Saturday, December 17, 2011

हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के मुसलमां है हम

शुक्रे खुदा करते हैं हम
सजदा-ए - हक़ अदा करते है हम
दिल में बसा है मादरे वतन
तुझसे मोहब्बत ए वतन करते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इस शोरो गुल के गुबार में
इन इधर उधर की पुकार में
इन रंगे हुए सियार में
तेरी सियासत समझते है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के दिलो जिगर और जां है हम
तिरंगे की शान है हम
खुद क़ाबिज़ो मुखतार है हम
वतन की पहचान है हम
फिर सोचते है कुछ क्यों
बिन बुलाए मेहमां है हम
हिन्द के मुसलमां है हम

इज्ज़त अमन और रोज़गार
बस चंद अपने अरमां है
जितने हम में हैं
उतने ही तुम में है
इतेहापसंद कुछ यहां है
कुछ वहां हैं
हिन्द के मुसलमां है हम

इसकी मिट्टी में दफन है हम ही
इसकी ख़ाक से बने है हम ही
इसके गली कूचों मे चले हैं हम ही
अपने पुरखों की यहीं आशियां है
वासी यहां के हम हैं ये अपना मकां है
हिन्द के मुसलमां है हम ....

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