Wednesday, September 21, 2011

इस शाम ऐसे ही

मुझे हर बार
एक बात का ग़म है
मुझे हर रात
उस उस बात का ग़म है..
सुब होते ही खो जाते हैं जब अपने
मुझे बिखरे हुए गुलिस्तां का ग़म है
सजो न पाया मैं कोई रिश्ता
मुझे अपनो को, खोने का ग़म है..
ग़म न करो ऐ ग़मगीन हैदर
इस दुनिया को तुम्हारे आने का ग़म है.।।

Wednesday, September 14, 2011

किसी ने कहा -8

मनुष्य भगवान की सर्वोत्तम कलाकृत्ति है । भगवान ने अपना यह सृजन बड़े मनोयोग और अरमानों के साथ किया है । वे उसे देर तक दयनीय स्थिति में रहने नहीं दे सकते । माली को बगीचा सौंपा तो जाता है पर उसके हाथों बेच नहीं दिया जाता । इस विश्व की व्यवस्था मनुष्य के हाथों सौंपी जरूर गई थी, वह उसे सुन्दर, सुरक्षित और समुन्नत रखे, यह उत्तरदायित्व दिया अवश्य गया था । पर यदि वह उसे सँभालता नहीं - व्यतिक्रम करता है, तो उसी की मनमर्जी नहीं चलती रहने दी जा सकती । माली बदलेगा, क्रम सुधरेगा या व़ह जो भी करेगा, अपने अरमानों के इस सुरम्य दुनियां को इस प्रकार अस्त-व्यस्त नहीं होने देगा, जैसा की हो रहा है, किया जा रहा है ।

Friday, September 2, 2011

मुंह चिढ़ाते गांधी जी

मुंह चिढ़ाते गांधी जी
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मन बार बार और ज़ार ज़ार रो रहा है । बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने बैठा पर ऐसा लिखूंगा और क्या लिखूंगा कुछ पता नहीं ..पर वो ही ज़िंदगी के ऊतार चढ़ाव ..दुख दर्द का सिलसिला और खुशी के बस कुछ पल जो न जाने कब आते हैं और कब चले जाते हैं कुछ पता ही नहीं चलता ..ज़िन्दगी की एक सच्चाई एक हकीक़त ..पैसा ..न जाने ज़िन्दगी में कहां से आया और इतना महत्वपूर्ण हो गया कि कुछ भी और कोई भी इसके आगे सोचता ही नहीं ..तकलीफ होती है किसी के दर्द को देख कर और दुख होता है उस दर्द को कम न कर पाने का । क्यों इस दुनिया में लोग परेशान है क्यों लोग तकलीफ में हैं..जब जानने की कोशिश करते हैं तो अंत में काग़ज़ में छपे गांधी जी ही कारण दिखते हैं ..क्या बापू ने कभी सोचा होगा कि जो उन्होने सारे आंदोलन जिन गरीबों के लिए किये उन्ही गरीबों को नोटो में छपी उनकी शक्ल देखना नसीब भी न होगी ।।