाद मियां के ऑफिस से अफसर भी आय़े थे बिटन से मिले और कहा जब आप इन सब से फारिक हो जाएं तो ऑफिस ज़रूर आईये.. हफ्ते भर में सब रिश्तेदार चले गए हां इस बार बिटन ने किसी से झगड़ा नहीं किया । शायद अब किसी का महत्व उसकी ज़िन्दगी में नहीं रहा सिवाए अपने बच्चों के भविष्य को छोड़ कर ।
आज बहुत दिनों के बाद बिटन घर के बाहर निकली थी साथ में बड़ा लड़का आज इरशाद मियां के ऑफिस से कोई चेक मिलना था... साथ में पडोस के शर्मा जी को भी ले लिया पढ़े लिखे हैं काग़ज़ी कार्रवाई के लिए ...
ऑफिस पहुचें तो सरकारी दफ्तरों के हाल की तरह था पर हां इरशाद मियां का रव्यैया इतना अच्छा था कि मिसेज़ इरशाद से मिलने ज्यादतर सारे कर्मचारी आ गए ..। तभी किसी ने उनके कागज़ों को पूरा करने में हो रही देरी के बारे में बताया कहा उन्होने किसी का टेंडर पास किया था वो कंपनी भाग गई। सब ने एक दूसरे का मुंह देखा.... बिटन को कुछ समझ में नहीं आया ....ये सारी बातें बिटन के लिए नई थी...
तभी चपरासी आया बिटन से कहा साहब आपको बुला रहे हैं। बिटन शर्मा जी से बोली आप भी चलिए... बॉस ने बिटन का उठ कर स्वागत किया मिस्टर इरशाद की तारीफ की पीएफ का चेक तैयार था उन्हे दिया ..और साथ में कहा कि आपको पता ही होगा इरशाद असग़र पर एक केस है कुछ एक टेंडर के घपले का इसलिए उनकी पेंशन और फंड अभी रोके हुए हैं ...केस चल रहा जबतक चलेगा तब तक पेंशन और फंड नहीं मिल सकते है हम कोशिश कर रहे हैं पर आप जानती हैं सरकारी मामला है..बिटन ने शर्माजी कि तरफ देखा.शर्माजी ने कहा सर इनके तो छह बच्चे हैं कैसे ज़िन्दगी कटेगी..अगर पेंशन नहीं तो कुछ इनके लिए नौकरी का ही इंतज़ाम कर दिजिये.बॉस ने कहा इसके बारे में सोच सकते है वैसे आप कहां तक पढ़ी हुई हैं... बिटन तो खामोश हो गयी धीरे से बोली बस साहब जो धर में पढ़ लिया उतना ही ..कमरे में खामोशी छा गई..बॉस का इशारा था क्या हो सकता है ..तीनों उठ कर आ गए...रास्ते में शर्मा जी ने कहा आपका किसी बैंक में एकाउंट है .. सारे शब्द बिटन के लिए नए थे.. लड़का बोला नहीं मम्मी तो कहीं निकली ही नहीं ..शर्माजी ने पूछा और पापा का, लड़का हां पास के ही सरकारी बैंक में है .. बातों बातों में घर आगया शर्माजी बोले पापा के बैंक की पास बुक निकाल लेना और मम्मी की फोटो भी रख लेना न हो तो खिचवा लेना आज शुक्रवार है कल आधे दिन तक बैंक खुलेगा मेरी जान पहचान है खाता में खुलवा दूंगा..।
घर में कदम रखा तो सारे बच्चे पास आगए..छोटे दोनों लड़के स्कूल गए हुए थे । बड़ी लड़की ने अरहर की दाल और चावल बनाए हुए थे ..वहीं इमामबाड़े के कमरे में बैठ कर बिटन खाने लगी बेटा भी खा रहा था ..खाते खाते बिटन की आंखों से आंसू निकलने लगे आंसू को रोकना चाहा.. आंसू आवाज़ में बदल गए.. पर इस बार जो आवाज़ निकली थी वो इरशाद मियां के जाने के ग़म की न हो कर औरत की बेबसी की थी किस तरह एक औरत आदमी पर निर्भर रहती है ..बिटन के रोते ही बच्चे भी रोने लगे दोनो बच्चे जो स्कूल से आये थे । वो भी घर का ये मंज़र देख, खुद भी रोने में शरीक हो गये।
