Monday, October 29, 2012

रोटी और किसान(नाटक theatre artiste of india)

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बाबा का क्रेडिट और बीमा...



( एक गांव खामोश बियाबा-....खाली मंच......पीछे गाने की आवाज़..



गाना



जब आदमी के पेट मेंआती हैं रोटियां

फूली नहीं बदन में समाती हैं रोटियां ...

जितने मज़े हैं सब दिखाती हैं रोटियां

जब आदमी के पेट में आती हैं रोटियां

दर्द दर्द नहीं रहता है बना जाता है दवा

जब ज़िन्दगी का मतलब समझाती है

ये रोटियां....



बाबा और चेले का प्रवेश ...



चेला - बाबा ये हम किस गांव में आ गये ,इतनी मायूसी ..इतनी उदासी ,कौन सी जगह है ये ....

बाबा- इस उदासी ,इस मायूसी को दूर करने के लिए तो हम आये... है

( पीछे से रोने की आवाज़ आती है ..दोनो पीछे की तरफ देखते है तभी एक किसान ..दौड़ता हुआ आता है ..और मंच के आगे बैठ जाता है दोनो बाबा चेला उसकी तऱफ देखते हैं...)

किसान -- हाय-- हाय हम तो लूट गये बर्बाद हो गये..हाय कुछ न बचा...

चेला ( आगे आते हुए उसके कंधे पर हाथ रखता है ) अरे अरे क्या हुआ...क्यों इतने दुखी और निराश हो दोस्त..( किसान कंधे से हाथ झटक देता है और बोलता है ..)

किसान -- दोस्त... ( धूरते हुए)हूं.. क्या तुम भी कोई साहूकार हो जो पहले दोस्त कहते हैं ..फिर दोस्त का घर लूट लेते हैं ..तन से कपड़ा और मुहं से रोटी छीन लेते हैं ...हाय हा. मैं तो लूट गया...( गांव के दो लोग और आ जाते है...)



बाबा ... ( शांति से )... नहीं हम तुम्हारे हमदर्द हैं ... तुम जैसे किसानों की हालत को जानते हैं.......



किसान --- ( दूसरे किसानों की ओर देखते हुए)..ये हमारी हालत को जानते हैं...दिखते तो फकीर हैं ... अरे तुम्हे क्या पता एक किसान को किस किस तकलीफ से गुज़रना पड़ता है ..

दोनो किसान--- गुज़रना पड़ता है

किसान - किस किस मुसीबतों का सामना करना पड़ता है

दोनो किसान - करना पड़ता है ...

( तीनो मुंह बना कर दर्शकों को इशारा करते है ..जैसे ये हमें बता रहा है ..)

बाबा ( चेले की तरफ देख कर मुस्कराते हुए) चलो मान लिया हम नहीं जानते ... कुछ नहीं जानते ...

चेला-- तुम्ही बताओ दो बाबा को अपनी तकलीफें...

किसान ( साथियों को देखते हुए) अरे छोड़ो , तुम फकीर .. क्या कोई मंतर मार कर ....हहहहहह.. सारी परेशानिया दूर कर दो गे ।जाओ बहुत देखे तुम जैसे .... हम किसानों को तो ज़मीन आसमान दोनो से मार पड़ती है ..जो बच जाता है उसे यहां बैठे सूदखोर चूस लेते हैं ..हाय हाय... लूट गया...लूट गया.. ( किसानो को देखते हुए...)

तीनो बोलते हैं --- लूट गये लूट गये...

बाबा - दोस्त पर इसी गांव में महेश भी तो रहता है..उसके साथ भी तो यही सब हुआ ..फसल बर्बाद हो गई घर में कुछ खाने को नहीं बचा था पर उसके पास तो फिर सब कुछ आ गया ..वो तो तुम्हारी तरह नहीं रो रहा...

किसान-( अपने साथियों को और दर्शकों को देखता हुआ ....) लो भई ..ये महेश को भी जानते हैं ( दोनो किसान हंसते हैं )

बाबा मेरे फकीर बाबा ..जानते हो उसकी घरवाली चूड़ैल है ..चूड़ैल ... जादू टना जानती है .उसके घर तो भूत प्रत का डेरा ..है वो ही अनाज रख जाते हैं..( पीछे दोनो किसान भूत की आवाज़े निकालते हैं) सूखे में..बाढ़ में पैसा बहाता हैं ...धत्त ... उसकी और हमारी क्या बराबरी ... हाय हाय हम तो लूट गये बर्बाद हो गये...)...

चेला ( गुस्से में ..)--- चुप चुप ( दोनो किसानो को एक एक हाथ मारता है) चुप वो भी था ..हां वो भी तुम्हारी तरह परेशान ... उसे भी दिया बाबा नें किसान क्रेडिट कार्ड और बीमा का ज्ञान ...

किसान --- अरे जा जा ..हमें नहीं चाहिए तेरे बाबा का ज्ञान अबी बहुत ज़िन्दगी पड़ी है हमारी ..बीमा के चक्ररों मे नहीं पड़ना है हमें हम कोई मर गये है जो बीमा की रकम हमें मिलेगी..बताओ जी बड़े आये बाबा बन कर....

चेला -- अरे अरे मुर्ख.. ये हैं राष्ट्रीय कृषि बीमा की बात --- बाबा आप ही समझाओ...

बाबा-- तुंम जैसे किसानो के लिए ही सरकार ने कृषि बीमा शुरू किया है..फसल का बीमा करवाओऔर चैन से सो जाओ..फसल को कुछ हुआ तो बीमा से नुकसान की राशी पाओ...सरकार तुम्हारे नुकसान की भरपाई करे गई.. और अगली फसल के बीज खरीदने हों तो बनवाओ किसान क्रेडिट कार्ड..।

किसान -- बाबा ऐसी कई योजनाए आती हैं ... पर जब जाओ तो ये काग़ज़ कम है वो कागज़ कम है ये लाओ वो लाओ ..इधर जाओ उधर जाओ ..इससे साइन करवाओ उससे साइन करवाओ .. छोड़ो छोड़ो.. उन झझटो में हमें नही पड़ना ...

बाबा - बिलकुल नहीं कृषि बीमा के लिए सिर्फ ये फार्म भरो ,फोटो लगाओ और पास के किसी भी सहकारी बैंक में जा कर झटपट बींमा करवाओ ,,और खुशिया मनाओ.. चेले खींच सदानंद की फोटो ..और एक फोटो इसकी भी



चेला .ये पहली फोटो

ये दूसरी फोटो

लो भर गया है फार्म

दुख..और परेशानी

gone gone...

end ...... ..

www.theatreartisteofindia.com









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