रोना राहत लेकर आता है और राहत उम्मीदें जगाता हैं और उम्मीदों से हौसला पैदा होता है । बिटन में हौसला आ गया था साथ ही ये समझ भी पैदा हो गई थी कि उसे ही सब करना है । शाम को बिटन ने फोटो की दुकान पर जाकर तस्वीर खिचवाई.। इस उम्मीद के साथ लेटी कि सुबह से जिन्दगी की नई जंग लड़नी है ।
सुबह शर्माजी आ गये थे बेटे ने असगर मियां की पुरानी पास बुक ले ली थी मृत्यु.प्रमाण पत्र और घर का राशन कार्ड साथ में बिटन की तस्वीर । सब बैंक पहुचें । मैनेजर के आने में देर थी । सब बाहर सोफे पर बैठे थे तभी बैंक में बिरादरी के दोनो आदमी भी आ गए बैंक से पैसे निकालने उन्होने बिटन को शर्मा जी के साथ देखा न सलाम हुआ न दुआ अपना पैसा निकाला और चले गए। बिटन को भी लगा कि इन्होने ऐसा बर्ताव क्यों किया है पर जिन्दगी में अपने ग़म कम हैं कि दूसरों कि नज़रों और रवैय्या का ख्याल रखा जाये ।
बैंक मैनेजर आ गये थे सारे काग़ज़ात पूरे थे शर्माजी से जान पहचान थी और असग़र मियां को भी जानते थे इसलिए खाता खुलने में कोई परेशानी नहीं हुई..बिटन को साइन करना नहीं आता था तो उनका अंगूठा लगवाया गया । और बिटन इरशाद का बैंक खाता चालू हो गया । पीएफ का चेक डाला गया और लगा कि ज़िन्दगी संभल गई।
मुझे नहीं पता की अमीरों के लिए खुशी का क्या मतलब होता है पर हां हिन्दुस्तान की करीब आधे से ज्यादा जनसख्या छोटी छोटी चीज़ो में खुशियां और अपनी कामयाबी ढ़ूढ़ और समझ लेती जिसे लेकर ज़िन्दगी को आगे बढ़ा लेती है।
हकीकत को जितनी जल्दी इंसान समझ ले वो उसके लिए बेहतर है और जीवन को सही राह पर लाने के लिए बेहतर है । पीएफ के पैसे कब तक चलेगे छह बच्चे बच्चियां बड़ी होगीं पढ़ाई लिखाई और हर तरह के खर्च। बेटे से बिटन ने कहा जाकर शर्माजी को बुला ला । बेटा गया दरवाज़ा शर्माजी की बीवी ने खोला बेटे को देखकर अजीब सा मुंह बनाया । बेटा बोला अंटी अंकल हैं मम्मी ने बुलाया है ।शर्माजी की बीवी ने शर्माजी को आवाज़ लगाई शर्माजी आगए। बिटन के लड़के से कहा चलो मैं अभी आता हूं... ।बेटा चला गया शर्माजी बीवी ने कहा अजी जल्दी आना अच्छा नहीं लगता आपका बार बार जाना ..अरे शर्माजी ने कहा कैसी बाते करती हो किसी विधवा की मदद करना कोई ग़लत नहीं है ।कहे कर शर्माजी चले गये ।
बिटन ने शर्माजी से घर का हाल बताया कहा अब गुज़ारा होना मुश्किल हो रहा कल ऑफिस चल कर पेंशन की बात कर लेते हैं और अपनी नौकरी की भी । शर्माजी कहते हैं हां हां क्यों नहीं मैं कल सुबह ही आ जाता हूं और चल बेनर्जी जी से बात करते हैं। शर्माजी घर आये बीवी को बात बतायी बीवी ने मुंह बनाया कहा धर में इतना काम है और आपको घूमने की पड़ी रहती है शर्माजी ने कहा अरे भई किसी का काम आपके जाने से हो जाये तो इसमें बुरा क्या है ।
सुबह शर्माजी बिटन और बिटन के बड़े लड़के साथ ऑफिस के निकले तभी शर्माजी ने कहा बहनजी बड़ी लड़की को भी ले लिजिये बिटन ने पूछा क्यों शर्माजी ने कहा बात करने और समझाने में आसानी होगी .बड़ी लड़की भी तैयार हो गई और सब असगर मियां के ऑफिस पहुच गये ।
कहते हैं दुनिया वक्त के साथ सब भूल जाती है ..या फिर ये कहें कि वक्त हमे अपने आप में इतना मसरूफ कर देता है कि दुनिया कहां तक पहुच गई इसका हमें अंदाज़ा ही नहीं होता।उन्ही को इसकी पीड़ा सहनी पड़ती है जिस पर बीती होती है ।असगर इरशाद अब एक पुरानी कहानी हो चुके थे इसलिए ऑफिस में लोगों के ज़हन में बाते धुंधली पड़ गयी थी ।इसबार काफी इंतज़ार कराया बॉस ने चपरासी भी सही से नहीं बोला । पर जब वक्त की मार आप पर पड़ी है तो आपको ही सहना पड़ेगा ।इंतज़ार खत्म हुआ सब कमरे में गये पूछा क्या हुआ पता चला मामला अभी चल रहा है बिटन को रोना आ गया शर्माजी ने कहा साहब कैसे पालेगीं छह बच्चों कुछ इनकी नौकरी का ही इंतज़ाम कर दिजिये . बॉस बोले देखिये ये कुछ पढ़ी लिखी तो हैं नहीं बच्चे छोटे हैं उन्हे नौकरी दे नहीं सकते ।
हां फोरथ टाइप कैटेगरी की नौकरी करनी है तो मैं बात कर सकता हूं.. बिटन को समझ में नहीं आ रहा था उसने पूछा जी करना क्या होगा .उन्होने साफ कहा पानी पिलाना फाइल इधर से उधर ले जाना यही काम होगा बच्चों को बहुत बुरा लगा पर बिटन को फैसला लेना था और वक्त गवाह है उसने कभी भी फैसले लेने में देरी नहीं की ।बिटन बोली ठीक है मुझे मंजूर है मैं करूंगी नौकरी ...कमरे में खामोशी और ये एहसास की मजबूरी इंसान से सब कुछ करा सकती है ।
बिटन अब नौकरी करने लगी थी । सारे काम बड़ी मेहनत और इमानदारी से करती बुरा ज़रूर लगता पर काम तो करना ही था । देखने में मासूम और अच्छा परिवार की झलक लोगों को उससे उसके बारे में जानने के लिये मजबूर करती ।ऐसे ही किसी ने हमदर्द ने कहा आप पढ़ाई क्यों नहीं करती अगर दसवीं भी कर लेगीं तो क्लर्क की नौकरी तो लग ही जायेगी।
बिटन के लिए ये ऐसा था जैसे अंधरे में कहीं से एक लौ दिख गई हो पता कर के उसने शाम की क्लास ज्वाइंन कर ली बच्चों ने भी मां का साथ दिया जो समझ में नहीं आता उसे सब बच्चे मिल कर समझा देते ऑफिस में भी पता चला तो वहां भी लोगों ने उसकी मदद की कहते है न आप एक बार कुछ करने की ठाने तो सही रास्ते अपने आप बनते जाते हैं... बहुत उतार चढ़ाव आये कईयों से झगड़ा भी हुआ शर्मा जी बीवी भी लड़ने आ गई उन्हे लगा कि उनके पति को अपने वश में कर लिया है बिटन ने उस शाम शर्माजी की बीवी ने खूब बदतामिज़ी की पर बिटन अब बदल चुकीं थी वो चुप रही कुछ न बोली बस हाथ जोड़ कर कहा बहन अब कभी नहीं शर्माजी को अपने घर आने के लिए कहूंगी ।
बीच में मौलाना इशरत भी आये बड़ी बेटी का रिश्ता लेकर पर बिटन ने कहा पहले अपनी बच्चों की तालीम पूरी करूंगी फिर कोई शादी ब्याह के बारे में सोचूंगी ।
बिटन ने दसंवी पास कर ली इस बार जूनियर क्लर्क के लिए उसका प्रमोशन भी हो गया अब कुर्सी पर बैठना उसे बहुत अच्छा लगता था लोग उसे मैडम कहे ये भी सुनना उसे बहुत पसंद था अपने बच्चों की पढ़ाई में भी वो पीछे नहीं हटी सुना था की मंझली बेटी का किसी सरदार लड़के से दोस्ती है बिटन ने बहुत समझदारी से काम लिया अपनी बेटी को समझाया और उसे अपनी कहानी सुनाई कहा मैं तुझे मना नहीं करूंगी पर ज़िन्दगी कुछ फैसले हमे हमेशा रोने के लिये मजबूर करते हैं दोस्ती बुरी चीज़ नहीं पर शादी ब्याह बहुत बड़ा फैसला होता है ज़िन्दगी जो अभी हमे सुदंर दिखती है इन्ही फैसलों के कराण ज़िन्दगी दोज़ख बन जाती है ।अपने पैरों पर खड़े हो जाऊ कुछ कर लो तब तुम्हारे सारे फैसले सहीं लगने लगें । नहीं तो लोग पीछे नहीं हटेगे ये कहने से कि जो गुल इसकी मां ने खिलाया वो ही बेटी खिला रही है कहते कहते बिटन रोने लगी और साथ ही बेटी भी रो पड़ी पर बेटी को बात समझ में आ गयी।
बिटन फिर उस सरदार फैमली के पास गयी इसबार लड़ने नें के लिये नही समझाने के लिये गयी थी जाकर उनके आगे हाथ जोड़ लिये वो लोग समझदार थे मामला समझते थे पूरा भरोसा दिया कि ऐसा कुछ नहीं है और न होगा जिससे सब की बदनामी होगी ।
असग़र मियां का केस खत्म हो गया था बिटन को काफी अच्छे पैसे मिले थे जिससे उसने ज़मीन लेकर अपना माकान बनाया असगर मंजिल नाम रखा । बच्चों की पढ़ाई में भी खर्च किया ।
वक्त बदलता ज़रूर है जिन्दगी अपनी रफतार से आगे बढ़ती रहती है बिटन सुपरीटेंडट के पद से रिटायर हो रही थी आज ऑफिस में कार्यक्रम था बेटिया अपने पतियो के साथ आयी थी बेटे भी पढ़ कर नौकरी कर रहे थे । सब मां के कार्यक्रम में मौजूद थे ।
फूल मालाओं से मिसेज़ इरशाद का स्वागत किया गया और उनकी तारीफ के पुल बांधे गये और उनसे दो शब्द कहने को कहा ...
बिटन मंच पर आयी तो आंखों में आसू थे कहा मुझे इतना प्यार और सम्मान मिलेगा ये मैने कभी नहीं सोचा था लखनऊ की गलियों में धूमना इससे झगड़ा करना उससे लड़ना कभी यहां कभी वहां वक्त के झोके मुझे किन रास्तों से गुज़र कर यहां तक लाये कई बार टूटी कई बार संभली छह बच्चे बिन पति के ज़िन्दगी मुश्किल था सफर पर चाहत थी जीने की इसलिए सफर का एहसास न हो सका आज में ज़रूर रिटायर हो रहीं हूं पर मेरा ये सफर जारी रहेगा ..तालियों से सब ने उनकी बात से सहमति जताई।
खाने के बाद सब धर की तरफ चल दिये । धर आते ही छोटा बेटा जल्दी से उतरा उसके हाथ में कुछ था उतरते ही उसने उस प्लेट को दरवाज़े पर टांगा सब लोग ज़ोर से हंसे और हंसी में खुशी का इज़हार था सब अंदर गये दरवाज़ा बंद हुआ ।मेरी नज़र नेम प्लेट पर गई लिखा था मिसेज़ बिटन इरशाद ( रिटायर्ड सुपरिटेंड)...